भारत में नाग पंचमी के मौके पर नाग देवता की पूजा की जाती है, लेकिन सांपों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं. दुनिया के कई देशों में अलग-अलग सभ्यताओं ने सांप को शक्ति, सुरक्षा, उर्वरता, पानी और पुनर्जन्म के प्रतीक के तौर पर देखा है. कहीं नाग देवता के रूप में पूजा हुई तो कहीं उन्हें ड्रैगन या सर्प देवता का रूप दिया गया. आइए जानते हैं यात्रा और इतिहास के नजरिए से उन जगहों के बारे में, जहां सांपों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है.
नेपाल और श्रीलंका में भी होती है नाग पूजा
जानकारी के अनुसार, भारत के पड़ोसी नेपाल में भी नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है. यहां नागों की पूजा से जुड़ी कई स्थानीय परंपराएं हैं. वहीं श्रीलंका के बौद्ध मंदिरों और लोककथाओं में नागों का उल्लेख मिलता है. यहां नागों को धार्मिक कथाओं और संरक्षण से जोड़कर देखा जाता है.
कंबोडिया और थाईलैंड में नागों की खास मान्यता
अगर कंबोडिया की बात करें तो यहां की संस्कृति में नाग का खास स्थान है. खमेर परंपराओं में नागों से जुड़ी कथाएं देश की उत्पत्ति और स्थानीय संस्कृति से जोड़ी जाती हैं. साथ ही थाईलैंड में भी नाग या 'नागा' से जुड़ी मान्यताएं देखने को मिलती हैं. कई मंदिरों में नाग की आकृतियां धार्मिक वास्तुकला का हिस्सा हैं.
चीन और जापान में सांप बने पौराणिक प्रतीक
चीन में सांप से जुड़ी प्राचीन मान्यताएं ड्रैगन की अवधारणा से जुड़ती हैं. ड्रैगन को शक्ति और सम्राट से जोड़कर देखा गया. जापान में भी सांपों से जुड़ी पौराणिक कथाएं हैं. मिवा देवता और यामाता नो ओरोची की कहानी इसका उदाहरण है.
कोरिया और इंडोनेशिया में भी मिलते हैं उदाहरण
जानकारी के अनुसार, कोरियाई लोककथाओं में सांपों को देवी-देवताओं और समृद्धि से जोड़ने वाली मान्यताएं मिलती हैं. जेजू द्वीप की लोक परंपराओं में भी सर्प रूपी देवी-देवताओं का वर्णन है. इंडोनेशिया में भी अलग-अलग स्थानीय संस्कृतियों में सांपों से जुड़ी पूजा और मान्यताएं रही हैं.
मिस्र और यूनान में सांप शक्ति का प्रतीक
बता दें कि प्राचीन मिस्र में कोबरा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था. वाडजेट समेत कई देवी-देवताओं के साथ इसका संबंध बताया जाता है. साथ ही, प्राचीन यूनान में भी सांपों को धार्मिक प्रतीक माना गया. यूनानी कथाओं में सर्प से जुड़ी कई कहानियां मिलती हैं.
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मैक्सिको से ऑस्ट्रेलिया तक सर्प पूजा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य अमेरिका की एज्टेक सभ्यता में क्वेटजालकोटल को पंख वाले सर्प देवता के रूप में पूजा जाता था. पेरू की कुछ प्राचीन संस्कृतियों में भी बड़े सांपों का धार्मिक महत्व था. ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी परंपराओं में 'रेनबो सर्पेंट' यानी इंद्रधनुषी सर्प की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसे सृष्टि और जल से जोड़कर देखा जाता है.
मेसोपोटामिया में भी था सर्प देवता
साथ ही, प्राचीन मेसोपोटामिया में निंगिशजिदा नामक सर्प देवता का उल्लेख मिलता है. यहां सांप को कई जगह पुनर्जन्म और नवीनीकरण का प्रतीक माना गया. कनान और पश्चिम एशिया की कुछ प्राचीन संस्कृतियों में भी सर्प पूजा के प्रमाण मिलते हैं. अरब, फारस, एशिया माइनर, सीरिया, इटली, उत्तरी और पश्चिमी यूरोप के कई हिस्से, लैटिन अमेरिकी राष्ट्र में प्राचीन काल में इन सभी क्षेत्रों में सर्प पूजा लोकप्रिय और सार्वभौमिक रूप से प्रचलित थी.
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