हिन्दू धर्म में हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन काल भैरव की पूजा-अर्चना और व्रत रखने से साधक को भय, संकट, नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है. साथ ही तंत्र साधना और भैरव उपासना के लिए ये तिथि बेहद खास मानी जाती है. फिलहाल सावन का महीना चल रहा है और आज यानी 5 अगस्त को कालाष्टमी मनाई जा रही है. इसी कड़ी में आइए जानते हैं कालाष्टमी की तिथि, पूजा मुहूर्त और विधि.
सावन कालाष्टमी की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 5 अगस्त को रात 8 बजकर 42 मिनट पर होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 6 अगस्त को शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा. ऐसे में सावन कालाष्टमी 5 अगस्त को मनाई जाएगी.
पूजा का शुभ मुहूर्त
कालाष्टमी पर पूजा निशिता मुहूर्त में की जाती है. ऐसे में पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 30 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में आप काल भैरव की पूजा कर सकते हैं.
कालाष्टमी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
- भगवान भैरव के सामने व्रत का संकल्प लें.
- शाम या रात में भगवान भैरव की फोटो या मूर्ति रखें.
- गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें.
- कुमकुम, चंदन, काले तिल, फूल और जलेबी या इमरती का भोग लगाएं.
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- भैरव चालीसा पढ़ें और अंत में आरती करें.
कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव को समर्पित है. इस दिन भगवान का पूजन करने मात्र से जातक के जीवन से भय, बाधा, और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है. विशेषकर रात्रि में भैरव चालीसा, भैरव स्तोत्र, या ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. भगवान काल भैरव को उड़द दाल, काले तिल, और मिठाई का भोग लगाएं. साथ ही कालाष्टमी के दिन, काले कुत्ते को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ता काल भैरव का वाहन है.
काल भैरव मंत्र
- ॐ कालकालाय विद्महे, तन्नो काल भैरवः प्रचोदयात्॥
- ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं॥
- ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं क्षेम् क्षेत्रपालाय कालभैरवाय नमः॥
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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