सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हो जाएगा. सावन की आहट के बीच जया-विजया पार्वती व्रत का आरंभ भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है. जया-विजया पार्वती व्रत आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से शुरू होकर सावन कृष्ण तृतीया यानी 5 दिनों तक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए रखा जाता है. इस दौरान बिना नमक का भोजन किया जाता है, जवारे बोए जाते हैं और अंतिम दिन रात्रि जागरण होता है. यह 5 दिनों का पावन व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसे विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं. इस साल जया पार्वती व्रत 26 जुलाई से शुरू हो रहा है और पांच दिनों तक श्रद्धा एवं नियमों के साथ मनाया जाएगा.
क्यों खास है जया-विजया पार्वती व्रत?
बचपन से हम सुनते आए हैं कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. यही अटूट समर्पण और विश्वास इस व्रत का आधार माना जाता है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करते हैं, उन्हें वैवाहिक सुख, परिवार में समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है.
विजया पार्वती व्रत के नियम
- व्रत के पहले दिन मिट्टी के पात्र में गेहूं या जौ बोए जाते हैं.
- पांचों दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है.
- कई श्रद्धालु नमक रहित भोजन ग्रहण करते हैं.
- फल, दूध और सात्विक आहार का सेवन किया जाता है.
- अंतिम दिन जगराता, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा की जाती है.
विजया पार्वती व्रत पूजन विधि
- प्रातः स्नान के बाद पूजा स्थान को साफ करें.
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
- दीपक जलाकर कुमकुम, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें.
- गेहूं या जौ के पात्र की भी प्रतिदिन पूजा करें.
- श्रद्धापूर्वक व्रत कथा का श्रवण करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
विजया पार्वती व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक निर्धन दंपति संतान सुख से वंचित था. उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की. माता पार्वती ने उन्हें पांच दिवसीय जया पार्वती व्रत करने का निर्देश दिया. दंपति ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें संतान, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हुआ. तभी से इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. जया-विजया पार्वती व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धैर्य, विश्वास और समर्पण का उत्सव है, जो जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है.
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