India's Watermelon Capital: गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में सबसे ज्यादा जिस फल की चमक दिखाई देती है, वह है तरबूज. लाल, रसदार और पानी से भरपूर यह फल सिर्फ लोगों को ठंडक ही नहीं देता, बल्कि गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखने का भी काम करता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है जिसे तरबूज की राजधानी (Watermelon Capital) कहा जाता है? यह शहर है महाराष्ट्र का सोलापुर.
सोलापुर अपने बड़े पैमाने पर होने वाली तरबूज की खेती के लिए पूरे देश में मशहूर है. यहां हाईवे के किनारे दूर-दूर तक फैले खेत गर्मियों में तरबूजों से भर जाते हैं. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे यहां के बाजारों में तरबूज की आवक भी तेज हो जाती है. यही वजह है कि सोलापुर का नाम आज देश के सबसे बड़े तरबूज उत्पादक इलाकों में लिया जाता है.
क्यों खास है सोलापुर का तरबूज?
सोलापुर की मिट्टी और मौसम तरबूज की खेती के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं. यहां की गर्म जलवायु और पर्याप्त धूप तरबूज को जल्दी और अच्छी क्वालिटी के साथ तैयार करने में मदद करती है. किसानों के मुताबिक यहां उगने वाले तरबूज आकार में बड़े, मीठे और ज्यादा रसदार होते हैं. यही कारण है कि सोलापुर का तरबूज सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों तक पहुंचता है. गर्मियों में यहां से ट्रकों के जरिए बड़ी मात्रा में तरबूज दूसरे शहरों में भेजे जाते हैं.
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हाईवे किनारे दिखते हैं तरबूज के खेत
अगर आप गर्मी के मौसम में सोलापुर से गुजरें, तो सड़क किनारे दूर-दूर तक फैले तरबूज के खेत आसानी से नजर आ जाएंगे. कई किसान सीधे खेतों के पास ही तरबूज बेचते दिखाई देते हैं.
यह नजारा लोगों को काफी आकर्षित करता है. कई यात्री रास्ते में रुककर ताजे तरबूज खरीदना पसंद करते हैं. गर्म हवाओं के बीच खेतों में पड़े हरे-हरे तरबूज सोलापुर की पहचान बन चुके हैं.
किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया
सोलापुर में तरबूज की खेती हजारों किसानों की आय का बड़ा स्रोत है. गर्मियों में इसकी मांग तेजी से बढ़ती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल जाता है. कई किसान पारंपरिक फसलों की जगह अब तरबूज की खेती को ज्यादा महत्व देने लगे हैं क्योंकि इसमें कम समय में अच्छी कमाई हो जाती है. खास बात यह है कि तरबूज की फसल लगभग 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है.
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गर्मी बढ़ते ही बढ़ जाती है मांग
अप्रैल और मई के महीने में जब तापमान तेजी से बढ़ता है, तब तरबूज की मांग भी अपने चरम पर पहुंच जाती है. लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए भी खूब खाते हैं.
सोलापुर के लोकल बाजारों में इस दौरान भारी मात्रा में तरबूज पहुंचता है. कई व्यापारियों के मुताबिक गर्मियों के दिनों में यहां हर दिन हजारों टन तरबूज की बिक्री होती है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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