हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व माना जाता है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है. आज यानी 24 सितंबर को भाद्रपद महीने का दूसरा और आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. ऐसे में भक्त सुबह से ही शिव भक्ति में लीन हैं. प्रदोष व्रत के दौरान भक्त सच्ची श्रद्धा से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं, पूजा का समापन आरती के साथ किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कोई भी पूजा आरती के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती है. ऐसे में अगर आप भी आज प्रदोष व्रत रखने वाले हैं, तो यहां से भगवान शिव की संपूर्ण आरती पढ़कर अपनी पूजा को संपन्न कर सकते हैं.
यहां पढ़ें भगवान शिव की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी.
ॐ जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता,
जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥
ॐ जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा.
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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