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This Article is From May 23, 2022

Betel Leaf Benefits: मुंह की दुर्गंध दूर करने से लेकर पाचन तक, जानें पान खाने के अद्भुत फायदे

Betel Leaf Benefits: हिंदी शब्द 'पान' की उत्पत्ति संस्कृत शब्द 'पर्ना' से हुई है जिसका अर्थ है 'पत्ता'. अपने सांस्कृतिक महत्व और मुखशुद्धि के अलावा, पान के पत्तों के चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं.इनका आयुर्वेद में काफी महत्व हैं.

Betel Leaf Benefits: मुंह की दुर्गंध दूर करने से लेकर पाचन तक, जानें पान खाने के अद्भुत फायदे
Betel Leaf Benefits: केवल मुखशुद्धि ही नहीं और भी कई हैं पान खाने के फायदे.

इंडियन कल्चर में पान के पत्तों का आध्यात्मिक महत्व है. इसका इतिहास लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व का है. विभिन्न प्राचीन और धार्मिक ग्रंथों में भी पान के पत्ते का उल्लेख मिलता है. हिंदी शब्द 'पान' की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'पर्ना' से हुई है जिसका मतलब है 'पत्ता'. अपने सांस्कृतिक महत्व और मुखशुद्धि के अलावा, पान के पत्तों के चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. इनका आयुर्वेद में काफी महत्व हैं. इन पत्तों में कई औषधीय गुण होते हैं और यह विभिन्न रोगों और विकारों के उपचार में भी मदद करते हैं.

दर्द से राहत देता है
पान का पत्ता बेहतरीन एनाल्जेसिक है जो दर्द से तुरंत राहत देता है. इसका उपयोग कट या खरोंच के कारण होने वाले दर्द को कम करने में किया जा सकता है. दर्द को कम करने के लिए पान के पत्तों का पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं. 

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कब्ज कम करता है
पान के पत्ते एंटीऑक्सीडेंट का एक पावरहाउस हैं जो शरीर से रेडिकल्स को साफ करते हैं. यह शरीर में सामान्य PH स्तर को रिस्टोर करता है और पेट से जुड़ी समस्या को ठीक करता है. आयुर्वेद में कब्ज से राहत के लिए पान के पत्ते खाने की सलाह दी जाती है. पान के पत्तों को मसल लें और रात भर के लिए पानी में छोड़ दें. मल त्याग को आसान बनाने के लिए सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं.

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श्वसन संबंधी समस्याओं को कम करता है
पान का पत्ता खांसी और सर्दी से संबंधित समस्याओं के इलाज में मदद करता है. पान के पत्तों पर थोड़ा सा सरसों का तेल लगाकर गर्म करके छाती पर लगाने से कफ दूर होता है. आप पान के पत्तों का काढ़ा भी बना सकते हैं. 2 कप पानी में पान के कुछ पत्ते, इलायची, लौंग और दालचीनी डाले. इसे 1 कप तक कम करें और इस काढ़े का दिन में दो से तीन बार पिएं. 

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एंटीसेप्टिक और एंटी-फंगल गुण
पान के पत्तों में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वे पॉलीफेनोल्स से भरे होते हैं. इसका इस्तेमाल गठिया और ऑर्काइटिस के ट्रीटमेंट में किया जाता है. इसके एंटी-फंगल गुण फंगल संक्रमण से लड़ने में कारगर हैं. पान के पत्तों का लेप प्रभावित जगह पर लगाने से फंगल इंफेक्शन खत्म हो सकता है.

ओरल हेल्थ बनाए रखता है
पान के पत्तों में कई रोगाणुरोधी एजेंट होते हैं, जो प्रभावी रूप से मुंह में रहने वाले कई जीवाणुओं का मुकाबला करते हैं. भोजन के बाद पान के पत्तों को चबाने से न केवल आंत का स्वास्थ्य बढ़ता है, बल्कि सांसों की दुर्गंध, मुंह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिल सकता है.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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