विज्ञापन

Pauranik Katha: हनुमान जी को तुलसी क्यों चढ़ाई जाती है? इसके पीछे की कथा शायद ही जानते होंगे आप

Significance of Tulsi for Hanuman Ji: पौराणिक कथा में 56 भोग भी हनुमान जी की भूख शांत नहीं कर सके. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय से आइए जानते हैं कैसे तुलसी पर लिखा 'राम' नाम उन्हें तुरंत तृप्त कर गया. यहीं वजह है कि अब हनुमान जी को तुलसी चढ़ाई जाती है.

Pauranik Katha: हनुमान जी को तुलसी क्यों चढ़ाई जाती है? इसके पीछे की कथा शायद ही जानते होंगे आप
हनुमान जी को इसलिए प्रिय है तुलसी
ndtv

रामायण और पौराणिक कथाओं में भगवान हनुमान की भक्ति, शक्ति और श्रीराम के प्रति समर्पण के अनेक प्रसंग मिलते हैं. इन्हीं में एक रोचक कथा यह भी है कि एक बार माता सीता के बनाए 56 भोग भी हनुमान जी की भूख शांत नहीं कर सके. आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक छोटे से तुलसी के पत्ते ने वह चमत्कार कर दिया, जो कई व्यंजन भी नहीं कर पाए. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने इस प्रसंग का धार्मिक महत्व बताया, आइए आज मंगलवार को जानें क्या है वो प्रसंग...

जब 56 भोग भी पड़ गए कम

ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी अयोध्या लौटे. एक दिन माता सीता ने प्रेमपूर्वक हनुमान जी को भोजन के लिए आमंत्रित किया और उनके लिए छप्पन भोग सहित अनेक स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए. लेकिन हनुमान जी खाते गए और भोजन समाप्त होता गया, फिर भी उनकी भूख शांत नहीं हुई.

माता सीता की बढ़ी चिंता

कथा के अनुसार, माता सीता ने बार-बार भोजन बनाकर परोसा, लेकिन हनुमान जी की भूख खत्म नहीं हुई. महल के अन्न भंडार भी खाली होने लगे. तब माता सीता ने भगवान श्रीराम से इसका कारण और समाधान पूछा.

यह भी पढ़ें: Ashadha Amavasya 2026: पितरों की कृपा और अमावस्या का पुण्यफल पाने के लिए आज क्या करें और क्या न करें?

तुलसी के एक पत्ते ने कर दिया चमत्कार

पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि भगवान श्रीराम ने माता सीता से तुलसी का एक पत्ता लेने और उस पर प्रेमपूर्वक 'राम' नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करने के लिए कहा. जैसे ही हनुमान जी ने वह तुलसी पत्र ग्रहण किया, उनकी भूख तुरंत शांत हो गई और उन्हें पूर्ण तृप्ति का अनुभव हुआ.

यह भी पढ़ें:  आषाढ़ अमावस्या को क्यों कहा जाता है हलहारिणी अमावस्या? ज्योतिषाचार्य से जानिए इसका महत्व

क्यों प्रिय है तुलसी?

उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी के लिए भोजन से अधिक श्रीराम का नाम प्रिय है. इसलिए तुलसी पर लिखा 'राम' नाम उनके लिए सबसे बड़ा प्रसाद बन गया. इसी कारण आज भी कई भक्त हनुमान जी को भोग के साथ तुलसी पत्र अर्पित करते हैं. हालांकि, यह कथा धार्मिक परंपराओं और आस्था पर आधारित है.

यह भी पढ़ें: What is failure: असफलता अंत नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है, जानें इससे जुड़ी बड़ी सीख

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Hanuman, Mythological, Tulsi Leaf, Tulsi Leaf Astro Tips
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com