जर्मनी के कोच जूलियन नागेल्समान के लिए आने वाला समय मुश्किल होने वाला है. टीम फीफा वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में पराग्वे के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हारकर बाहर हो गई है. जर्मनी वर्ल्ड कप के इतिहास में पहली बार शूटआउट में हारी है. जर्मनी के फैंस और फुटबॉल बोर्ड जरूर नागेल्समान और उनकी टीम के प्रदर्शन से निराश होंगे, लेकिन बायर्न म्यूनिख के पूर्व मैनेजर ने साफ कहा है कि वह जिम्मेदारी से भागने वाले नहीं है. जर्मनी की इस हार के साथ ही लिवरपूल के पूर्व मैनेजर जुर्गेन क्लॉप द्वारा उनकी जगह लिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
नागेल्समान का इस्तीफा देने से इनकार
नागेल्समान इस हार के बावजूद अपने पद पर रहना चाहते हैं. उनका कॉन्ट्रैक्ट 2028 यूरोपियन चैंपियनशिप तक है. लेकिन वर्ल्ड कप के प्री क्वार्टर फाइनल में टीम के असफल रहने के बाद 38 साल के इस कोच पर कड़ी नज़र रहेगी. नागेल्समान ने जर्मन ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ से कहा,"मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो भाग जाए. मैं खेलना जारी रखना चाहता हूं, लेकिन फुटबॉल में सब कुछ हमेशा आपके हाथ में नहीं होता. अगर फेडरेशन चाहेगा, तो मैं यूरोपियन चैंपियनशिप और नेशंस लीग की तैयारी करूंगा."
लिवरपूल और बोरुसिया डॉर्टमुंड के पूर्व मैनेजर जुर्गेन क्लॉप के बारे में लंबे समय से जर्मन टीम के भविष्य के कोच होने की अफवाह हैं. लेकिन क्लॉप ने सोमवार को इस संभावना पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. क्लॉप ने कहा,"मैं समझता हूं कि मेरे नाम का ज़िक्र हो रहा है, लेकिन इस बारे में बात करने का यह सही समय नहीं है. खासकर मेरे साथ तो बिल्कुल नहीं."
हालांकि फेडरेशन की तरफ से अभी तक कोई अनाउंसमेंट नहीं आया है, लेकिन नागेल्समान के नौकरी पर बने रहने के चांस कम हैं, खासकर अगर क्लॉप, जो अभी किसी क्लब को कोचिंग नहीं दे रहे हैं, मैनेजर का रोल संभालने को तैयार हों.
जर्मनी वर्ल्ड कप से बाहर
जोस कैनाले ने पहले ही सडन डेथ पेनल्टी किक पर गोल किया और ऑरलैंडो गिल ने शूटआउट में दो महत्वपूर्ण बचाव किए जिससे पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को 4-3 से हरा दिया. यह मौजूदा विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट का अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर है.
राउंड ऑफ़ 32 का यह मैच अतिरिक्त समय के बाद 1-1 से बराबर रहा था. पराग्वे ने 42वें मिनट में जूलियो एनसिसो के हेडर से किए गए गोल से बढ़त हासिल की, लेकिन चार बार के चैंपियन जर्मनी के लिए काई हावर्ट्ज़ ने 52वें मिनट में बराबरी का गोल दाग दिया.
फीफा रैंकिंग में 34वें स्थान पर मौजूद पराग्वे की जीत पर बहुत कम सट्टा लगा था लेकिन उसने 12वें स्थान पर काबिज जर्मनी को हराकर दुनिया भर के फुटबाल प्रेमियों को हैरान कर दिया. पराग्वे की टीम अब शनिवार को फिलाडेल्फिया में राउंड ऑफ 16 में मंगलवार को फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगी.
जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था क्योंकि प्रमुख प्रतियोगिताओं में सात बार पेनल्टी शूटआउट में से छह में उसने जीत हासिल की थी. उसने 1976 के यूरोपीय चैम्पियनशिप के फाइनल में तत्कालीन चेकोस्लोवाकिया से हारने के बाद से पेनल्टी शूटआउट में लगातार छह मैच जीते थे.
इससे पहले दोनों टीमों के बीच विश्व कप में केवल एक मैच खेला गया था. जर्मनी ने 2002 में अंतिम 16 के उस मैच में पराग्वे को 1-0 से हराया था. पराग्वे ने इस तरह से 24 साल बाद उसका बदला चुकता कर दिया. पराग्वे इससे पहले पांच बार विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में हिस्सा ले चुका था, लेकिन एक भी गोल करने में असफल रहा था. इनमें से वह केवल एक बार ही आगे बढ़ पाया था, जब उसने विश्व कप 2010 में अंतिम 16 में जापान को पेनल्टी शूटआउट में हराया था.
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