Milk Benefits: दूध को हम सब एक कंप्लीट फूड की तरह जानते हैं. बचपन से सुना है कि दूध सेहत के लिए फायदेमंद है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूध अगर गलत तरीके से लिया जाए, गलत समय पर या गलत चीजों के साथ लिया जाए तो यह आपके लिए हानिकारक भी हो सकता है. आयुर्वेद कहता है कि दूध हैवी होता है और हर किसी का डाइजेशन उसे एक जैसे प्रोसेस नहीं करता. गलत कॉम्बिनेशन से एक्ने, गैस, एलर्जी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती है और लोग इसे समझे बिना हर रोज यह गलतियां करते हैं. डॉक्टर हंसाजी ने बताया उन 10 आम गलतियों के बारे में जो लोग दूध पीते वक्त अक्सर करते हैं और अंत में मिलेगा एक सीक्रेट आयुर्वेदिक टिप जो दूध को और भी ज्यादा पोषक और डाइजेस्टेबल बना देता है.
दूध पीते वक्त होने वाली गलतियां
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पहली गलती
खाने के तुरंत बाद दूध पीना. दूध भारी होता है और आप खाने के तुरंत बाद जैसे दाल, चावल, सब्जी, रोटी के बाद तुरंत दूध लेते हैं तो आपके डाइजेस्टिव सिस्टम पर जरूरत से ज्यादा लोड पड़ता है. इसीलिए दूध अलग से पीना चाहिए. हो सके तो रात को खाने के दो घंटे बाद एक कप गर्म दूध नर्व्स को शांत करेगा और शरीर को पोषित करेगा.
दूसरी गलती
मिल्क प्रोडक्ट्स और आयरन रिच लीफी ग्रीस का कॉम्बिनेशन. दूध, पनीर या क्रीम को पालक, मेथी जैसे आयरन वाली सब्जियों के साथ मिलाना शरीर के कैल्शियम अब्सॉर्प्शन को कम कर देता है. यह कॉम्बिनेशन अवॉइड करें ताकि आप दोनों सोर्स का पूरा उपयोग कर सकें.
तीसरी गलती
स्पाइसी खाने के बाद आइसक्रीम या कुल्फी खाना. मसालेदार खाना आपके डाइजेस्टिव फायर को एक्टिवेट करता है. फिर ठंडी आइसक्रीम लेने से डाइजेशन को झटका लगता है. जिससे गैस, इनडाइजेशन और वजन बढ़ सकता है. स्पाइसी खाने के बाद ठंडी डेरी चीजों को अवॉइड करें.
चौथी गलती
दूध को बार-बार बॉईल करना या गलत स्टोर करना. बार-बार रिहीट करने से दूध का प्राण कम हो जाता है. एसिडिटी बढ़ जाती है और डाइजेशन कठिन हो जाता है. एक बार बॉईल करें और टाइट लिड वाले कंटेनर में स्टोर करें. फ्रिज में भी ढक कर रखें.
पांचवी गलती
फ्रिज का ठंडा दूध डायरेक्टली पीना. ठंडे ड्रिंक्स डाइजेशन को डिस्टर्ब करते हैं. और यह म्यूकस, साइनस, ब्लोटिंग भी ला सकते हैं. ठंडा दूध नहीं, गर्म या ल्यूक वार्म दूध लें. रात के लिए गर्म केसर दूध या जायफल दूध ट्राई करें.
छठी गलती
दूध में गुड़ या शहद मिक्स करना. आयुर्वेद के अनुसार गर्म दूध में शहद मिलाना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि हनी गर्म होने पर टॉक्सिक बन जाता है. अगर आपका डाइजेशन ही कमजोर है तो दूध के साथ गुड़ को लेना पेट के लिए भारी हो सकता है. गर्म दूध में शहद या जैगरी पहले वह ठंडा हो जाए, ल्यूक वार्म हो जाए तभी उसमें मिलाएं और वह भी सिर्फ जब डाइजेशन स्ट्रांग हो.
सांतवी गलती
नमकीन खाने के साथ दूध लेना. नमकीन स्नैक्स जैसे चिवड़ा, मटरी, पराठा. इनके साथ दूध लेने से दूध पेट में करडल होकर ब्लोटिंग, गैस, एक्ने ला सकता है. नमकीन स्नैक्स के साथ दूध अवॉइड करें.
आंठवी गलती
नहाने या मसाज के बाद तुरंत दूध पीना. नहाने या बॉडी मसाज के बाद आपका शरीर डिटॉक्स मोड में होता है. हमारे एनर्जी चैनल्स खुले होते हैं. दूध तुरंत लेने से सिस्टम ओवरवेल्म हो जाता है और थकान बढ़ सकती है. स्नान या मसाज से आधा घंटा या 45 मिनट के बाद ही दूध लेना सही होगा.
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नवीं गलती
कॉन्स्टिपेटेड या ब्लोटेड होने पर दूध पीना. अगर कॉन्स्टिपेशन है, ब्लोटिंग है तो डाइजेशन वीक होता है. दूध हैवी होता है. ऐसे में न्यूट्रिएंट्स अब्सॉर्ब नहीं होते और टॉक्सिक वेस्ट बढ़ सकता है. एक दिन दिन दूध को स्किप करें. गट को रिसेट करें और गर्म जीरा, अजवाइन पानी से डाइजेशन को सुधारें.
दसवीं गलती
मिक्स्ड स्पाइसेस के इस्तेमाल के बिना दूध को कैसे लेना? आजकल हल्दी, दालचीनी, अश्वगंधा को दूध में डालने का ट्रेंड बन गया है. लेकिन बिना अपनी प्रकृति जाने यह आपके दोष को इमंबैलेंस कर सकता है. जैसे हल्दी वात प्रकृति को शांत करता है. लेकिन पित्त प्रकृति में गर्मी या रेस्टलेसनेस ला सकता है. अपने कॉन्स्टिट्यूशन को समझे और फिर सही मसाला चुने.
कैसे करें दूध का सेवन
एक आयुर्वेदिक सीक्रेट है गर्म दूध में थोड़ा सा अदरक मिलाएं. इससे डाइजेशन इंप्रूव होता है. दूध हल्का होता है और साथ ही जिंजर के एंटीऑक्सीडेंट्स का फायदा भी मिलता है. दूध अपने आप में एक पावरफुल और रिजुमिनेटिंग फूड है. लेकिन सिर्फ तभी जब आप इसे सही समय सही तरीके सही कॉम्बिनेशन के साथ लें. गलतियों से दूध से टॉक्सिंस बनने के चांसेस ज्यादा है. लेकिन समझदारी से लिया गया दूध आपके शरीर को काफी ऊर्जा दे सकता है. काफी सुकून दे सकता है. तो आज से दूध के साथ एक्सपेरिमेंट्स नहीं अवेयरनेस के साथ में कंजमशन शुरू कीजिए. अपने शरीर को समझिए और दूध से उस पोषण को पाइए जो वास्तव में उसमें छुपा है. अपनी सेहत का ख्याल रखिए और दूध को अपना नेचुरल हीलर बनाइए.
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