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Zero Oil Cooking: बिना एक बूंद तेल के भी बन सकता है स्वादिष्ट खाना, जानिए क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड

Zero Oil Cooking: खाने में तेल कम करने की सलाह नई नहीं है, लेकिन अब लोग इसे अपनी रसोई में अपनाने भी लगे हैं. यही वजह है कि जीरो ऑयल कुकिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इस तरीके में बिना तेल के खाना पकाया जाता है, फिर भी स्वाद और पोषण दोनों बनाए रखने की कोशिश की जाती है. आइए जानते हैं क्या है जीरो ऑयल कुकिंग और क्यों बढ़ रही है इसकी चर्चा.

Zero Oil Cooking: बिना एक बूंद तेल के भी बन सकता है स्वादिष्ट खाना, जानिए क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड
Zero Oil Cooking
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Zero Oil Cooking: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग पहले से ज्यादा अपनी सेहत पर ध्यान देने लगे हैं. बढ़ता मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़ी बीमारियों ने लोगों को अपने खानपान की आदतों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया है. यही वजह है कि जीरो ऑयल कुकिंग यानी बिना तेल के खाना बनाने का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने की अपील की थी. इसके बाद कई लोग अपनी रसोई में ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जिनसे स्वाद भी बना रहे और तेल की मात्रा भी कम हो सके.

क्या है जीरो ऑयल कुकिंग?

जीरो ऑयल कुकिंग का मतलब है भोजन बनाते समय तेल का बिल्कुल इस्तेमाल न करना. इसमें खाना उबालकर, भाप में पकाकर, बेक करके या नॉन-स्टिक बर्तनों में तैयार किया जाता है. कई बार सब्जियों और दूसरी सामग्री में मौजूद प्राकृतिक नमी ही खाना पकाने के लिए पर्याप्त होती है. इस तरीके से भोजन में अतिरिक्त फैट नहीं जुड़ता और उसका प्राकृतिक स्वाद भी काफी हद तक बरकरार रहता है.

बिना तेल के कैसे आता है स्वाद?

अक्सर लोगों को लगता है कि तेल के बिना खाना स्वादिष्ट नहीं बन सकता, लेकिन विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं. अदरक, लहसुन, प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, धनिया, पुदीना और विभिन्न मसाले खाने में गहराई और स्वाद जोड़ सकते हैं. इसके अलावा सब्जियों या दालों को धीमी आंच पर पकाने से उनका प्राकृतिक स्वाद और खुशबू बेहतर तरीके से उभरकर सामने आती है. यही कारण है कि कई शेफ भी अब कम तेल या बिना तेल वाली रेसिपीज को बढ़ावा दे रहे हैं.

स्टीमिंग और स्लो कुकिंग का बढ़ता चलन

जीरो ऑयल कुकिंग में स्टीमिंग यानी भाप में पकाना सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक माना जाता है. इससे सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य पदार्थों के पोषक तत्व काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं. वहीं स्लो कुकिंग के दौरान भोजन अपने ही रस में धीरे-धीरे पकता है, जिससे उसका स्वाद और बनावट बेहतर हो सकती है. यही वजह है कि यह तरीका हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

डॉ अनूप मिश्रा का कहना है, "अतिरिक्त तेल का सेवन मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकता है. ऐसे में तेल की मात्रा कम करना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन पूरी तरह तेल छोड़ने के बजाय संतुलन बनाए रखना ज्यादा जरूरी है. शरीर को कुछ मात्रा में हेल्दी फैट की आवश्यकता होती है."

सिर्फ ट्रेंड नहीं, बदलती सोच

जीरो ऑयल कुकिंग केवल एक नया फूड ट्रेंड नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवनशैली की ओर बढ़ता एक कदम भी है. यह लोगों को सिखाती है कि स्वादिष्ट भोजन के लिए हमेशा ज्यादा तेल की जरूरत नहीं होती. सही सामग्री, सही तकनीक और संतुलित खानपान के साथ कम तेल या बिना तेल का भोजन भी स्वाद और सेहत दोनों का अच्छा मेल बन सकता है. धीरे-धीरे यह सोच भारतीय रसोई में अपनी जगह बना रही है.

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