गर्मियों की छुट्टियों में जब भी गांव जाना हुआ हो, तो आपने पेड़ों पर छोटे-छोटे हरे फलों के गुच्छे जरूर देखे होंगे. वहीं, कुछ जगहों में पार्क में भी आपको गुच्छेदार फल दिखे होंगे, जिसे फोड़ने पर उसके अंदर से गोंद जैसा निकलता है. आज भले ही ये फल आपको अंजान लगे, लेकिन पहले के समय में कई घरों में इस खास तरह के फल का अचार बनता था, तो वहीं कहीं इसकी सब्जी थी. हमारी दादी-नानी इसे बहुत ही चाव से खाती थीं और कहती थीं कि इसे खाने से शरीर की ताकत बढ़ती है. लेकिन अब शायद ही लोगों की थाली तक ये फल पहुंच पाए, क्योंकि धीरे-धीरे ये गायब होता जा रहा है.
हम बात कर रहे हैं लसोड़ा की. एक ऐसा देसी फल जो पूरे साल में सिर्फ 60 दिन ही दिखाई देता है. वहीं, ये सिर्फ कुछ सप्ताह के लिए बाजार में नजर आता है. कई जगह इसे निसोरी, गोंद बेरी या इंडियन चेरी के नाम से भी जाना जाता है. ये मुख्य रूप से गर्म इलाकों में होता है, जो मई से जुलाई के सीजन में मिलता है. यहां हम जानेंगे आखिर क्या है लसोड़ा?
क्या है लसोड़ा?
जब आप पहली बार इस फल को देखेंगे, तो आपको छोटे-छोटे बेर लग सकता है ये फल कच्चा होने पर गहरा हरा दिखता है. वहीं, जब ये पक जाता है, तो हल्का सा पीला दिखाई देने लगता है. इसकी सबसे अलग पहचान इसका चिपचिपा गूदा है. यही वजह है कि इसका अचार काफी मशहूर है.
इसे मुख्य रूप से हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे इलाकों में खाया जाता है. इससे बनने वाले अचार लगभग पूरे साल खाते हैं. ऐसा माना जाता है कि पहले के समय के लोग इसे स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत को अच्छा बनाने के लिए खाते थे.
पोषक तत्वों से भरपूर है लसोड़ा
कुछ रिपोर्ट्स बताते हैं कि लसोड़ा में कई जरूरी पोषक तत्व होता है, जिसमें मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर होता है. इसके साथ ही ये कैल्शियम, आयरन, जिंक, फॉस्फोकस जैसे पोषक तत्व भी होते हैं. इसी वजह से ग्रामीण इलाकों में इसे ताकत बढ़ाने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता रहा है.
लसोड़ा खाने के क्या फायदे हैं?
- लसोड़ा को एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकता है.
- गर्मियों में लसोड़ा का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है.
- इसमें फाइबर की मौजूदगी होती है, जो पाचन को बेहतर बनाए रखने में प्रभावी हो सकता है.
अचार में सबसे ज्यादा पसंद
लसोड़ा का नाम आते ही ज्यादातर लोगों को उसका अचार याद आता है. इसकी चिपचिपी बनावट और अनोखा स्वाद इसे दूसरे अचारों से अलग बनाता है. कई परिवार आज भी सीजन आते ही इसका अचार तैयार कर लेते हैं, ताकि पूरे साल इसका स्वाद लिया जा सके.
धीरे-धीरे क्यों गायब हो रहा है यह फल?
आज बाजार विदेशी फलों से भरा पड़ा है. कीवी, ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे फलों के बीच लसोड़ा जैसे पारंपरिक फल हमारे देश में पीछे छूटते जा रहे हैं. नई पीढ़ी के कई लोग तो इसका नाम भी पहली बार सुनते हैं. जबकि एक समय ऐसा था, जब गांवों में यह फल गर्मियों की पहचान हुआ करता था.
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