- स्पेसएक्स के रॉकेट की चांद से हुई टक्कर LIVE रिकॉर्ड नहीं हो सकी.
- नासा ने साफ किया है कि इस टक्कर से धरती या इंसानों को किसी तरह का खतरा नहीं है.
- वैज्ञानिक इसे चांद की सतह और सौर मंडल के विकास को समझने का दुर्लभ वैज्ञानिक प्रयोग मान रहे हैं.
करीब डेढ़ साल तक अंतरिक्ष में भटकने के बाद स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का एक हिस्सा चांद की सतह से टकरा गया है या नहीं अभी इसकी पुष्टि की जानी है. बुधवार को दोपहर (भारतीय समयानुसार) यह टक्कर तय थी. यह एक अनियोजित घटना थी, जिसे वैज्ञानिकों के लिए एक दुर्लभ प्रयोग से कम नहीं माना जा रहा है. इस घटना को लेकर पूरी दुनिया में उत्सुकता बनी हुई है. उम्मीद की जा रही थी कि इस दुर्लभ घटना को LIVE देखा जा सकेगा, लेकिन ये संभव नहीं हो सका क्योंकि टक्कर के समय चांद की परिक्रमा कर रहा कोई भी सैटेलाइट ऐसी स्थिति में नहीं था कि वह इसे सीधे रिकॉर्ड कर सके.
वैज्ञानिकों के लिए अब पहला काम टक्कर से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना करके यह पता लगाना होगा कि चांद की सतह पर यह टक्कर कब हुई और नया गड्ढा कहां बना है. बताया जा रहा है कि इसकी टक्कर आइंस्टीन क्रेटर के पास हुई है. चांद की सतह पर जहां यह टक्कर हुई है, दक्षिण कोरिया का एक लूनर ऑर्बिटर उसके सबसे करीब था. उसने टक्कर से कुछ समय पहले उस इलाके के पास से उड़ान भरी थी. हालांकि उसकी टीम ने कहा है कि रिकॉर्ड किया गया डेटा पहले वैज्ञानिक संस्थान विश्लेषण करेंगे, उसके बाद ही तस्वीरें या वीडियो जारी किए जाएंगे.
उधर नासा का लूनर रिकॉनिसैन्स ऑर्बिटर अगले कुछ दिनों में उस स्थान की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेगा. इन्हीं तस्वीरों से नए क्रेटर की पुष्टि होगी. अमेरिका और अन्य जगहों पर मौजूद बड़े-बड़े टेलीस्कोप ने इस टक्कर से हुई संभावित चमक और उठे धूल के गुबार को रिकॉर्ड करने की कोशिश की. हालांकि ऐसे डेटा को साफ करके उसकी पुष्टि करने में कई घंटे या कई दिन भी लग सकते हैं.

धरती की तरफ बढ़ते एस्टेरॉयड का इलस्ट्रेशन
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साइंस की दुनिया में ऐसा पहली बार देखा गया
वैज्ञानिक इस घटना को बेहद दुर्लभ अवसर मान रहे हैं. वैसे तो हर दिन छोटे-बड़े उल्कापिंड चांद से टकराते रहते हैं, लेकिन उनके बारे में पहले से कुछ पता नहीं होता. न उनका आकार मालूम होता है और न उनकी गति. पर इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है. वैज्ञानिकों को पहले से पता था कि कौन-सी वस्तु टकराएगी, उसका द्रव्यमान (Mass) कितना है, उसकी गति कितनी होगी और वह किस दिशा से चांद से टकराएगी. यही वजह है कि यह घटना वैज्ञानिकों के लिए एक अहम प्रयोग के जैसी बन गई.
टक्कर के बाद उड़ी धूल और मलबे से हो कर गुजरने वाली सूर्य की रोशनी का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि चांद की सतह के नीचे कौन-कौन से खनिज मौजूद हैं. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि अरबों वर्ष पहले चांद कैसे बना, उसकी सतह समय के साथ कैसे बदली और पूरे सौर मंडल का विकास किस तरह हुआ. भविष्य में किसी ग्रह या चंद्रमा पर होने वाले प्रभावों को समझने में भी यह डेटा काफी उपयोगी होगा.

नासा
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इस टक्कर से धरती को कोई खतरा नहींः नासा
स्पेसएक्स के रॉकेट के चांद से टकराने को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं थीं. लेकिन नासा ने स्पष्ट किया है कि इससे धरती को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है.
नासा के प्रवक्ता जिमी रसेल के मुताबिक एजेंसी इस स्थान का अध्ययन जरूर करेगी, लेकिन यह घटना पूरी तरह सुरक्षित है और इसका पृथ्वी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
नासा इस अवसर का इस्तेमाल चांद से जुड़े वैज्ञानिक डेटा जुटाने और अंतरिक्ष में घूम रही वस्तुओं की ट्रैकिंग तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए करेगा.
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के खगोलशास्त्री डॉ. मैट बोथवेल के अनुसार, यह चांद से किसी बड़ी वस्तु की टक्कर जरूर है, लेकिन यह धरती के लिए बिल्कुल भी खतरनाक नहीं है. इसे केवल एक वैज्ञानिक घटना के रूप में देखा जाना चाहिए.

स्पेसएक्स का फाल्कन-9
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स्पेसएक्स का जो रॉकेट टकराया, वह कौन-सा था?
यह वस्तु स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का अपर स्टेज था. फाल्कन-9 दुनिया के सबसे सफल रीयूजेबल रॉकेटों में से एक है. इसका फर्स्ट स्टेज धरती पर वापस लौट आता है, जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अपर स्टेज अपना काम पूरा करने के बाद अक्सर अंतरिक्ष में ही रह जाता है.
जिस हिस्से की टक्कर हुई, वह लगभग पांच मंजिला इमारत जितना बड़ा था और उसका वजन करीब 4,000 किलोग्राम से अधिक बताया गया है.
यह रॉकेट जनवरी 2025 में अमेरिका और जापान के संयुक्त चंद्र मिशन के तहत लॉन्च किया गया था, जिसमें दो लूनर लैंडर और वैज्ञानिक उपकरण भेजे गए थे. मिशन सफल रहा, लेकिन अपर स्टेज अंतरिक्ष में भटकता रह गया.

चांद की सतह पर गड्ढे
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कहां पर टकराया रॉकेट?
खगोलविद बिल ग्रे 'प्रोजेक्ट प्लूटो' चलाते हैं और खगोलीय पिंडों को ट्रैक करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाते हैं. बिल ग्रे के अनुसार यह रॉकेट चांद के आइंस्टीन क्रेटर के पास टकराया. आइंस्टीन क्रेटर चांद के उस हिस्से में मौजूद है जहां सूर्य की रोशनी पड़ती है और जो पृथ्वी की ओर दिखाई देने वाले क्षेत्र के करीब है. हालांकि इतनी दूरी होने के कारण सामान्य आंखों से इस टक्कर को देख पाना संभव नहीं था. केवल अत्याधुनिक टेलीस्कोप ही कुछ क्षण के लिए पैदा हुई चमक या धूल के बादल को दर्ज कर सकते थे.

धरती पर मौजूद टेलीस्कोप अब इस टक्कर का अध्ययन करेंगे
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आखिर चांद की ओर कैसे बढ़ गया यह रॉकेट?
इस कहानी की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई. फ्लोरिडा से स्पेसएक्स का फाल्कन-9 रॉकेट दो लूनर लैंडरों को लेकर अंतरिक्ष में भेजा गया. रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अपना काम पूरा करने के बाद पृथ्वी और चांद के बीच लंबी अंडाकार कक्षा में घूमता रहा. अगले करीब 18 महीनों में पृथ्वी, चांद और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण ने धीरे-धीरे उसकी कक्षा बदल दी.
इतना ही नहीं, एक्सपर्ट्स के मुताबिक उसकी दिशा बदलने में सूर्य की रोशनी का बेहद हल्का दबाव भी भूमिका निभाता रहा. आखिरकार खगोलविदों ने सार्वजनिक ट्रैकिंग डेटा के आधार पर यह पता लगाया कि रॉकेट का यह हिस्सा चांद से टकराने वाला है. यानी यह दुर्घटना पूरी तरह प्राकृतिक गुरुत्वीय प्रभावों का परिणाम थी.
धरती से यह टक्कर क्यों नहीं दिखी?
कई लोगों के मन में सवाल था कि अगर चांद तो हमें दिखाई देता है, फिर टक्कर क्यों नहीं दिखी?
असल में चांद और पृथ्वी के बीच औसतन 3.84 लाख किलोमीटर की दूरी है. टक्कर से पैदा हुई चमक बेहद छोटी और कुछ क्षणों की थी. सामान्य आंखें इतनी हल्की चमक को नहीं देख सकतीं. केवल बड़े वैज्ञानिक टेलीस्कोप या विशेष कैमरे ही इस तरह की घटनाओं को रिकॉर्ड कर सकते हैं. इसी वजह से आम लोगों के लिए यह घटना दिखाई नहीं दी.
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