धार्मिक ग्रंथों और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, व्यक्ति की राशि, ग्रहों की स्थिति और इष्टदेव का उसके जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है. यही कारण है कि ज्योतिष में राशि के अनुसार विशेष ज्योतिर्लिंग की पूजा का महत्व बताया गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्र राशि के आधार पर व्यक्ति का एक विशेष ज्योतिर्लिंग माना जाता है. उस ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजा और मंत्र जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही मानसिक शांति मिलती है और ग्रहों से जुड़े दोषों के प्रभाव को कम करने में भी सहायता मिलती है.
राशि के अनुसार ज्योतिर्लिंग इस प्रकार बताए गए हैं.-
- मेष (Aries) राशि के जातकों के लिए रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो)
- वृषभ (Taurus) राशि के लिए सोमनाथ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
- मिथुन (Gemini) राशि के जातकों के लिए नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को)
- कर्क (Cancer) राशि के लिए ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
- सिंह (Leo) राशि के लिए वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
- कन्या (Virgo) राशि के लिए मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
- तुला (Libra) राशि के जातकों के लिए महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
- वृश्चिक (Scorpio) राशि के जातकों के लिए ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
- धनु (Sagittarius) राशि के लिए काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
- मकर (Capricorn) राशि के लिए भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
- कुंभ (Aquarius) राशि के लिए केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
- मीन (Pisces) राशि के लिए त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग ( दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
अगर किसी व्यक्ति को अपनी राशि नहीं पता है, तो वह अपने नाम के पहले अक्षर के आधार पर भी राशि का अनुमान लगा सकता है. हालांकि, अधिक सटीक जानकारी के लिए जन्मकुंडली का अध्ययन आवश्यक माना जाता है.
पंडित कौशल पाण्डेय बताते हैं, जन्मकुंडली में इष्टदेव का निर्धारण मुख्य रूप से पंचम भाव, नवम भाव और लग्न के आधार पर किया जाता है. पंचम भाव को पूर्व जन्म के कर्म, बुद्धि और आध्यात्मिक झुकाव का भाव माना जाता है. इसके अलावा कुंडली में सबसे अधिक अंश वाले ग्रह, जिसे आत्मकारक ग्रह कहा जाता है, उसके आधार पर भी इष्टदेव का चयन किया जाता है. आत्मकारक ग्रह के अनुसार,
- सूर्य से भगवान राम, श्रीकृष्ण और विष्णु जी,
- चंद्रमा से भगवान शिव,
- मंगल से हनुमान जी, कार्तिकेय या नरसिंह भगवान,
- बुध से विष्णु जी या मां दुर्गा,
- गुरु से विष्णु जी और ब्रह्मा जी,
- शुक्र से मां लक्ष्मी या मां दुर्गा
- शनि से हनुमान जी और शनिदेव
- राहु से मां दुर्गा या भैरव बाबा तथा
- केतु से भगवान गणेश की आराधना शुभ मानी जाती है.
पंडित जी बताते हैं, नियमित रूप से अपने राशि संबंधी ज्योतिर्लिंग का स्मरण, शिव मंत्रों का जाप और भगवान शिव की उपासना करने से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है.
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