
कॉलेज के चार दोस्तों की कहानी है 'डेज़ ऑफ तफ़रीह'.
नई दिल्ली:
फ़िल्म 'डेज ऑफ़ तफ़रीह' कॉलेज के चार छात्रों के इर्द गिर्द घूमती है जो खूब सारी मौज मस्ती करते हैं. फिल्म बताती है कि किस तरह कॉलेज या पढ़ाई के दिन तफ़रीह से भरे होते हैं. इसे ज़िन्दगी के सबसे बेहतरीन समय भी कहा जाता है.
मगर जिस तरह फिल्म का नाम 'डेज ऑफ़ तफ़रीह' है मुझे लगता है कि इस फिल्म को भी तफ़रीह के लिए ही बना लिया गया है. फिल्म में कॉलेज की तफ़रीह तो है मगर बिना किसी कहानी के. बस कॉलेज के दिनों की मौज मस्ती के अनुभवों को फिल्म की शक्ल दे दी गई है.
फिल्म में 4 अलग-अलग तरह के लड़के हैं जो दोस्त हैं और खूब मौज मस्ती करते हैं. इनमें से दो किरदार तो ऐसे हैं जो शायद रियल लाइफ में नज़र ही नहीं आएं. जैसे कोई भोला इंसान बेवकूफी कर सकता है मगर हर समय उलटे सीधे मुंह बनाकर बात नहीं करता. कोई किरदार सीरियस या गुस्से वाला हो सकता है मगर ऐसा भी नहीं कि कोई लड़की अनजाने में उससे टकरा जाये और सॉरी बोले फिर भी उसे पटक दे.
मैंने भी ज़िन्दगी के 10 साल हॉस्टल में गुज़ारे हैं जहां लोग सबसे ज़यादा मस्ती और शरारत करते हैं मगर फिल्म के कुछ ही दृश्यों से मैं खुद को जोड़ पाया. बस फिल्म में कुछ चुनिंदा दृश्य आपको हंसाते हैं. फिल्म ने एक और चीज़ बताई जो मुझे अच्छी लगी कि कॉलेज के बाद ज़िन्दगी में अलग मोड़ आता है. आप दोस्त तो बनाते हैं मगर वैसी दोस्ती नहीं निभाते. फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है 1 स्टार.
मगर जिस तरह फिल्म का नाम 'डेज ऑफ़ तफ़रीह' है मुझे लगता है कि इस फिल्म को भी तफ़रीह के लिए ही बना लिया गया है. फिल्म में कॉलेज की तफ़रीह तो है मगर बिना किसी कहानी के. बस कॉलेज के दिनों की मौज मस्ती के अनुभवों को फिल्म की शक्ल दे दी गई है.
फिल्म में 4 अलग-अलग तरह के लड़के हैं जो दोस्त हैं और खूब मौज मस्ती करते हैं. इनमें से दो किरदार तो ऐसे हैं जो शायद रियल लाइफ में नज़र ही नहीं आएं. जैसे कोई भोला इंसान बेवकूफी कर सकता है मगर हर समय उलटे सीधे मुंह बनाकर बात नहीं करता. कोई किरदार सीरियस या गुस्से वाला हो सकता है मगर ऐसा भी नहीं कि कोई लड़की अनजाने में उससे टकरा जाये और सॉरी बोले फिर भी उसे पटक दे.
मैंने भी ज़िन्दगी के 10 साल हॉस्टल में गुज़ारे हैं जहां लोग सबसे ज़यादा मस्ती और शरारत करते हैं मगर फिल्म के कुछ ही दृश्यों से मैं खुद को जोड़ पाया. बस फिल्म में कुछ चुनिंदा दृश्य आपको हंसाते हैं. फिल्म ने एक और चीज़ बताई जो मुझे अच्छी लगी कि कॉलेज के बाद ज़िन्दगी में अलग मोड़ आता है. आप दोस्त तो बनाते हैं मगर वैसी दोस्ती नहीं निभाते. फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है 1 स्टार.
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