कई घरों में दूध को दिन में कई बार गर्म किया जाता है. कई बार बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारने के लिए ऐसा किया जाता है. लेकिन आयुर्वेद में, दोबारा गर्म किए गए दूध को 'प्राण' (जीवन शक्ति) से रहित माना जाता है, यही वह शक्ति है जो इसे पौष्टिक और आसानी से पचने लायक बनाती है. साइंस भी ये मानता है कि दूध को बार-बार गर्म करने से इसके पोषक तत्व कम हो सकते हैं. हाल के सालों में हुए रिसर्च से पता चला है कि दूध को गर्म करने से उसके पोषक तत्व कम हो सकते हैं, लेकिन दूध में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों पर इसके असर से पता चलता है कि यह हाइपोएलर्जेनिक (कम एलर्जी वाला) दूध बनाने का एक संभावित तरीका हो सकता है. आइए जानते हैं कि दूध को गर्म करने से इसके पोषक तत्वों पर क्या असर पड़ता है.
दूध को बार-बार गर्म करने से क्या होता है? (What happens when milk is reheated repeatedly?)
1. कैल्शियम की मात्रा में कमी-
हाल की स्टडीज से पता चला है कि दूध को गर्म करने से उसमें कैल्शियम की मात्रा कम हो सकती है. 2016 की एक स्टडी में पाया गया कि बिना प्रोसेस किए गए दूध को उबालने पर उसमें कैल्शियम की मात्रा 10-14% कम हो गई. इसमें यह भी पाया गया कि पाश्चराइज्ड दूध को उबालने पर उसमें कैल्शियम की मात्रा 6-7% कम हो गई. आगे की जांच से पता चला कि कैल्शियम की मात्रा में कमी का संबंध इस बात से था कि सैंपल में आयनिक और घुलनशील कैल्शियम का स्तर कैसे बदलता है.

क्या दूध को बार-बार उबालना सही है.(Image NDTV)
2. विटामिन और मिनरल की मात्रा में कमी-
B विटामिन, जैसे B6, B12, फोलिक एसिड, नियासिन, राइबोफ्लेविन और थायमिन, अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी हैं. वे दिमाग के काम करने, एनर्जी के स्तर और सेल मेटाबॉलिज्म में योगदान करते हैं. स्टडीज से पता चला है कि विटामिन B संक्रमण को भी रोक सकता है और सेल की सेहत को बेहतर बना सकता है. दूध में B विटामिन काफी मात्रा में होते हैं, लेकिन रोशनी और गर्मी से इन विटामिन पर बुरा असर पड़ता है. रिसर्च से पता चला है कि दूध उबालने से उसमें B विटामिन की मात्रा कम हो सकती है. एक स्टडी में पाया गया कि दूध उबालने से उसमें B विटामिन की मात्रा लगभग 25% कम हो जाती है. एक और स्टडी में पाया गया कि दूध उबालने से उसमें फोलिक एसिड का लेवल 36% कम हो गया.
3. हाइपोएलर्जेनिक मिल्क-
हाल की स्टडीज से पता चला है कि दूध को गर्म करने से उसकी इम्यूनोलॉजिकल सेंसिटाइजिग क्षमता कम हो सकती है, क्योंकि गर्मी से दूध में मौजूद व्हे (whey) प्रोटीन का स्ट्रक्चर बदल जाता है (डीनेचर हो जाता है). इसका मतलब है कि जिन लोगों को दूध से एलर्जी होती है, उनमें इससे एलर्जी होने की संभावना कम हो जाती है.
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