Khooni Paneer: Is This Dish Safe to Eat?: भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई पारंपरिक व्यंजन ऐसे हैं जिनके बारे में सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही एक व्यंजन है जिसे कुछ जगहों पर खूनी पनीर कहा जाता है. यह असल में बकरे के खून को जमा कर बनाया जाता है और कुछ क्षेत्रों में इसे खास डिश माना जाता है. लेकिन, क्या यह सच में सेहत के लिए अच्छा है या इसके साथ जुड़े रिस्क को समझना जरूरी है? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं.
क्या होता है खूनी पनीर? (What Is Blood Paneer)
खूनी पनीर असली पनीर नहीं होता. इसे बकरे के ताजा खून को जमा (क्लॉट) करके बनाया जाता है. जब खून जम जाता है तो उसका टेक्सचर सख्त हो जाता है, जिसे टुकड़ों में काटकर उबाला और फिर मसालों के साथ पकाया जाता है. दिखने में यह पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह जानवर के खून से बना होता है.
खूनी पनीर को खाने से पहले जान लें इसके नुकसान
खून शरीर में पोषक तत्वों के साथ-साथ अपशिष्ट पदार्थ (Waste Products) भी ले जाता है. जानवर के शरीर में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी (Parasites) खून के माध्यम से फैल सकते हैं. अगर खून को सही तरीके से संभाला, स्टोर या पकाया न जाए, तो संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ सकता है.
इसके अलावा, खुले में खून जमा करने से उसमें कीटाणु तेजी से पनप सकते हैं. इसलिए यह कहना कि यह पूरी तरह से सुरक्षित है, सही नहीं होगा.

क्या खून आयरन से भरपूर होता है? (Is Blood Rich in Iron)
जवाब है हां, जानवर का खून आयरन से भरपूर होता है, जो शरीर के लिए जरूरी मिनरल है. लेकिन सिर्फ आयरन के लिए ऐसा भोजन खाना जरूरी नहीं है. आयरन हमें दाल, हरी सब्जियों, चुकंदर और मांस से भी मिल सकता है.
पकाने से क्या खतरा खत्म हो जाता है? (Does Cooking Make It Safe)
अच्छी तरह उबालने और पकाने से कुछ बैक्टीरिया मर सकते हैं, लेकिन हर तरह के रोगाणु पूरी तरह खत्म हो जाएं, यह जरूरी नहीं. खासकर अगर कच्चे खून को लंबे समय तक रखा गया हो, तो रिस्क बना रह सकता है.
क्या करें? (What Should You Do)
अगर कोई व्यक्ति ऐसी पारंपरिक डिश खाता है, तो यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि उसे साफ-सफाई और सही तापमान पर पकाया गया हो. कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग, बच्चे और बुजुर्ग ऐसे भोजन से बचें तो बेहतर है.
खूनी पनीर झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली एक खास डिश है, लेकिन इसके साथ हेल्थ रिस्क भी जुड़े हैं. सिर्फ पोषण के नाम पर इसे सुरक्षित मान लेना सही नहीं है. समझदारी यही है कि साफ-सफाई और सेहत को प्राथमिकता दी जाए.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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