आज के समय में खाने में मिलावट (Food Adulteration) एक बड़ी चिंता बन चुकी है. दूध, घी, तेल, मसाले और दालों में मिलावट की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. ऐसे में कई लोग यह जानना चाहते हैं कि मिलावट से कैसे बचें, कौन से Safe Foods खरीदें और किन खाद्य पदार्थों में मिलावट की संभावना सबसे कम होती है. कुछ फूड्स ऐसे होते हैं जिनकी प्राकृतिक बनावट के कारण उनमें छेड़छाड़ करना अपेक्षाकृत मुश्किल माना जाता है.
हाल ही में वड़ा पाव में मिलावट और खराब क्वालिटी की शिकायतों पर कार्रवाई के बाद आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे चर्चा में रहे. उनके कदम ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें खरीदते समय जागरूक रहना और मिलावट से बचाव के उपाय अपनाना कितना जरूरी है.
लेकिन अच्छी बात ये है कि प्रकृति ने कुछ चीजों की बनावट ऐसी रखी है कि मिलावटखोर चाहकर भी उनमें कोई छेड़छाड़ या मिलावट नहीं कर पाते. अगर आप भी अपने परिवार की सेहत को लेकर फिक्रमंद रहते हैं, तो अपनी रोजमर्रा की डाइट में इन चीजों को बेझिझक शामिल कर सकते हैं.
बाजार में हर चीज में मिलावट का डर, लेकिन इन चीजों में मिलावट की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है
मोटे छिलके वाले फल और कुदरती कवच
प्रकृति ने कई फलों को ऐसा मजबूत छिलका दिया है जिसे पार करके कोई भी केमिकल या नकली चीज अंदर नहीं पहुंचाई जा सकती:
- नारियल पानी और ताजा नारियल: नारियल का बाहरी हिस्सा इतना सख्त होता है कि इसमें किसी भी तरह की मिलावट करना लगभग असंभव है. अंदर का पानी और मलाई पूरी तरह से नेचुरल और सुरक्षित रहते हैं.
- केला: केले का छिलका पूरी तरह सीलबंद होता है. भले ही कुछ व्यापारी इसे पकाने के लिए कार्बाइड का इस्तेमाल करते हों, लेकिन छिलके के अंदर के गूदे में कोई मिलावट नहीं की जा सकती. बस खाने से पहले इसे अच्छी तरह धो लें और छिलका उतारकर खाएं.
- संतरा, मौसमी और अनार: इन फलों के दाने और रस कुदरती थैलियों में बंद होते हैं. बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद जूस में तो चीनी और कलर मिला हो सकता है, लेकिन अगर आप ताजा फल खरीदकर घर में छीलते हैं तो वो आमतौर पर अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है.

साबुत अनाज और साबुत दालें
अक्सर पिसे हुए आटों या कटी हुई दालों में मिलावट की गुंजाइश ज्यादा रहती है, लेकिन साबुत दानों में फर्जीवाड़ा पकड़ना बहुत आसान होता है:
साबुत गेहूं, बाजरा और मक्का: जब आप बाजार से साबुत अनाज खरीदते हैं, तो आंखों से देखकर ही साफ-सफाई का पता चल जाता है. दाने के अंदर कोई केमिकल नहीं भरा जा सकता. आप इन्हें सीधे खरीदकर घर पर या चक्की पर पिसवा सकते हैं.
छिलके वाली साबुत दालें (जैसे मूंग साबुत, चना, उड़द): दाल की पॉलिश या रंग का डर तब होता है जब दाल कटी या धुली हो. साबुत दालों में मिलावट करना बहुत मुश्किल होता है क्युंकि उनके साइज और छिलके से तुरंत असली-नकली का पता चल जाता है.
अंडा: कुदरत की सबसे सेफ पैकिंग
प्रोटीन के सबसे सस्ते और बेहतरीन सोर्स में अंडे का नाम सबसे ऊपर आता है:
- अंडे का जो कैल्शियम वाला बाहरी खोल (शेल) होता है, वो एक नैचुरल शील्ड की तरह काम करता है.
- हालांकि सोशल मीडिया पर कभी-कभी प्लास्टिक के अंडों की झूठी अफवाहें उड़ती हैं, लेकिन असलियत यह है कि नकली अंडा बनाना असली अंडे से भी ज्यादा महंगा पड़ता है.
- इसलिए साधारण पोल्ट्री या देसी अंडा बाजार से लेते वक्त मिलावट की आशंका अपेक्षाकृत कम होती है.
ताजे भुट्टे और कच्ची मूंगफली
सर्दियों और बारिश के मौसम में मिलने वाले भुट्टे और मूंगफली भी इस लिस्ट में आते हैं:
छिलके वाला भुट्टा (Corn): जब तक भुट्टे के ऊपर उसकी हरी पत्तियां लिपटी रहती हैं, तब तक दाने पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.
साबुत मूंगफली: जो मूंगफली अपने खोल के अंदर बंद होती है, उसमें कोई भी रंग या तेल नहीं मिलाया जा सकता. उसे फोड़कर खाना सेहत के लिए पूरी तरह मुफीद है.
साबुत खड़े मसाले: पिसे मसालों से लाख गुना बेहतर
अगर आपको मसालों में मिलावट का सबसे ज्यादा डर लगता है, तो पिसे हुए पैकेट छोड़कर साबुत मसाले इस्तेमाल करना शुरू करें:
साबुत काली मिर्च, लौंग और हरी इलायची: इनकी बनावट, खुशबू और रंग से साफ पता चल जाता है कि ये असली हैं या नहीं.
साबुत सूखी लाल मिर्च और साबुत धनिया: जब आप इन्हें अपनी आंखों के सामने देखकर खरीदते हैं और घर में मिक्सी में पीसते हैं, तो मिलावट की गुंजाइश शून्य हो जाती है.
किन चीजों को खरीदते वक्त बरतें थोड़ी होशियारी
भले ही ऊपर बताई गई चीजें काफी हद तक सेफ हैं, लेकिन बाजार में खरीदारी करते वक्त एक जागरूक ग्राहक बनना बहुत जरूरी है:
1. पैकेज्ड की जगह साबुत चीजें चुनें: आटा, बेसन या पिसे मसाले बाहर से तैयार लेने के बजाय साबुत दाने लेकर खुद पिसवाने की कोशिश करें.
2. बहुत ज्यादा चमक-दमक से बचें: अगर कोई सेब बहुत ज्यादा चमक रहा है या हरी सब्जियां असामान्य रूप से चमकदार हरी दिख रही हैं, तो समझ जाएं कि उस पर मोम या केमिकल का स्प्रे हो सकता है.
3. लोकल और सीजनल फल-सब्जियां खाएं: बेमौसम मिलने वाली चीजों को केमिकल से पकाया या स्टोर किया जाता है, जबकि सीजनल चीजों में इसकी जरूरत कम पड़ती है.
घर के खान-पान में थोड़े से समझदारी भरे बदलाव करके आप मिलावटखोरों के जाल से आसानी से बच सकते हैं. जब भी संभव हो, ऐसी चीजें चुनें जो अपनी कुदरती पैकिंग में आती हैं ताकि आपके परिवार को मिले सिर्फ शुद्ध और असली पोषण.
ध्यान रखें
यह लिस्ट उन खाद्य पदार्थों की है जिनमें उनकी प्राकृतिक बनावट के कारण मिलावट की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है. फिर भी खरीदारी हमेशा भरोसेमंद विक्रेताओं से करें और गुणवत्ता को जांचने के बाद ही खाद्य पदार्थों का सेवन करें.
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FAQ: खाने में मिलावट से कैसे बचें?
किन खाद्य पदार्थों में मिलावट की संभावना सबसे कम होती है?
जिन खाद्य पदार्थों पर प्राकृतिक छिलका या खोल होता है, उनमें मिलावट की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है. उदाहरण के लिए नारियल, केला, संतरा, मौसमी, अनार, अंडे, भुट्टे और छिलके वाली मूंगफली.
क्या साबुत दालें और साबुत अनाज पिसी हुई चीजों से ज्यादा सुरक्षित होते हैं?
हां, साबुत अनाज और साबुत दालों में मिलावट की पहचान करना अपेक्षाकृत आसान होता है. पिसे हुए आटे, बेसन और मसालों में मिलावट की गुंजाइश अधिक हो सकती है, इसलिए कई लोग साबुत चीजें खरीदकर घर पर पिसवाना पसंद करते हैं.
मिलावट से बचने के लिए खरीदारी करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
खरीदारी करते समय साबुत खाद्य पदार्थ चुनें, बहुत ज्यादा चमकदार फल-सब्जियों से सावधान रहें और जहां संभव हो, स्थानीय व मौसमी उत्पादों को प्राथमिकता दें. इससे मिलावट और अत्यधिक प्रोसेसिंग का जोखिम कम हो सकता है.
क्या पैक्ड मसालों की जगह साबुत मसाले खरीदना बेहतर है?
साबुत काली मिर्च, लौंग, इलायची, धनिया और सूखी लाल मिर्च जैसे मसालों की गुणवत्ता को आंखों से जांचना आसान होता है. इन्हें घर पर पीसने से शुद्धता पर अधिक नियंत्रण रखा जा सकता है.
क्या अंडे में मिलावट हो सकती है?
अंडे का बाहरी खोल एक प्राकृतिक सुरक्षा परत की तरह काम करता है. हालांकि किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह ताजगी और गुणवत्ता की जांच जरूरी है, लेकिन सामान्य तौर पर अंडा अपेक्षाकृत सुरक्षित खाद्य विकल्प माना जाता है.
खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान कैसे करें?
रंग, गंध, स्वाद और बनावट में असामान्य बदलाव मिलावट का संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा FSSAI द्वारा बताए गए घरेलू फूड एडाल्टरेशन टेस्ट भी मददगार हो सकते हैं.
क्या सीजनल फल और सब्जियां ज्यादा सुरक्षित होती हैं?
मौसमी फल और सब्जियां आमतौर पर कम स्टोरेज और कम प्रोसेसिंग के बाद बाजार तक पहुंचती हैं. इसलिए इन्हें कई बार बेहतर विकल्प माना जाता है.
परिवार को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने का सबसे आसान तरीका क्या है?
साबुत अनाज, साबुत दालें, छिलके वाले फल, साबुत मसाले और भरोसेमंद विक्रेताओं से खरीदे गए ताजे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना एक अच्छा कदम हो सकता है. साथ ही पैक्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें.
मिलावट से बचने के लिए कौन-कौन से 7 फूड्स खरीद सकते हैं?
नारियल, केला, संतरा, मौसमी, अनार, साबुत अनाज, साबुत दालें, अंडे, भुट्टे, मूंगफली और साबुत मसाले ऐसे विकल्प हैं जिनमें मिलावट की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है.
क्या घर पर फूड एडाल्टरेशन चेक किया जा सकता है?
हां, कुछ खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान के लिए घरेलू परीक्षण और FSSAI द्वारा सुझाए गए सरल तरीके अपनाए जा सकते हैं. हालांकि सटीक जांच के लिए लैब टेस्ट सबसे विश्वसनीय तरीका होता है.
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