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बंगाल में ‘डिलीट वोटर्स’ से BJP की जीत...SIR पर सवाल उठाते हुए शशि थरूर का बड़ा दावा

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाने और अपीलों के देर से निपटारे का असर नतीजों पर पड़ा हो सकता है. उन्होंने दावा किया कि लगभग 91 लाख नाम हटे और 34 लाख ने अपील की, जबकि केरल में SIR से कांग्रेस को फायदा हुआ.

बंगाल में ‘डिलीट वोटर्स’ से BJP की जीत...SIR पर सवाल उठाते हुए शशि थरूर का बड़ा दावा
  • बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और भाजपा ने 207 सीटें जीतकर सरकार बनाई
  • कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए जाने और अपील प्रक्रिया में देरी पर गंभीर सवाल उठाए
  • पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख नाम हटाए गए, जिनमें से 34 लाख लोगों ने वोट देने का दावा किया था
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पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आए अब कई दिन हो चुके हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा अभी भी पश्चिम बंगाल की हो रही है. पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली, जिसे ममता बनर्जी समेत कई नेता पचा नहीं पा रहे हैं. इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पर तीखे सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और अपीलों के वेरिफिकेशन में देरी का राज्य के चुनावी नतीजों पर निर्णायक असर पड़ सकता है. वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की बात करते हुए थरूर ने कहा कि लिस्ट से करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए थे. इनमें से लगभग 34 लाख लोगों ने अपील कर दावा किया कि वे असली वोटर हैं.

SIR मामले में उठे सवालों के जवाब जरूरी

शशि थरूर ने बताया कि इनमें से बहुत कम मामलों का फैसला वोटिंग से पहले हुआ, जिससे ज्यादातर मामले वोटिंग के समय तक अनसुलझे ही रह गए. स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान 'इंडिया, दैट इज भारत' राउंडटेबल में बोलते हुए थरूर ने कहा, "SIR मामले में, मैंने जो सवाल उठाया है, उसका जवाब मिलना जरूरी है, बंगाल का मामला देखिए. जहां वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम हटा दिए गए. इनमें से 34 लाख जीवित लोगों ने अपील की और कहा कि वे यहीं मौजूद हैं और उन्हें वोट देने का हक है. नियमों के मुताबिक, हर मामले का फैसला अलग-अलग होना था, इसलिए वोटिंग से पहले सिर्फ कुछ सौ मामलों का ही फैसला हो पाया. आज भी करीब 31-32 लाख लोग ऐसे हैं, जो शायद आने वाले सालों में फैसले के बाद असली वोटर साबित हो जाएं, लेकिन वे वोट देने का अपना मौका गंवा चुके हैं."

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क्या असली वोटर भी नहीं डाल पाए वोट

इतने बड़े आंकड़े पर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि BJP की जीत का अंतर, जो करीब 30 लाख वोटों का था, पेंडिंग वोटर अपीलों की संख्या से काफी मेल खाता है. इससे यह सवाल उठता है कि क्या योग्य वोटर असल में अपना वोट नहीं डाल पाए. BJP बंगाल में 30 लाख वोटों के अंतर से जीती. अब आप ही बताइए, क्या यह पूरी तरह से निष्पक्ष और लोकतांत्रिक है? यही सवाल मैं पूछता हूं. सच कहूं तो, मुझे फर्जी हटाए गए अनुपस्थित या पलायन कर चुके वोटरों के नाम हटाने से कोई दिक्कत नहीं है. इसके अलावा, थरूर को शक है कि केरल में डुप्लीकेट या एक से ज्यादा वोटर रजिस्ट्रेशन हटाने से कांग्रेस पार्टी को फायदा हुआ होगा. उनका दावा है कि पहले केरल में दोहरे, तिहरे और यहां तक कि चौगुने रजिस्ट्रेशन के मामले सामने आते थे. इन रजिस्ट्रेशन को हटाने से उन वोटर लिस्ट की सफाई हो गई, जो ऐतिहासिक रूप से विरोधी राजनीतिक पार्टियों की चुनावी चालों से जुड़ी रही हैं.

केरल में क्लीन‑अप का असर

खासकर केरल में, थरूर को लगता है कि कांग्रेस को इन रजिस्ट्रेशन को हटाने से फायदा हुआ, क्योंकि CPM लंबे समय से दोहरे, तिहरे और चौगुने रजिस्ट्रेशन करने में माहिर रही है. यानी एक ही व्यक्ति का नाम चार अलग-अलग बूथों में होना, ऐसा पहले होता था और इसलिए SIR ने इन नामों को हटा दिया. केरल और तमिलनाडु में इस फैसले के खिलाफ बहुत कम अपीलें की गईं. लेकिन बंगाल में, इसमें कोई शक नहीं कि 34 लाख अपीलें की गईं और ये 34 लाख फ़ॉर्म 34 लाख अलग-अलग लोगों ने भरे थे. उनमें से, सिर्फ़ कुछ सौ अपीलों पर ही सुनवाई हुई है. BJP ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल की. ​​पार्टी ने 207 सीटें जीतकर राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया. इन चुनावों में TMC को 80 सीटें मिलीं चुनाव नतीजों के बाद, BJP ने पश्चिम बंगाल में पहली बार अपनी सरकार बनाई है. इस सरकार में शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाल रहे हैं.

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