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रांची के दो भाइयों की कहानी, एक पुलिस में तैनात, दूसरा आंदोलन में, रोते हुए बोला- उसे आदेश मिलता तो मुझे डंडे मारता

रांची के प्रदर्शनकारी छात्र ने भरे हुए गले से कहा कि मेरी उम्र 35 साल पार है. अब तक मैं सिर्फ तीन बार ही जेपीएससी मेंन्स लिख पाया हूं. उम्र खत्म हो रही है ये क्या मेरी गलती है? 35 साल में कम से कम 10 बार तो एग्जाम दे पाते.

रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र NDTV से बात करते हुए रो पड़े.
  • झारखंड में JPSC परीक्षा में धांधली के आरोपों को लेकर छात्र पिछले 20 दिनों से रांची में आंदोलन कर रहे हैं
  • आंदोलनकारी कई छात्रों के परिवार के सदस्य पुलिस में हैं, उनके बच्चे और भाई प्रदर्शन कर रहे हैं
  • छात्र ने कहा कि जिस दिन हम पर लाठियां चलाई गईं उस दिन मेरा पुलिस वाला भई ड्यूटी पर था
रांची:

झारखंड में JPSC परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितता के आरोपों समेत अन्य मांगों को लेकर रांची में छात्र पिछले 20 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे हैं.इस दौरान दो ऐसे भइयों की कहानी सामने आई है, जिनमें एक अपनी पुलिस की ड्यूटी कर रहा है और दूसरा भाई अपने हक की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है. जिस दिन आंदोलनकारियों पर लाठियां भांजी गईं उस दिन पुलिस वाला भाई अपनी ड्यूटी निभा रहा था. आंदोलनकारी भाई ये सचकर ही भावुक हो गया कि दोनों भाई अगर आमने-सामने आ जाते तो क्या होता. पुलिस वाला भाई उस पर लाठी कैसे चला पाता. 

 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठियां भांजी. आंदोलन से कुछ छात्र अपने घर वापस लौट चुके हैं. एनडीटीवी की टीम रांची के उस स्टेडियम में पहुंची, जहां अब भी बहुत से छात्र धरने पर बैठे हैं. उनसे पूछा गया कि ज्यादातर लड़कियां अपने घर वापस चली गई हैं. क्या वह डरी हुई हैं कि उनके साथ पता नहीं क्या स्थिति होगी?

हमारे परिवार वाले डरे हुए हैं

इस सवाल के जवाब में आंदोलनकारी छात्र ने कहा कि जिस तरह से सरकार उनके साथ बर्बरता से पेश आई, उससे माता-पिता और परिवार वाले  डरे हुए हैं. उनका कहना है कि सरकार तुम्हारी मांगें तो मान नहीं रही.रिपोर्टर ने जब पूछा कि क्या आपके परिवार वाले भी आंदोलन छोड़कर घर पास बुला रहे हैं? इस सवाल के जवाब में प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि नहीं ऐसा नहीं है. वे कह रहे हैं कि अपने हक के लिए लड़ो, लेकिन अपना ध्यान रखो. ज्यादा शोर मत करो.

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आधी रात को हमें धमकाया जा रहा

वहीं प्रदर्शनकारी छात्रा ने कहा कि आधी रात को जिस तरह से धमकाया जा रहा है ये बिल्कुल भी सही नहीं है. सोते समय ये सब किया जाना बहुत ही गलत बात है. ये सब करने का क्या मतलब है. छात्रा ने सरकार से पूछा कि ये क्लियर करिए कि आप डर गए हैं या हमें डराने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा तो नहीं कि आप डर गए हैं इसीलिए हम लोगों को डरा  रहे हैं.

ये सीजेपी प्रोटेस्ट नहीं, यहां ब जेनुअन हैं

दूसरे प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि ये कोई सीजेपी प्रोटेस्ट नहीं है. जहां असामाजिक तत्व हों. ये एक जेनुअन प्रोटेस्ट है. सभी बच्चे बिहार और झारखंड से हैं, हमारे माता-पिता बचपन में ही हमें ये संस्कार दे देते हैं कि अपनों से बड़ों से कैसे बात करनी है. छात्र ने कहा कि मेरे पिता भी पुलिस में हैं. मैं जैसे अपने पिता से व्यवहार करता हूं वैसे ही पुलिस वालों के साथ करता हूं. हमने कभी उनके लिए कोई गलत शब्द इस्तेमाल नहीं किए हैं. 

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पुलिस वालों के बच्चे और भाई कर रहे प्रदर्शन

आंदोलन में शामिल कई छात्रों के परिवार के सदस्य पुलिस में हैं. किसी के पिता पुलिस में हैं तो किसी के भाई सब इंस्पेक्टर हैं. वनमाली नाम के छात्र ने कहा कि जिस दिन हम पर लाठीचार्ज किया गया उस दिन मेरे भइया की ड्यूटी थी. अगर दोनों भाई सामने-सामने आ जाते तो पता नहीं क्या ही होता.बैरिकेड के इस तरफ प्रदर्शनकारी छात्र और बैरिकेड के उस तरफ उनका पुलिस की ड्यूटी कर रहा भाई खड़ा है तो ये घड़ी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.

सब इंस्पेक्टर भाई को आदेश मिलता तो उसे मारना ही पड़ता

छात्र ने कहा कि अगर ऐसी सिचुएशन आती तो हमरे पास आंसुओं के अलावा कुछ नहीं होता. न वो मार पाते, न मैं हट पाता. हमारी आंखों में सिर्फ आंसू होते. हम उस समय कुछ भी कहने लायक नहीं होते. छात्र ने कहा कि वह अपने भाई को लाठी कैसे मार पाते. उसने भरे हुए गले से कहा कि हम गलत मांग तो नहीं कर रहे हैं. हम तो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं. अगर ऐसे हालात में भाई सामने डंडा लेकर खड़ा होगा तो उसे तो मारना ही पड़ेगा. उसे अगर आदेश मिला है तो मारना ही पड़ेगा. प्रदर्शनकारी छात्र ने भरे हुए गले से कहा कि हम नहीं हटेंगे, हम अड़े रहेंगे क्यों कि हम गलत नहीं हैं. ये हमारा अधिकार है.

परीक्षा देने की उम्र निकल रही है, जिम्मेदारी किसकी

भावुक छात्र ने कहा कि हमारी उम्र 35 साल पार है. अब तक मैं सिर्फ तीन बार ही जेपीएससी मेंन्स लिख पाए. उम्र खत्म हो रही है ये किसकी गलती है. क्या यह मेरी गलती है. ये सरकार की जिम्मेदारी है. 35 साल में हम कम से कम 10 बार तो एग्जाम दे पाते. मैंने अपने 10 साल इसे दिए हैं.कब से तैयारी कर रहा हूं, उम्र निकल रही है. इसके बाद मैं इस रेस से बाहर हो जाऊंगा. ये जिम्मेदारी किसकी होगी. मैंने जो पढ़ाई की, जो एग्जाम लिखे,इंटरव्यू दिए, क्या मुझे कोई इसका सर्टिफिकेट देगा.

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