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Ram Lakshman Dwadashi 2026: आज है राम लक्ष्मण द्वादशी, जानें इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Ram Lakshman Dwadashi Vrat: पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी है, जिसे सनातन परंपरा में भगवान विष्णु और शेषनाग के अवतार कहे जाने वाले भगवान राम और लक्ष्मण की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है. राम लक्ष्मण द्वादशी की पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

Ram Lakshman Dwadashi 2026: आज है राम लक्ष्मण द्वादशी, जानें इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
Ram Lakshman Dwadashi 2026: राम लक्ष्मण द्वादशी व्रत की विधि और धार्मिक महत्व
File Photo

Ram Lakshman Dwadashi 2026 Significance: सनातन परंपरा में राम एक ऐसा नाम है जीवन के प्रारंभ से लेकर अंत तक जुड़ा रहता है. सभी दुखों को तारने वाले उन्हीं राम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण से जुड़ा पर्व राम लक्ष्मण द्वादशी है. पंचांग के अनुसार यह पर्व हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि इस पावन दिन जो कोई व्यक्ति विष्णु अवतार प्रभु श्री राम और उनके अनुज शेषावतार लक्ष्मण की विधि-विधान से पूजा करता है, उसके सभी दुख दूर और कामनाएं पूरी होती हैं. आइए राम लक्ष्मण द्वादशी की पूजा की संपूर्ण विधि और धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं. 

राम लक्ष्मणी द्वादशी का शुभ मुहूर्त 

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की द्वादशी तिथि (Ram Lakshman Dwadashi) 25 जून 2026 की शाम को 08:09 से प्रारंभ होकर आज दिनांक 26 जून 2026 की रात्रि 10:22 बजे तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार राम लक्ष्मणी द्वादशी का व्रत और पूजन 26 जून 2026 को किया जाएगा. वहीं इस व्रत का पारण अगले दिन 27 जून 2026 को प्रात:काल 05:25 से 08:13 बजे के बीच किया जाएगा.

राम लक्ष्मण द्वादशी व्रत की पूजा विधि

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भगवान राम और लक्ष्मण को समर्पित इस पावन द्वादशी पर व्रत और पूजन करने के लिए साधक को प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद पीले वस्त्र धारण करना चाहिए. इसके बाद इस व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प करते हुए घर के ईशान कोण या फिर अपने पूजा स्थान पर राम दरबार की मूर्ति या चित्र को स्थापित करके उनकी पुष्प, चंदन, धूप, दीप, फल, मिष्ठान, पंचामृत, तुलसी आदि अर्पित करते हुए विशेष रूप से प्रभु श्री राम के मंत्र 'ॐ श्री रामाय नमः' और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इसी प्रकार शेषावतार लक्ष्मण के मंत्र 'ॐ लक्ष्मणाय नमः' का जप करना चाहिए. पूजा के अंत में साधक को श्रद्धा और विश्वास के साथ राम दरबार की आरती करके सभी को प्रसाद बांटना चाहिए. 

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राम लक्ष्मण द्वादशी व्रत का धार्मिक महत्व 

हिंदू मान्यता के अनुसार राम लक्ष्मण द्वादशी के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार पूजन और दान करने पर सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इस पावन व्रत वाले दिन जरूरतमंद लोगों को शीतल जल से भरा घड़ा, अन्न, वस्त्र एवं धन का दान करने का बड़ा पुण्यफल माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार राम लक्ष्मण द्वादशी व्रत रखने वाले साधक को पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सात्विक आहार लेना चाहिए और तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से साधक को भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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