मॉनसून आते ही, हमें इससे जुड़ी डाइट को लेकर कई ऐसी बातें या 'मिथ' सुनने को मिलते हैं जो सदियों से चले आ रहे हैं. मानसून में अक्सर खाने पीने की चीजों को लेकर टोका जाता है, जैसे- ये मत खाओ, वो मत खाओ, ये नुकसान पहुंचाएगा. अक्सर हमें यह भी नहीं पता होता कि ये बातें या नियम कहां से आए हैं, लेकिन हम इतने डरे हुए होते हैं कि उन्हें मान लेते हैं. लेकिन क्या कुछ ऐसी चीजों से परहेज करना सही है जो असल में सेहत के लिए अच्छी मानी जाती हैं, जैसे- दही.
पारंपरिक चिकित्सा में भी दही को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है. लेकिन एक पुरानी मान्यता है कि ठंडी तासीर होने के कारण मानसून के समय में दही नहीं खाना चाहिए. इस मौसम में इसे खाने से सर्दी-जुकाम होने का खतरा बढ़ सकता है. आइए जानते हैं कि इस मान्यता के बारे में एक्सपर्ट्स का क्या कहना है.
मानसून में दही खाएं या नहीं, क्या बोले एक्सपर्ट?
मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की चीफ डाइटीशियन, डेलनाज टी. चंदूवाडिया कहती हैं, "यह समझना जरूरी है कि ये नियम आयुर्वेद पर आधारित हैं और शरीर की तीन अलग-अलग प्रकृतियों - वात (मूवमेंट), पित्त (मेटाबॉलिज्म) और कफ (लुब्रिकेशन और स्ट्रक्चर की ऊर्जा) - के लिए बनाए गए हैं.
आयुर्वेद के अनुसार, दही नहीं खाना चाहिए. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन महीनों में वात बढ़ जाता है और पित्त जमा होने से सेहत से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. हालांकि, मेडिकल साइंस के नजरिए से देखें तो इस मौसम में, जब नमी और इन्फेक्शन सबसे ज्यादा होते हैं, पेट (gut) को हेल्दी रखना जरूरी है.
ऐसे में अपने गट फ्लोरा को बेहतर बनाकर आप अपनी इम्यूनिटी को भी बेहतर बना सकते हैं, इसलिए दही खाने की सलाह दी जाती है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि दही अपनी शेल्फ-लाइफ के अंदर हो और खराब न हुआ हो. मानसून में खाना दूसरे मौसमों की तुलना में जल्दी खराब होता है, इसलिए खाते समय सावधानी बरतना जरूरी है."

दही एक अच्छा प्रोबायोटिक
दही और गट फ्लोरा के बीच संबंध के बारे में बताते हुए, बैंगलोर के क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की सीनियर क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट अभिलाषा वी कहती हैं,
"मानसून के दौरान दही खाना सुरक्षित है. दही न खाने के बारे में पुरानी धारणा अब वैज्ञानिक नहीं रही क्योंकि गट इम्यूनिटी के फायदों पर अब काफी स्टडी हो चुकी है और लोग इनके बारे में जानते हैं. दही प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है और आपके गट को मजबूत करके और हेल्दी गट में फायदेमंद माइक्रोऑर्गेनिज्म जोड़कर बेहतर इम्यूनिटी बना सकता है. तो, बेझिझक किसी भी सब्जी का रायता या काली मिर्च और अदरक वाली छाछ पिएं और इस मानसून में हेल्दी रहें. प्रेगनेंसी में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के कारण पाचन धीमा हो जाता है, इसलिए दही जैसे प्रोबायोटिक्स लेने से गट का फंक्शन बेहतर हो सकता है और कब्ज और ब्लोटिंग से राहत मिल सकती है."
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