देश में सरकारी गोदामों में जमा किए जानेवाले अनाज के भंडार की बर्बादी एक बड़ी समस्या रही है. इस संबंध में केंद्र सरकार ने अब विस्तार से जानकारी दी है जिससे पूरी तस्वीर साफ हो जाती है. लोकसभा में राजस्थान से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल और उत्तर प्रदेश के सांसद चंद्रशेखर ने इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा था. दोनों सांसदों की तरफ से पूछे गए अतारांकित सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने कहा कि FCI यानी भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में खराब, जर्जर या अपर्याप्त भंडारण व्यवस्था के कारण सेंट्रल पूल के गेहूं और चावल के भंडार का कोई नुकसान नहीं हुआ है. सरकार के अनुसार, पिछले वर्षों में जो भी खाद्यान्न का खराबा हुआ, वह चक्रवात, बाढ़ और ज्यादा बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुआ. सरकार ने साथ ही बताया कि इस बार राजस्थान में सबसे ज्यादा खराबा हुआ है. पिछले पांच साल के आंकड़े में पंजाब टॉप पर है. वहीं सिक्किम और त्रिपुरा में कोई नुकसान नहीं हुआ है. सरकार ने यह भी बताया कि अनाजों के खराब होने के मामले में 18 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
भारत सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया ने बुधवार, 29 जुलाई को लोकसभा में बताया कि FCI कल्याणकारी योजनाओं और बफर स्टॉक के लिए बड़ी मात्रा में खाद्यान्न का भंडारण करता है. पिछले पांच वर्षों में क्षतिग्रस्त खाद्यान्न का राज्यवार एवं वर्षवार ब्यौरा भी संसद में रखा गया.

खाद्यान्न उत्पादन से ज्यादा बड़ी चुनौती उसका भंडारण हो गई है
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5 साल में 3,456 मीट्रिक टन अनाज खराब
पिछले 5 साल में पूरे देश में FCI गोदामों में खराब अनाज की स्थिति देखी जाए तो साल 2021-22 में 3,456 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ जिसकी कीमत 2.5 करोड़ रुपए आंकी जा रही है. साल 2022-23 में ढाई करोड़ का 2,922 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ. साल 2023-24 में यह आंकड़ा 18,262 मीट्रिक टन अनाज पर पहुंच गया.
साल 2024-25 में 14,055 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ. जबकि साल 2025-26 में 3,063 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ. कुल 5 साल में 36 करोड़ से ज्यादा का 41,758 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ.

प्राकृतिक आपदा से सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ
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सबसे ज्यादा नुकसान वाले राज्य
सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु में हुआ जबकि सिक्किम और त्रिपुरा में ज़ीरो खराबा हुआ. सिक्किम और त्रिपुरा में पिछले 5 साल में एक किलोग्राम भी अनाज का खराबा नहीं हुआ.
पंजाब में पांच साल में कुल 8,237 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ. अकेले 2023-24 में 7,746 मीट्रिक टन खराबा हुआ. तमिलनाडु में 3,123 और हरियाणा में 2,676 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ. इन तीनों राज्यों में ही देश के कुल नुकसान का करीब 34% खराबा रहा.
राजस्थान में बिगड़ा पिछले पांच साल का रिकॉर्ड
राजस्थान के FCI गोदामों में खराब अनाज हुए अनाज की पिछले 5 साल की स्थिति देखें तो 2021-22 में 63 मीट्रिक टन, 2022-23 में 136 मीट्रिक टन, 2023-24 में 6 मीट्रिक टन, 2024-25 में एक मीट्रिक टनअनाज खराब हुआ. लेकिन पिछले चार साल के रिकॉर्ड का सबसे ज्यादा बिगाड़ा साल 2025-26 में हुआ जब प्रदेश के FCI गोदामों में 2089 मीट्रिक टन अनाज बारिश और दूसरी आपदाओं के कारण खराब हो गया.

सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब में हुआ
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जांच और कार्रवाई
सरकार ने यह भी बताया कि खाद्यान्न के क्षतिग्रस्त होने के प्रत्येक मामले की संभागीय, क्षेत्रीय और आंचलिक स्तर पर गठित तीन-स्तरीय समिति द्वारा जांच की जाती है. जांच के आधार परपिछले पांच साल में 18 कर्मचारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. भंडारण व्यवस्था को और ज्यादा वैज्ञानिक एवं आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत स्टील स्टोरेज कैपेसिटी का निर्माण करा रही है.
भंडारों का हो रहा निर्माण
सरकार के मुताबिक 76 जगह पर 39 लाख मीट्रिक टन क्षमता के स्टोरेज हाउस पूरे हो चुके हैं, जबकि 59 स्थानों पर 25.625 लाख मीट्रिक टन क्षमता के भंडार निर्माणाधीन हैं. इसके अलावा हब एंड स्पोक फेज-II के तहत 54 स्थानों पर 25.125 लाख मीट्रिक टन क्षमता के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं. इसके साथ ही 48 स्थानों पर 21.25 लाख मीट्रिक टन क्षमता के लिए रियायत समझौते संपन्न हो चुके हैं. सरकार का कहना है कि आधुनिक भंडारण क्षमता बढ़ाने से खाद्यान्न संरक्षण व्यवस्था और ज्यादा मजबूत होगी तथा भविष्य में नुकसान की संभावनाएं और कम होंगी.
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