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दशहरा के दिन क्यों खाई जाती है जलेबी? जानिए इस परंपरा के पीछे की कहानी और क्विक रेसिपी

दशहरा और जलेबी का अनोखा कनेक्शन, जानिए इस पुरानी रवायत का असली सच.

दशहरा के दिन क्यों खाई जाती है जलेबी? जानिए इस परंपरा के पीछे की कहानी और क्विक रेसिपी
क्यों जलेबी के बिना अधूरी है दशहरा?
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गरमा गरम जलेबी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आज जाता है. लेकिन क्या आप .ये जानते हैं कि आखिर दशहरा के दिन जलेबी क्यों खाई जाती हैं. जी हां आप भारत के किसी भी शहर में चले जाइए, चाहे यूपी, बिहार, दिल्ली-पंजाब में दशहरा के दिन हलवाइयों की दुकानों के बाहर जलेबी के लिए लंबी-लंबी लाइनें दिखेंगी. तो चलिए जानते हैं दशहरा के दिन जलेबी खाने की परंपरा और इसके पीछे के कहानी.

​भगवान राम की पसंदीदा मिठाई-

​पौराणिक मान्यताओं और पुरानी लोककथाओं के अनुसार, भगवान श्री राम को शशकुली नाम की एक मिठाई बहुत पसंद थी. शशकुली असल में आज की जलेबी का ही पुराना और पारंपरिक रूप मानी जाती है. कहा जाता है कि जब भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी, तो उस जीत की खुशी में पूरे नगरवासियों ने उनका मुंह मीठा कराया था. इसी वजह से विजयादशमी के शुभ मौके पर जलेबी बनाकर खुशी मनाने और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराने की परंपरा है.

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बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी-

​दशहरा सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है. रावण दहन के बाद लोग अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के साथ मिलकर त्यौहार का जश्न मनाते हैं. गरमा-गरम जलेबी खाना इसी खुशी को जताने का एक बेहद पुराना तरीका भी माना जाता है.

​बदलता मौसम और सेहत- 

​दशहरा का त्यौहार ऐसे समय पर आता है जब हल्की-हल्की ठंड की शुरुआत हो रही होती है. पुराने समय से ही भारत में मौसम बदलने पर ऐसी चीजें खाने का रिवाज रहा है जो शरीर को ताकत दें और एनर्जी बनाए रखें. चाशनी में डूबी हुई गरमा-गरम जलेबी शरीर को एनर्जी देने का काम करती है. आयुर्वेद और पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इस मौसम में सुबह या शाम के समय गर्म जलेबी खाने से सिरदर्द और माइग्रेन जैसी परेशानियों में भी आराम मिल सकता है.

कैसे बनाएं स्वादिष्ट जलेबी-

  • ​एक कप मैदा छान लें. इसमें एक चम्मच देसी घी और एक शैशे इनो मिला लें.
  • थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर गाढ़ा बैटर बना लें. बैटर ऐसा होना चाहिए जो चम्मच से उठाने पर एक धार में धीरे-धीरे गिरे.
  • चाशनी के लिए एक कप चीनी में पौना कप (3/4 कप) पानी मिलाकर उबालें.
  • इसमें एक तार की चाशनी नहीं चाहिए, बस हल्की चिपचिपी चाशनी बनानी है. 
  • थोड़ा सा केसर, इलायची और चुटकी भर जलेबी का रंग डाल दें.
  • जलेबी के बैटर में रंग न मिलाएं, ताकि आपको पता चल सके कि जलेबी कुरकुरी हुई है या नहीं. 
  • बैटर को किसी कोन या सॉस की बोतल में भर लें. चौड़े तले की कढ़ाई या पैन में तेल/घी गरम करें. 
  • आंच को मीडियम रखें. जलेबी को गोल-गोल घुमाकर तलें और तुरंत गुनगुनी चाशनी में डुबो दें. 
  • दूसरी बार की जलेबी तलने तक पहली वाली को चाशनी में रहने दें.

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