Janmashtami 2026: कृष्ण जन्माष्टमी देशभर में उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई जाती है. इस साल 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी. जन्माष्टमी के मौके पर भक्त व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. अगर, आप भी कृष्ण जन्माष्टमी की व्रत रख रहे हैं तो भूलकर भी ये 7 गलतियां नहीं करनी चाहिए. चलिए आपको बताते हैं जन्माष्टमी के व्रत और पूजा के दौरान क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए.
व्रत समय से पहले न खोलें
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले कई लोग यह गलती कर देते हैं कि रात 12 बजे होते ही व्रत खोल लेते हैं. हालांकि, व्रत का पारण आपकी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मंदिर की मान्यता के अनुसार किया जाना चाहिए. आजकल कई भक्त निशीथ काल की पूजा पूरी होने के बाद व्रत खोलते हैं. इसलिए किसी भी तय समय को बिना जानकारी के न अपनाएं. अपने घर की परंपरा या मंदिर के नियमों के अनुसार ही व्रत का पारण करें. इससे व्रत की मर्यादा और भक्ति दोनों बनी रहती हैं.
निशीथ काल की पूजा का समय न चूकें
भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी पर निशीथ काल की पूजा का विशेष महत्व होता है. साल 2026 में दिल्ली और नोएडा में निशीथ मुहूर्त लगभग रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा. पूजा के समय जल्दबाजी से बचने के लिए मंदिर की सजावट, लड्डू गोपाल का श्रृंगार और भोग की तैयारी पहले ही कर लें. इससे आप पूजा के समय में पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भगवान कृष्ण की आराधना कर सकेंगे.
व्रत को शरीर पर बोझ न बनाएं
जन्माष्टमी का व्रत भक्ति और आत्मसंयम के लिए रखा जाता है, खुद को तकलीफ देने के लिए नहीं. इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है. अगर आप बुजुर्ग हैं, गर्भवती हैं, किसी बीमारी से पीड़ित हैं या नियमित दवाइयां लेते हैं, तो कठोर निर्जला व्रत रखने से बचें. अपनी सेहत और परंपरा के अनुसार फल, दूध, पानी या व्रत में खाए जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं.
व्रत के दौरान अनाज वाले भोजन का सेवन न करें
जन्माष्टमी व्रत की कई परंपराओं में अनाज और सामान्य भोजन खाने की मनाही होती है. इस दौरान लोग फल, दूध, मेवे और व्रत में खाए जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं. भगवान कृष्ण के लिए भोग भी अपने घर की परंपरा और मान्यताओं के अनुसार तैयार करें. व्रत के नियमों का पालन करने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है.
गुस्सा, चुगली और बहस से बचें
सिर्फ भोजन का त्याग करना ही व्रत नहीं होता, बल्कि मन को भी शांत और सकारात्मक रखना जरूरी है. अगर व्रत रखते हुए आप गुस्सा करते हैं, दूसरों की बुराई करते हैं या बेवजह बहस में पड़ते हैं, तो व्रत का आध्यात्मिक उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता. जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद करने का पर्व है. इसलिए इस दिन ईर्ष्या, कटु बातें और विवादों से दूर रहें. भजन, मंत्र जाप और प्रार्थना में मन लगाएं.
लड्डू गोपाल की पूजा जल्दबाजी में न करें
भगवान की पूजा केवल एक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए. इसे पूरे मन और श्रद्धा के साथ करना चाहिए. अगर, आपकी परंपरा में कृष्ण अभिषेक किया जाता है, तो आराम से लड्डू गोपाल का श्रृंगार करें, फूल अर्पित करें, दीपक जलाएं, भोग लगाएं और आरती करें. थोड़े समय की एकाग्र और भावपूर्ण पूजा, बिना मन के लंबे अनुष्ठान से कहीं अधिक श्रेष्ठ मानी जाती है.
भोग लगाए बिना भोजन न करें
जन्माष्टमी पर जो भी भोजन या प्रसाद बनाया जाए, उसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करना चाहिए. इसके बाद ही उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. इस पावन दिन पर व्रत, पूजा और भोग से जुड़े नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करें और पूरे मन से भगवान कृष्ण की आराधना करें. यही जन्माष्टमी के व्रत और उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है.
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