विज्ञापन

What is failure: असफलता अंत नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है, जानें इससे जुड़ी बड़ी सीख

Failure is not the end: असफलता क्या होती है? जीवन में असफलता के क्या मायने हैं? इससे इंसान को आखिर क्या सीखना चाहिए? जिस असफलता को लोग अक्सर अंत मान लेते हैं, वह आखिर जीवन में आगे बढ़ने की शुरुआत कैसे होती है, विस्तार से बता रहे हैं महामंडलेश्वर स्वामी श्री चिदंबरानंद सरस्वती जी महाराज.

What is failure: असफलता अंत नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है, जानें इससे जुड़ी बड़ी सीख
Asafalta kya hai: असफलता को सफलता में कैसे बदलें?
NDTV

How turn failure into success: एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक साधारण लड़का रहता था. उसके पिता किसान थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. आरव बचपन से ही कुछ अलग करना चाहता था. वह पढ़-लिखकर अपने गाँव और परिवार का नाम रोशन करना चाहता था. लेकिन उसके रास्ते में कठिनाइयाँ ही कठिनाइयाँ थीं. जब वह पहली बार परीक्षा में बैठा, तो असफल हो गया. गाँव के लोग हँसने लगे और कुछ ने तो यह भी कह दिया कि 'यह लड़का कुछ नहीं कर पाएगा.' आरव को दुख हुआ, लेकिन उसने हार नहीं मानी. उसने मन ही मन ठान लिया कि चाहे कितनी भी बार गिरना पड़े, वह उठता रहेगा.

कठिन हालात में भी न मानें हार

दूसरी बार उसने और मेहनत की, फिर भी परिणाम वही रहा-असफलता. यह सिलसिला चलता रहा. हर बार नई उम्मीद, नई तैयारी और फिर असफलता. कई बार तो उसकी असफलताओं की संख्या सैकड़ों में पहुँच गई. मित्र उसका साथ छोड़ते गए, रिश्तेदार ताने देने लगे और परिस्थितियाँ और भी कठिन हो गईं. कई बार तो आरव खुद से पूछता-'क्या मैं सच में आगे बढ़ सकता हूँ?' लेकिन हर बार उसके भीतर की आवाज़ कहती-'कोशिश छोड़ना ही असली हार है.'

कमजोरी को ताकत में बदलें

आरव ने अपनी असफलताओं को शिक्षक बना लिया. वह हर बार यह समझने की कोशिश करता कि कहाँ कमी रह गई. धीरे-धीरे उसकी सोच, उसका आत्मविश्वास और उसका ज्ञान बढ़ने लगा. असफलताओं ने उसे मजबूत बना दिया. अब वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी सफल होना चाहता था जो हार मान चुके थे.

तब मिलता है आगे बढ़ने का अवसर

हजारवीं बार जब वह फिर एक कठिन परीक्षा में बैठा, तो इस बार परिणाम अलग था. वह सफल हो गया. उसकी सफलता केवल अंकपत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके संघर्ष की जीत थी. वही लोग जो कभी उसका मज़ाक उड़ाते थे, आज उसकी प्रशंसा करने लगे. आरव यहीं नहीं रुका. उसने अपने गाँव में बच्चों के लिए एक निःशुल्क अध्ययन केंद्र खोला, जहाँ वह उन्हें यह सिखाता कि असफलता अंत नहीं, बल्कि शुरुआत होती है. वह बच्चों को अपनी कहानी सुनाता और कहता-'अगर मैं हजार बार गिरकर भी खड़ा हो सकता हूँ, तो तुम भी कर सकते हो.'

Sant Ki Seekh: कर्म और फल के बीच का सेतु है प्रतीक्षा, जानें यह कब बन जाती है वरदान

समय के साथ आरव समाज में एक आदर्श बन गया. लोग उसे केवल उसकी सफलता के लिए नहीं, बल्कि उसकी हिम्मत, धैर्य और सकारात्मक सोच के लिए सम्मान देने लगे. उसकी कहानी यह सिखाती है कि जो व्यक्ति हजार बार असफल होने पर भी हिम्मत नहीं हारता, वही अंततः समाज को सही दिशा दिखाने वाला आदर्श बनता है. असफलता से डरने वाला व्यक्ति पीछे रह जाता है, लेकिन असफलता को स्वीकार कर उससे सीखने वाला व्यक्ति न केवल स्वयं सफल होता है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बनता है.
 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Success, Failure, Success And Failure, Sant Ki Seekh, Success In Life
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com