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This Article is From Jan 15, 2025

Sakat Chauth Vrat 2025: 16 या 17 जनवरी कब है सकट चौथ? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और रेसिपी

Sakat Chauth Vrat 2025: इस साल सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी को रखा जाएगा. इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा और व्रत का विधान है. आप विघ्नहर्ता को इस चीज का भोग लगा सकते हैं.

Sakat Chauth Vrat 2025: 16 या 17 जनवरी कब है सकट चौथ? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और रेसिपी
Sakat Chauth Vrat 2025: सकट चौथ पर विघ्नहर्ता को लगाएं इस चीज का भोग.

Sakat Chauth Vrat 2025:  हिंदू धर्म में सकट चौथ व्रत का बहुत महत्व है. यह व्रत हर वर्ष माघ मास की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है. साल 2025 में यह व्रत 17 जनवरी को रखा जाएगा.आपको बता दें कि इसे तिलकुट चौथ, (Tilkut Chauth 2025) तिलकुट चतुर्थी, संकटा चौथ आदि नामों से जाना जाता है. संतानों को सभी आपदाओं से बचाने के लिए यह व्रत किया जाता है. इस व्रत को सविधि संपन्न करने के लिए सभी मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार एक ही नियम हैं कि चंद्रमा का उदय और चतुर्थी दोनों का संयोग होना चाहिए. इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा और व्रत का विधान है. इस व्रत में चंद्रमा पूजन का भी महत्व होता है. व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद होता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के माध्यम से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. 

सकट चौथ स्पेशल रेसिपी- Sakat Chauth Special Recipe:

भगवान गणेश को जो चीज सबसे ज्यादा प्रिय है वो है मोदक और लड्डू. आप गणेश जी को बेसन के लड्डू का भोग लगा सकते हैं. इसे बनाना बहुत ही आसान है. पूरी रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.  

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सकट चौथ का महत्व- Sakat Chauth 2025 Importance:

पौराणिक कथा के अनुसार, माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा की थी. इसलिए इस व्रत को संतान के लिए फलदायी माना गया है. इस व्रत को करने से संतान को दीर्घायु की प्राप्ति होती है और संतान तनाव, रोग और नकारात्मकता से दूर रहते हैं.

सकट चौथ 2025 शुभ मुहूर्त- Sakat Chauth 2025 Puja Muhurat:

लाभ मुहूर्त: सुबह 8:34 से 9:53 तक
अमृत मुहूर्त: सुबह 9:53 से 11:12 तक

सकट चौथ पूजा विधि- Sakat Chauth 2025 Puja Vidhi:

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और इसके बाद साफ कपड़े पहन लें. व्रताधारी को इस दिन लाल या पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. पूजा के लिए अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें और साफ आसन बिछाकर बैठ जाएं. पूजा के लिए एक चौकी तैयार कर लें और पीले रंग का कपड़ा बिछाकर इसमें भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें. भगवान का हल्दी और कुमकुम से तिलक करें. फूल, माला, मौली, रोली, 21 दुर्वा, अक्षत, पंचामृत, फल और मोदक का भोग लगाएं. अब धूप-दीप जलाएं और गणेशजी की आरती करें. रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें और पूजा करें. 

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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आराधना सिंह
Senior Sub Editor
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