Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है. यह माघ महीने में आती है और इसे माघी या माघ अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से, दान करने से और भगवान विष्णु के साथ ही पितरों की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. प्रेमानंद महाराज के अनुसार, मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद मौन रहकर जप, तप, दान और पितृ तर्पण करें. सूर्य देव और पितरों की पूजा करें, जिसमें तिल, जल और सफेद फूल अर्पित करें और गरीबों को भोजन व वस्त्र दान करें, जिससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है.
यह भी पढ़ें:- Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर आत्मशुद्धि के लिए किन मंत्रों का करें जप, इस व्रत कथा का पाठ करने से मिलेगी शांति
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, मौनी अमावस्या पर 51 मिनट का मौन धारण करना है. इसे करने के लिए सुबह-सुबह उठना है और स्नान करना. स्नान करने के बाद खुल वातावरण में जाना और वहां आसन ग्रहण करना. इसके बाद कम से कम 45 मिनट का मौन धारण करना. इस दौरान गौरी शंकर जी को ध्यान में रखते हुए ओम गौरी शंकराय नमः मंत्र का जाप करना है. ओम गौरी शंकराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करते-करते मौन साधना करना है. इसके अलावा शाम के समय दक्षिण दिशा में यम का दीपक जलाना है.
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जिस घर में पितृ खुश होते हैं उस घर में पैसा आता है. ऐसे में यम का दीपक हर शाम को जरूर जलाना चाहिए. पितृ खुश रहेंगे तो पैसा भी आएगा और बिगड़े हुए काम भी बनेंगे.
स्नान के बाद क्या करें
मौन व्रत और जाप- स्नान के बाद कम से कम बोलें और मन ही मन भगवान का स्मरण करें.
सूर्य देव की आराधना- जल में काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्पित करें.
पितृ तर्पण- उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल और जौ से देव तर्पण करें, फिर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल, जल और कास या सफेद फूलों से पितरों का तर्पण करें.
दान- अन्न, तिल, गुड़, वस्त्र या धन का दान करें.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं