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Sant Ki Seekh: प्रेम को पाने के बाद भी आखिर जीवन में क्यों आता है दुख?

Love And Pain: जीवन में किसी के प्रति हमारा लगाव या फिर कहें प्रेम का होना एक सामान्य सी बात है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि यही प्रेम एक समय बाद आपके तनाव या फिर दुख का कारण क्यों बनने लगता है? प्रेम में होने वाले दुखों के कारण को विस्तार से बता रहे हैं जाने—माने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर.

Sant Ki Seekh: प्रेम को पाने के बाद भी आखिर जीवन में क्यों आता है दुख?
Sant Ki Seekh: क्या प्रेम दुख का कारण है?
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Spiritual reason why love causes pain: अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि प्रेम एक भावना है. प्रेम कोई भावना नहीं है, यह आपका अस्तित्व ही है. आप प्रेम से बने हैं. जब आप प्रेम की मांग करते हैं, तो यह कम हो जाता है. जब आप प्रेम देते हैं तो यह बढ़ता है. सच्चा प्रेम दर्द नहीं देता, यह स्वतंत्रता लाता है. दर्द लगाव और अपेक्षाओं से आता है, प्रेम से नहीं. जब आपको यह एहसास हो जाता है कि आप स्वयं प्रेम हैं, तब आप मांगने वाले नहीं, देने वाले बन जाते हैं.

अपेक्षाएं कम करती हैं रिश्तों की मिठास 

जब आप प्रेम में होते हैं तो क्या होता है? कुछ समय बाद, आप मांगें और अपेक्षाएं करने लगते हैं और प्रेम कम होने लगता है. आनंद लुप्त हो जाता है. तब आप कहते हैं, 'ओह! मैंने इस रिश्ते में पड़कर गलती कर दी,' और फिर आप उस रिश्ते से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करते हैं. इससे बाहर आने के बाद, आप किसी दूसरे रिश्ते में जुड़ जाते हैं और फिर वही कहानी दोहराई जाती है.

कई बार प्रेम में अलगाव या बिछड़ना इतना विनाशकारी लग सकता है कि जैसे आपका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है. ऐसे समय में, केवल आपका विवेक ही आपको आगे बढ़ने की शक्ति देता है. क्रोध नहीं, प्रतिशोध नहीं, यहां तक कि समय का बीतना भी नहीं. यह आपका विवेक ही है जो आपको इस दौर से बाहर निकालता है.

जब प्रेम में दुख मिले तो क्या करें?

दुख से उबरने के लिए आपको दूसरे व्यक्ति को अपशब्द कहने की आवश्यकता नहीं है. आपको उसे धोखेबाज या दुष्ट कहने की जरूरत नहीं है. इससे आप केवल और अधिक परेशान होंगे और कभी-कभी इसका उल्टा असर भी हो सकता है. इस बात की संभावना है कि दूसरा व्यक्ति भी जवाब में कोई आहत करने वाली बात कह दे. आप दूसरे व्यक्ति को नहीं सुधार सकते लेकिन आप हमेशा स्वयं को सुधार सकते हैं. एक ताजा, हल्के और अधिक प्रसन्न हृदय के साथ जीवन में आगे बढ़ें.

Sant Ki Seekh: बुरे लोगों से बचते हुए खुद को बेहतर कैसे बनाएं?

एक सुखद और गहरी नींद लें. जब आप सुखद और गहरी नींद में होते हैं, तो वह व्यक्ति कहां होता है? गहरी नींद में कोई भी आपको परेशान नहीं करता.  उस समय आप हर प्रभाव से मुक्त होते हैं. फिर जागने के बाद कोई व्यक्ति आपकी शांति कैसे छीन लेता है? केवल इसलिए क्योंकि आपने उसे अपने मन में बसा लिया है. वह भी बिना कोई किराया लिए.

अपने मन को मजबूत बनाएं 

अपने मन को दूसरों की इच्छानुसार चलने मत दीजिए. अपने भीतर स्थित हो जाइए. दुनिया में कोई भी चीज़ आपको उतना परेशान नहीं कर सकती, जितना कि आपका अपना मन. ऐसा लगता है कि दूसरे आपको परेशान कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में वह कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है. यह आपका अपना मन ही है जो आपको परेशान कर रहा है.

स्वयं को यह भी याद दिलाएं कि आपके जीवन में कभी भी कुछ स्थायी नहीं रहा है. अपने बीते हुए वर्षों को मुड़कर देखें. कितनी ही घटनाएं घटी हैं. कुछ सुखद तो कुछ दुखद, कुछ भयानक और कुछ अद्भुत. क्या इनमें से कुछ भी वास्तव में हमेशा आपके साथ रहा? ऐसा कभी नहीं हुआ, एक बार भी नहीं. जीवन बिना रुके आगे बढ़ता रहता है, जैसे घटनाओं की कोई बाढ़ गुजर रही हो. इस सत्य को क्षण भर के लिए भी महसूस कर लेने से मन में तुरंत ताजगी आ जाती है. चीजों की यह अस्थायी प्रकृति आपके दुख के बजाय आपकी ताकत बन सकती है.

किसी रिश्ते के टूटने के बाद मिलने वाली आजादी को भी देखें. यह उस पिंजरे से बाहर निकलने जैसा है जिसे आपने स्वयं अपने लिए बनाया था. उस निकास का शोक क्यों मनाना, जिसे आप स्वयं एक स्वतंत्र और खुशहाल जीवन के लिए चाहते थे? इस रिश्ते से पहले भी, आप पूरी तरह से जीवित और सक्रिय थे. आप हंस रहे थे, मुस्कुरा रहे थे और पूरी तरह से खुश थे. उन दिनों को स्पष्ट रूप से याद करें. तब जीवन ठीक था. यह अब फिर से ठीक हो जाएगा.

पकड़ने और छोड़ने की कला
  
छोड़ने की इसी प्रवृत्ति को आपने जीवन में कई बार दोहराया है. ऐसा तब भी हुआ था जब आप छोटे बच्चे थे. तब आप एक भी खिलौना नहीं छोड़ना चाहते थे. आप पूरी दुकान घर लाना चाहते थे. आप उसमें रखा हर खिलौना चाहते थे और कुछ भी पीछे छोड़ने से इनकार करते थे. फिर भी आप स्वाभाविक रूप से उस लगाव से बाहर आ गए. आप आगे बढ़े, नए दोस्त बनाए और नई खुशियां खोज लीं. आपकी जानकारी के बिना ही वह पुराना लगाव धीरे-धीरे कम हो गया. जीवन आपको हर घटना में छोड़ने की कला सिखाता है. जब आप छोड़ना सीख जाएंगे, तो आप आनंदित होंगे और जैसे ही आप आनंदित रहने लगेंगे, आपको और भी अधिक प्राप्त होगा.

भावनाएं ही हम सभी को इंसान बनाती हैं, और गहराई से महसूस करने में कुछ भी गलत नहीं है. लेकिन भावनाओं को कभी भी हमारी बुद्धि या विवेक पर हावी नहीं होने देना चाहिए. भावनाएं आपकी तर्क करने की पूरी क्षमता पर कब्ज़ा कर सकती हैं. जिस क्षण आप यह पहचान लेते हैं कि ऐसा हो रहा है, आप पहले ही इससे एक कदम बाहर आ चुके होते हैं. 

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