गुरुदेव श्री श्री रविशंकर
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करियर में सफल कैसे हों, करियर चुनने से पहले जान लें सफलता के ये मूल मंत्र : गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर
आजीविका के स्तर पर आपको यह देखना चाहिए कि आपके लिए सर्वोत्कृष्ट क्या है, जिसमें आपको अच्छा पारिश्रमिक मिलता हो और जहाँ आपकी आवश्यकता हो. आपको वही करना चाहिए, वही आपका 'स्वधर्म' है.
- अप्रैल 02, 2026 12:10 pm IST
- Written by: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, Edited by: अनिता शर्मा
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पहले भीतर की होलिका को जलाओ और फिर जानों होली क्यों मनाई जाती है : गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर
ऐसी कथा प्रचलित है कि हिरण्यकश्यप को प्रह्लाद की नारायण भक्ति पसंद नहीं थी. वह चाहता था कि प्रह्लाद नारायण की नहीं बल्कि उसकी ही भक्ति करे, उसे ही भगवान माने.
- मार्च 04, 2026 09:02 am IST
- Written by: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, Edited by: अनिता शर्मा
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समर्पण और ध्यान का असली मतलब क्या है : गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर
हम प्रतिदिन भोजन करते हैं, फिर भी भूख लगती है. प्रतिदिन सोते हैं, फिर भी विश्राम की आवश्यकता होती है. कोई यह नहीं कहता कि नित्य खाना या सोना उबाऊ है. जब जीवन की आवश्यक क्रियाएं हम नियमित रूप से करते हैं, तो प्रार्थना और ध्यान क्यों नहीं?
- फ़रवरी 23, 2026 18:48 pm IST
- Written by: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, Edited by: अनिता शर्मा
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सत्यम शिवम् सुंदरम, कौन हैं शिव और शिव सिद्धांत क्या है: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर
Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog: केवल एक ही ऐसा कार्य है जो बार-बार करने से आनंद मिलता है और वह है- ध्यान. यही स्वयं (शिव) के सम्पर्क में होना है - सत्यम शिवम् सुंदरम.
- फ़रवरी 12, 2026 17:24 pm IST
- Written by: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, Edited by: अनिता शर्मा
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Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog : सौंदर्य का अनुभव और जीवन जीने की कला
Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog: जिस क्षण आप सौंदर्य को ‘अधिकार’ में लेने की कोशिश करते हैं, उसी क्षण आप उसे कुरूप बना देते हैं. आप देखेंगे- सुंदर पत्नी होने पर भी पुरुष बाहर और सुंदरता खोजता रहता है. या स्त्रियाँ ऐसे पुरुषों की तलाश करती हैं जिनके कंधे चौड़े हों, नाक और लंबी हो, जो उनके वर्तमान साथी में नहीं है. इसका अंत कहाँ है? जिस क्षण आप उसे पा लेते हैं, उसका आकर्षण समाप्त हो जाता है. फिर अगली खोज शुरू हो जाती है. पूरा जीवन इसी मृगतृष्णा के पीछे दौड़ बन जाता है,
- जनवरी 26, 2026 17:56 pm IST
- Written by: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, Edited by: अनिता शर्मा
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असवाद, तनाव और बैचेनी से मुक्ति पाने का असान तरीका है प्राण को बढ़ाना: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर
How to manage Stress: जब आप ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करते हैं, तो यह भावनात्मक केंद्रों को शांत करता है और अवसाद को ठीक करने में मदद करता है. प्राचीन लोग हमेशा जप से पहले और जप के बाद ध्यान करने की सलाह देते थे.
- नवंबर 21, 2025 13:39 pm IST
- Written by: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, Edited by: अनिता शर्मा