फीफा वर्ल्ड कप में पांच बार की चैंपियन ब्राजील की टीम को टूर्नामेंट से बाहर करने के बाद सोशल मीडिया पर दुनिया भर में हालैंड और नॉर्वे को लेकर दीवानगी हद से ज्यादा बढ़ गई है. नॉर्वे और इंग्लैंड के क्वार्टर फाइनल की टक्कर को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है. लाखों फ़ैंस और कई एक्सपर्ट्स नॉर्वे को विश्व विजेता टीम की तरह भी देखने लगे हैं. लेकिन इन सबके पीछे एक और सुपरहीरो की कहानी उस तरह सामने नहीं आ सकी है और वो कहानी है मौत को छू कर वापस आने वाले नॉर्वे के कोच स्टॉल सूलबाकेन (Ståle Solbakken) की.
‘क्लिनिकली डेड' हुए, फिर मौत को छूकर वापस आ गए सूलबाकेन
सूलबाकेन की कमबैक की कहानी खेलों की दुनिया की सबसे ज़्यादा दिल छू लेने वाली कहानियों में से एक है. 25 साल पहले 13 मार्च 2001 को एक विंबलडन के लिए खेलते वक्त मिडफील्डर सूलबाकेन को हार्ट अटैक आ गया. उनके क्लब के डॉक्टर फ्रैंक ओडगार्ड उनकी मदद के लिए आगे आए और उनकी दिल की धड़कनें तेज हो गईं जब उन्हें पता चला सूलबाकेन का दिल धड़कना बंद हो चुका है.
7 मिनट तक क्लिनिकली डेड रहे सूलबाकेन
ओडगार्ड ने एक खिलाड़ी के जरिये एंबुलेंस मंगवाया और तबतक वो खुद सूलबाकेन को कार्डियक मसाज-CPR देते रहे. एम्बुलेंस के पहुंचने पर सूलबाकेन को तभी ‘क्लिनिकली डेड' घोषित कर दिया गया.
एम्बुलेंस में अस्पताल ले जाते समय, करीब 7 मिनट बाद उनकी सांस चलने लगी. मौत को छूकर वापस लौटे सूलबाकेन के शरीर में पेसमेकर लगा दिया गया.
थोड़े दिनों बाद डॉक्टरों के मशविरे पर सूलबाकेन ने फुटबॉल को अलविदा कहा, लेकिन फुटबॉल के प्यार ने उन्हें अब एक खिलाड़ी से हटकर खिलाड़ियों और टीम को तैयार करने वाला कोच बना दिया.
उम्दा मिडफील्डर से बन गए कमाल के कोच
डेनमार्क के FC कोपनहेगेन के लिए 6 बार डेनिश लीग जीतने वाले सूलबाकेन के लिए नॉर्वे को क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचाना किसी सपने की कहानी से कम नहीं. पिछले 6 साल से नॉर्वे की अगुआई करते हुए उन्होंने अर्लिंग हालैंड (Erling Haaland) और मार्टिन ओडगार्ड (Martin Odegaard) जैसे खिलाड़ियों के टैलेंट को परवान चढ़ने में मदद की.
दुनिया भर के फ़ैन्स की तरह भारतीय फ़ुटबॉल फ़ैन्स अक्सर ये सवाल पूछते हैं कि मैनचेस्टर सिटी के गोलमशीन हालैंड और आर्सेनल के कप्तान ओडगार्ड वाली नॉर्वे टीम के मैच में सूलबाकेन इन दोनों को कैसे साथ खिलाएंगे?
नॉर्वे में जन्मे 6 फ़ीट 3 इंच के स्टॉल सूलबाकेन एक नामचीन मिडफ़ील्डर फ़ुटबॉलर भी रहे जिन्होंने अपने देश के लिए 58 मैचों में 9 गोल और विंबलडन और अलाबोर्ग BK जैसे अलग-अलग क्लब के लिए करीब 300 मैचों में 87 गोल भी किये.
डर कर खेलना मना है!
खिलाड़ी से ज़्यादा उन्हें ख्याति अब कोच के तौर पर मिल रही है. क्योंकि, नॉर्वे को ऐतिहासिक क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचाने का कारनामा करने वाले वो अपने देश के पहले कोच बन गए हैं. 4-3-3 की रणनीति से अपनी टीम को मैच खिलवाने वाले सूलबाकेन शांत पर अनुशासनप्रिय कोच हैं. उनका अपनी टीम के लिए अक्सर एक ही मंत्र होता है- 'डर कर खेलोगे तो बड़े टूर्नामेंट नहीं जीतोगे.'
यह भी पढ़ें- कोलंबिया के वर्ल्ड कप से बाहर होते ही स्टार खिलाड़ी को मिली 'जान से मारने की धमकी', वजह जानकर हैरान रह जाएगी दुनिया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं