Synthetic Milk Story: सुबह की चाय हो, बच्चों का दूध या फिर मिठाई और दूसरी चीजें, दूध लगभग हर घर की रोजमर्रा की जरूरत है. इसलिए जब नकली दूध या दूध में मिलावट की खबर सामने आती है तो सवाल सिर्फ पैसे का नहीं, सेहत का भी बन जाता है. एनडीटीवी के एक इंटरव्यू के दौरान महाराष्ट्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंडे ने दूध में मिलावट से जुड़े अपने अनुभव का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि एक समय उन्हें केमिकल या सिंथेटिक दूध तैयार किए जाने की जानकारी मिली थी. मामले की जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसा फॉर्मूला सामने आया, जिसके जरिए गाय के दूध जैसी क्वालिटी वाला दूध करीब 15 रुपये प्रति लीटर की लागत में तैयार किया जा सकता था.
कैसे सामने आया नकली दूध का मामला?
तुकाराम मुंडे को पता चला था कि केमिकल या सिंथेटिक दूध तैयार किया जा रहा है. इसके बाद उन्होंने मामले की जांच शुरू कराई. करीब एक महीने तक जांच चलने के बाद पुलिस के साथ कार्रवाई की गई और कई जगहों पर इस तरह के दूध तैयार किए जाने का मामला सामने आया.
जांच के दौरान एक ऐसा नेटवर्क भी सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति स्किम मिल्क पाउडर उपलब्ध कराता था, जबकि दूसरा व्यक्ति उससे दूध तैयार करने का फॉर्मूला देता था. यह सामान चिलिंग सेंटर, मिल्क कलेक्शन सेंटर और दूसरी जगहों तक पहुंचने की बात भी सामने आई.
यहां देखें वीडियो-
15 रुपये लीटर में गाय के दूध जैसा नकली दूध-
जांच के दौरान मिले फॉर्मूले में शैंपू, इंडस्ट्रियल केमिकल और इमल्सीफायर जैसी चीजें भी मिली थीं. उन्होंने कहा कि इस फॉर्मूले के जरिए गाय के दूध जैसी क्वालिटी वाला नकली दूध करीब 15 रुपये प्रति लीटर की लागत में तैयार किया जा सकता था. भैंस के दूध जैसी क्वालिटी वाला दूध करीब 30 रुपये प्रति लीटर की लागत में तैयार होने की बात सामने आई थी. बाजार में असली दूध की कीमत इससे कहीं ज्यादा होने के कारण मिलावट करने वालों के लिए इसमें कमाई का बड़ा मौका था.
पैकेट में है तो सुरक्षित है, यह जरूरी नहीं
क्या ऐसा दूध डेयरी तक पहुंचकर पैक होकर भी बेचा जा सकता है, तो मुंडे ने कहा कि सिर्फ पैकेट में होने से किसी चीज को आंख बंद कर सही नहीं मान लेना चाहिए. लोग अक्सर ये सोचते हैं कि खुला सामान संदिग्ध हो सकता है, लेकिन पैकेट में मिलने वाली चीज जरूर सही होगी. लेकिन हकीकत ये है कि मिलावट के मामले में सिर्फ पैकेजिंग देखकर किसी प्रोडक्ट की क्वालिटी का अंदाजा लगाना हमेशा सही नहीं होता.
असली दूध में मिलाकर भी बढ़ाई जा सकती थी मात्रा.
तुकाराम मुंडे ने बताया कि, इस तरह तैयार नकली दूध का इस्तेमाल मात्रा बढ़ाने के लिए किया जा सकता है. यानी असली दूध में इसे मिलाकर ज्यादा दूध तैयार किया जा सकता है. उन्होंने लागत और बाजार कीमत के अंतर को ही इस तरह की मिलावट के पीछे की बड़ी वजह बताया.
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