रामायण और पौराणिक कथाओं में भगवान हनुमान की भक्ति, शक्ति और श्रीराम के प्रति समर्पण के अनेक प्रसंग मिलते हैं. इन्हीं में एक रोचक कथा यह भी है कि एक बार माता सीता के बनाए 56 भोग भी हनुमान जी की भूख शांत नहीं कर सके. आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक छोटे से तुलसी के पत्ते ने वह चमत्कार कर दिया, जो कई व्यंजन भी नहीं कर पाए. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने इस प्रसंग का धार्मिक महत्व बताया, आइए आज मंगलवार को जानें क्या है वो प्रसंग...
जब 56 भोग भी पड़ गए कम
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी अयोध्या लौटे. एक दिन माता सीता ने प्रेमपूर्वक हनुमान जी को भोजन के लिए आमंत्रित किया और उनके लिए छप्पन भोग सहित अनेक स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए. लेकिन हनुमान जी खाते गए और भोजन समाप्त होता गया, फिर भी उनकी भूख शांत नहीं हुई.
माता सीता की बढ़ी चिंता
कथा के अनुसार, माता सीता ने बार-बार भोजन बनाकर परोसा, लेकिन हनुमान जी की भूख खत्म नहीं हुई. महल के अन्न भंडार भी खाली होने लगे. तब माता सीता ने भगवान श्रीराम से इसका कारण और समाधान पूछा.
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तुलसी के एक पत्ते ने कर दिया चमत्कार
पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि भगवान श्रीराम ने माता सीता से तुलसी का एक पत्ता लेने और उस पर प्रेमपूर्वक 'राम' नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करने के लिए कहा. जैसे ही हनुमान जी ने वह तुलसी पत्र ग्रहण किया, उनकी भूख तुरंत शांत हो गई और उन्हें पूर्ण तृप्ति का अनुभव हुआ.
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क्यों प्रिय है तुलसी?
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी के लिए भोजन से अधिक श्रीराम का नाम प्रिय है. इसलिए तुलसी पर लिखा 'राम' नाम उनके लिए सबसे बड़ा प्रसाद बन गया. इसी कारण आज भी कई भक्त हनुमान जी को भोग के साथ तुलसी पत्र अर्पित करते हैं. हालांकि, यह कथा धार्मिक परंपराओं और आस्था पर आधारित है.
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