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पहले खाली पेट नीम के पत्ते ख‍िलाते थे, फ‍िर घी प‍िलाते थे, हम 90s के बच्‍चों के साथ क्‍या-क्‍या नहीं हुआ

हम सभी सैर सपाटे और ब्रेक के नाम पर छुट्टियों में अपनी नानी के घर जाया करते थे. उसी दौर में नानी भी हमारे साथ जाने क्‍या क्‍या एक्‍सपेर‍िमेंट करती थीं. और मां, वो तो दूर खड़ी हमारे हालात पर हंसती थी बस. कुछ ऐसा ही याद हो आया अभी... 

पहले खाली पेट नीम के पत्ते ख‍िलाते थे, फ‍िर घी प‍िलाते थे, हम 90s के बच्‍चों के साथ क्‍या-क्‍या नहीं हुआ
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अक्‍सर रह-रह कर हम सभी को बीता समय याद आता है. खासकर तब जब हम किसी बदलाव से गुजर रहे हों. वह भले ही मौसम का हो, जीवन का हो या उम्र का हो. एक उम्र के बाद बचपन और युवाअवस्‍था का समय खूब याद आता है. ऐसा अक्‍सर मेरे साथ भी होता है. आज जब कैब से दफ्तर जा रही थी तो ड्राइवर ने रेस्‍ट लेने के लिए एक जगह कैब को रोक द‍िया. आप सभी को पता है द‍िल्‍ली में मौसम करवट ले रहा है, तो मैंने भी मौसम को हेलो बोलने के लिए कार के शीशे नीचे कर द‍िए. 

हुआ यूं कि कुछ ही देर में एक पत्ता हवा की सैर करते हुए मेरी गोद में लैंड कर गया. मैंने जब उसे उठाया तो देखा कि ये नीम था. कार के छोटे झरोखे से मैंने पूरा स‍िर बाहर न‍िकाल कर ऊपर की तरफ देखा तो एक बूढा नीम मौसम की मद में झूमता द‍िखा. नीम की शाखाओं पर कच्‍चे हरे और नए पत्ते भी अनुभव की सैर पर ज‍िज्ञासा से हल्‍की हलचल कर रहे थे. 

ज‍ितना बूढा वो नीम था, उतनी ही बूढ़ी शायद मेरी नानी थी और मैं उन कच्‍चे कौपलों जैसी. मुझे सब एक एक कर याद आया. जैसे एक फ‍िल्‍म सी चल गई. ब्‍लैक एंड वाइट फ‍िल्‍म, क्‍योंकि बात 90s की है... 

हम सभी सैर सपाटे और ब्रेक के नाम पर छुट्टियों में अपनी नानी के घर जाया करते थे. उसी दौर में नानी भी हमारे साथ जाने क्‍या क्‍या एक्‍सपेर‍िमेंट करती थीं. और मां, वो तो दूर खड़ी हमारे हालात पर हंसती थी बस. कुछ ऐसा ही याद हो आया अभी... 

अगर आप 90 के दशक में पले-बढ़े हैं, तो आपको अपने बचपन का वो दिन जरूर याद होगा जब घर के आंगन या सड़क किनारे लगे नीम के पेड़ से ताजी कोपलें तोड़कर मुंह में डालनी पड़ती थीं. कड़वाहट ऐसी कि पूरा चेहरा बन जाए, लेकिन बड़ों का सख्त पहरा रहता था कि इसे निगलना ही पड़ेगा. तब लगता था कि घरवाले जबरदस्ती सजा दे रहे हैं. लेकिन असल में वो कोई सजा नहीं, बल्कि सेहत का पुराना देशी सुरक्षा कवच था.

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उस दौर में न तो महंगे फेस वॉश हुआ करते थे और न ही स्किन केयर क्लीनिक. चेहरे पर एक भी दाना निकला नहीं कि दादी-नानी नीम के पत्तों का पेस्ट बनाकर उसका रस जबरदस्ती हलक के नीचे उतार देती थीं.

अकसर ये पत्ते सुबह के वक्त खाली पेट खिलाए जाते थे और फिर शाम को थाली में घी में तैरती हुई रोटी परोसी जाती थी. बचपन में समझ नहीं आता था कि सुबह इतनी कड़वी चीज और शाम को इतना सारा देसी घी क्यों. लेकिन इसका सीधा संबंध हमारे शरीर के संतुलन से था.

नीम और घी का पुराना गणित, एक्सपर्ट की नजर से

इस पुरानी परंपरा के पीछे का वैज्ञानिक और पारंपरिक तर्क समझने के लिए हमने डॉ. सैयद अहमद खान से तफसील से बात की. डॉ. खान बताते हैं कि नीम तासीर में बहुत ज्यादा सूखा और ठंडा होता है. जब आप लगातार नीम का सेवन करते हैं तो यह खून को तेजी से साफ करता है, लेकिन साथ ही शरीर के अंदरूनी अंगों में खुश्की यानी ड्रायनेस पैदा कर सकता है.

यही वजह थी कि हमारी पुरानी पीढी बहुत समझदार थी. वे सुबह नीम के पत्ते या उसका रस देकर पेट के कीड़े मारते थे और खून साफ करते थे. वहीं शाम को खाने में भरपूर देसी घी इसलिए दिया जाता था ताकि आंतों में खुश्की न आए और शरीर का रूखापन बैलेंस हो जाए. यह देसी नुस्खा पेट और त्वचा दोनों को सालों-साल फिट रखता था.

नीम के पत्ते चबाने के फायदे

अगर आप रोज सुबह नीम की 3-4 कोमल पत्तियां चबाते हैं, तो शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं:

  1. खून की सफाई: नीम को सबसे बेहतरीन नेचुरल ब्लड प्यूरीफायर माना गया है. यह शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, जिससे फोड़े-फुंसी और मुंहासे जड़ से खत्म होने लगते हैं.
  2. पेट के कीड़ों का खात्मा: बच्चों या बड़ों के पेट में जब कीड़े हो जाते हैं, तो नीम का कड़वा रस उन्हें खत्म करने में रामबाण की तरह असर करता है.
  3. शुगर कंट्रोल करने में मदद: डायबिटीज के मरीजों के लिए खाली पेट नीम चबाना बहुत मुफीद साबित होता है. यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने का काम करता है.
  4. मुंह की बदबू और मसूड़ों की सड़न: नीम में जबरदस्त एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसे चबाने से मुंह के बैक्टीरिया मरते हैं, पायरिया की परेशानी घटती है और दांत मजबूत रहते हैं.
  5. रोग प्रतिरोधक क्षमता: मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-जुकाम और वायरल इंफेक्शन से लड़ने में नीम शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है.

नीम के पत्ते चबाने के नुकसान

हर अच्छी चीज की एक सीमा होती है. अगर नीम का जरूरत से ज्यादा या गलत तरीके से सेवन किया जाए तो इसके नुकसान भी झेलने पड़ सकते हैं:

पेट में तेज जलन: बहुत ज्यादा नीम खाने से पेट की अंदरूनी परत इरिटेट हो सकती है, जिससे एसिडिटी या मरोड़ की दिक्कत बढ़ जाती है.
आंतों में रूखापन: लंबे वक्त तक बिना घी या चिकनाई के नीम खाने से शरीर में अंदरूनी खुश्की बढ़ जाती है, जिससे कब्ज हो सकती है.
लो ब्लड शुगर का खतरा: जो लोग पहले से शुगर की दवा ले रहे हैं, उनका शुगर लेवल अचानक बहुत नीचे गिर सकता है.
पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर: कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि बहुत लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में नीम खाने से स्पर्म काउंट पर उल्टा असर पड़ सकता है.

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नीम के पत्ते किसे नहीं चबाने चाहिए

डॉ. सैयद अहमद खान के मुताबिक कुछ लोगों को नीम के पत्तों से बिल्कुल परहेज करना चाहिए:

  • प्रेग्नेंट औरतों को नीम से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा पैदा हो सकता है.
  • 5 साल से कम उम्र के बच्चों को सीधे नीम की पत्तियां या उसका तेल कभी नहीं देना चाहिए.
  • जिनका ब्लड प्रेशर या शुगर हमेशा कम रहता है, उनके लिए नीम नुकसानदेह हो सकता है.
  • कोई बड़ा ऑपरेशन होने वाला है, तो कम से कम दो हफ्ते पहले नीम का सेवन बंद कर देना चाहिए.

नानी के नुस्खे वाली चटपटी कड़वी चटनी

खाली पेट सीधे कड़वे पत्ते चबाना हर किसी के बस की बात नहीं होती. 90s में कई घरों में नानी-दादी इसकी चटपटी चटनी तैयार किया करती थीं.

नीम से तैयार चीजें स्वाद के दीवानों में कुछ खास लोकप्रिय नहीं है, ज्यादातर इसके कड़वी स्वाद के चलते इसे नापसंद किया जाता है. लेकिन सेहत के मस्तानों में नीम पसंद किया जाता है, क्योंकि यह सेहत से जुड़े कई लाभ देता है. तो अगर अपने परिवार में आप नीम को खाने में शामिल करना चाहते हैं तो नीम चटनी इसका एक अच्छा और अलग विकल्प हो सकती है. यहां जानें आसान नीम की चटनी कैसे बनाएं.

कुल समय: 05 मिनट
तैयारी का समय: 05 मिनट
कितने लोगों के लिए: 4

नीम चटनी की सामग्री:

10 नीम के पत्ते
2 टी स्पून गुड़
3-4 कोकम
1/2 टी स्पून जीरा
नमक स्वादानुसार

नीम चटनी बनाने की विधि:

  1. नीम के पत्तों को पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि धूल-मिट्टी साफ हो जाए.
  2. मिक्सचर में नीम के पत्ते, गुड़, कोकम, जीरा और थोड़ा सा नमक डालें.
  3. इसे अच्छी तरह पीस लें. स्वाद में खट्टी-मीठी और हल्की कड़वी नीम की चटनी तैयार है. इसे भोजन के साथ थोड़ी मात्रा में लिया जा सकता है.

कुछ काम की बातें

एक दिन में नीम के कितने पत्ते चबाने चाहिए: रोजाना सुबह केवल 3 से 5 ताजी और कोमल पत्तियां ही चबानी चाहिए. बहुत ज्यादा पत्ते एक साथ खाने से बचना चाहिए.

क्या नीम के पत्ते रोजाना 12 महीने खाए जा सकते हैं: नहीं. इसे लगातार नहीं खाना चाहिए. 15 से 20 दिन खाने के बाद कुछ हफ्तों का गैप देना जरूरी होता है, ताकि शरीर में खुश्की न बढ़े.

क्या नीम खाने से सचमुच चेहरे की झाइयां और पिंपल्स दूर होते हैं:  हां, क्योंकि यह खून को साफ करता है. जब शरीर के अंदर से विषैले तत्व निकलते हैं तो त्वचा अपने आप साफ और चमकदार दिखने लगती है.

एक्सपर्ट के बारे में: डॉ. सैयद अहमद खान यूनानी चिकित्सा के वरिष्ठ विशेषज्ञ हैं. वे नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के यूनानी मेडिकल सेंटर में पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एवं हेड रह चुके हैं. वर्तमान में वे दरीयागंज स्थित सदर यूनानी क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं और श्वसन रोगों, पाचन संबंधी समस्याओं तथा लाइफस्टाइल डिजीज के यूनानी उपचार में विशेष अनुभव रखते हैं.

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