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रेफरी की आंखों से दिख रहा FIFA World Cup 2026, सेंसर लगे फुटबॉल और ऑफसाइड फैसले में टेक्नोलॉजी कर रहे कमाल

FIFA World Cup 2026 में AI तकनीक और रेफरी बॉडी कैमरे चर्चा का विषय बने हुए हैं. वहीं स्मार्ट बॉल और एडवांस ऑफसाइड सिस्टम फैसलों को सटीक बना रहे हैं.

रेफरी की आंखों से दिख रहा FIFA World Cup 2026, सेंसर लगे फुटबॉल और ऑफसाइड फैसले में टेक्नोलॉजी कर रहे कमाल
AFP/NDTV

FIFA World Cup 2026 में इस बार सिर्फ खिलाड़ियों का खेल ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI भी चर्चा में है. फ्रांस-सेनेगल, स्पेन-केप वर्डे, अर्जेंटीला, ब्राजील के हुए मुकाबलों के दौरान टीवी दर्शकों ने कई ऐसे दृश्य देखे, जो पहले कभी संभव नहीं थे. पेनल्टी बॉक्स में हुई भिड़ंत हो या किसी फाउल का विवाद, दर्शकों को वही नजारा दिखा जो मैदान पर मौजूद रेफरी अपनी आंखों से देख रहा था.

यह संभव हुआ रेफरी बॉडी कैमरे यानी रेफ-कैम की वजह से, जिसे फीफा ने Lenovo के सहयोग से इस वर्ल्ड कप में बड़े पैमाने पर लागू किया है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि AI अभी मैच के फैसले नहीं ले रहा. गोल देना है या नहीं, पेनल्टी है या नहीं, रेड कार्ड दिखाना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला आज भी इंसानी रेफरी और वीडियो असिस्टेंट रेफरी यानी VAR अधिकारियों के हाथ में ही है.

Lenovo chairman Yang Yuanqing and FIFA president Gianni Infantino

लेनोवो के चेयरमैन यांग युआनकिंग और फीफा के प्रेसिडेंट जियानी इन्फेंटिनो
Photo Credit: AFP

दरअसल, वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले लेनोवो के चेयरमैन यांग युआनकिंग और फीफा के प्रेसिडेंट जियानी इन्फेंटिनो ने AI आधारित कई नई तकनीकों की घोषणा की थी. फीफा का कहना था कि इन तकनीकों का मकसद खेल को अधिक पारदर्शी, सटीक और समझने योग्य बनाना है.

सबसे ज्यादा चर्चा Ref Cam की हो रही है. रेफरी के सिर पर लगे इस कैमरे से रिकॉर्ड हुई फुटेज को AI आधारित वीडियो स्टेबलाइजेशन तकनीक के जरिए रियल टाइम में स्थिर किया जाता है. क्योंकि रेफरी पूरे मैच में लगातार दौड़ते रहते हैं, इसलिए सामान्य कैमरे की रिकॉर्डिंग काफी हिलती है.

Ref Cam

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AI सॉफ्टवेयर इस झटके को कम कर फुटेज को साफ और देखने योग्य बनाता है. यही वजह है कि दर्शक अब मैदान की घटनाओं को ठीक उसी नजरिए से देख पा रहे हैं, जैसे रेफरी देखता है.

VAR टेक्नोलॉजी

हालांकि यह कैमरा किसी फैसले का आधार नहीं है. इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रसारण और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. यानी यह वीडियो असिस्टेंट रेफरी की जगह नहीं लेता और न ही रेफरी को बताता है कि उसे क्या फैसला लेना चाहिए.

मैदान पर फैसलों को अधिक सटीक बनाने के लिए दूसरी तकनीकें लगातार काम कर रही हैं. फीफा वर्ल्ड कप 2026 में एडवांस्ड सेमी-ऑटोमेटेड ऑफसाइड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

VAR Technology

वीडियो असिस्टेंट रेफरी टेक्नोलॉजी
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स्टेडियम में लगे विशेष कैमरे खिलाड़ियों की गतिविधियों को ट्रैक करते हैं, जबकि मैच बॉल के भीतर मौजूद सेंसर हर सेकंड सैकड़ों डेटा पॉइंट भेजते हैं. 

इन जानकारियों को AI और कंप्यूटर विजन सिस्टम के जरिए प्रोसेस किया जाता है, जिससे ऑफसाइड की स्थिति का थ्रीडी विश्लेषण तैयार होता है. इसके बाद अधिकारियों को अलर्ट मिलता है, लेकिन अंतिम निर्णय फिर भी इंसानी मैच अधिकारी ही लेते हैं.

फुटबॉल के अंदर लगे हैं सेंसर

वर्ल्ड कप की आधिकारिक फुटबॉल में इस्तेमाल की जा रही कनेक्ट बॉल टेक्नोलॉजी भी तकनीकी व्यवस्था का अहम हिस्सा है. गेंद के भीतर लगे सेंसर यह रिकॉर्ड करते हैं कि गेंद को कब और किस खिलाड़ी ने छुआ. इससे ऑफसाइड और हैंडबॉल जैसे मामलों में VAR टीम को अतिरिक्त जानकारी मिलती है.

Football Censor

फुटबॉल में सेंसर लगाने की शुरुआत पहले ही हो चुकी है
Photo Credit: Social Media

इस बार फीफा ने खिलाड़ियों के थ्रीडी डिजिटल अवतार भी तैयार किए हैं. टूर्नामेंट में शामिल खिलाड़ियों की बॉडी स्कैनिंग कर AI की मदद से उनके डिजिटल मॉडल बनाए गए हैं. इससे खिलाड़ियों की पहचान, ट्रैकिंग और ऑफसाइड विश्लेषण पहले से ज्यादा सटीक हो गया है. यही तकनीक प्रसारण में दिखने वाले थ्रीडी रिप्ले और विजुअल एनिमेशन को भी अधिक वास्तविक बनाती है.

लेकिन AI का इस्तेमाल सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है.

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फीफा और लेनोवो का  Football AI Pro

FIFA और Lenovo ने मिलकर Football AI Pro नाम का एक नया प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है, जिसे वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही सभी 48 टीमों को उपलब्ध कराया गया है. फीफा के अनुसार इसका उद्देश्य बड़ी और छोटी टीमों के बीच तकनीकी संसाधनों की खाई को कम करना है, ताकि हर टीम को उच्च स्तर के डेटा विश्लेषण की सुविधा मिल सके.

Football AI Pro मैच के दौरान नहीं, बल्कि मैच खत्म होने के बाद काम करता है. यह आधिकारिक मैच डेटा, खिलाड़ी ट्रैकिंग डेटा और वीडियो फुटेज का विश्लेषण करके कोचों और विश्लेषकों के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करता है. सिस्टम टीमों को पासिंग पैटर्न, प्रेसिंग, ट्रांजिशन, अटैकिंग मूवमेंट और रणनीतिक कमजोरियों जैसी जानकारियां उपलब्ध कराता है. हालांकि फीफा ने साफ किया है कि यह तकनीक कोचों या विश्लेषकों की जगह नहीं लेती. अंतिम रणनीतिक फैसले अब भी इंसानी कोच और तकनीकी स्टाफ ही लेते हैं.

दिलचस्प बात यह है कि वर्ल्ड कप के शुरुआती मुकाबलों में अब तक कोई ऐसा बड़ा विवाद सामने नहीं आया है जिसमें AI तकनीक को लेकर सवाल उठे हों. इसके उलट रेफरी कैमरे से दिखाई गई फुटेज की चर्चा हुई रसोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई है और कई प्रशंसकों ने माना है कि इससे रेफरी के फैसलों को समझना पहले से आसान हुआ है.

FIFA World Cup 2026

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अब तक के अनुभव से एक बात साफ है. FIFA World Cup 2026 में AI तकनीक मैदान पर रेफरी की जगह नहीं ले रही, बल्कि उसकी मदद कर रही है. AI फुटेज को स्थिर बना रहा है, खिलाड़ियों और गेंद को ट्रैक कर रहा है, ऑफसाइड विश्लेषण को तेज और सटीक बना रहा है, थ्रीडी अवतार तैयार कर रहा है और मैच के बाद सभी 48 टीमों को बेहतर स्ट्रैटेजिक एनालिसिस उपलब्ध करा रहा है.

यानी फुटबॉल का भविष्य पूरी तरह मशीनों के हाथ में नहीं, बल्कि इंसानी निर्णय और AI तकनीक के संयोजन में दिखाई दे रहा है. आने वाले नॉकआउट मुकाबलों में जब दबाव बढ़ेगा, तब दुनिया की नजर सिर्फ खिलाड़ियों पर नहीं, बल्कि उन तकनीकों पर भी होगी जो यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि वर्ल्ड कप का फैसला विवादों से नहीं, बल्कि खेल से हो.

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लेखक के बारे में
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अभिजीत श्रीवास्तव
Assistant Editor, Digital Content
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