सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. यह समय पूर्वजों के लिए समर्पित होता है. 26 अक्तूबर से पितृपक्ष शुरू हो चुका है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा. पितृपक्ष के 16 दिनों की अवधि के दौरान लोगों द्वारा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं. इसे सोलह श्राद्ध, श्राद्ध पक्ष, महालय पक्ष आदि नामों से भी जाना जाता है. मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से लोगों को पितृ दोष और पूर्वजों के ऋण से मुक्ति मिलती है. इस दौरान पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है, लेकिन अगर आप घर से दूर हैं तो श्राद्ध कैसे निकालना चाहिए. चलिए आपको बताते हैं घर से दूर हैं तो श्राद्ध कैसे करें.
घर से दूर हैं तो श्राद्ध कैसे करें
पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं. इन 16 दिनों के दौरान परिवार का पूरा ध्यान और एनर्जी पूर्वजों को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद और पितृ-ऋण से मुक्ति पाने पर होता है. अगर, घर से दूर रहने वाले कई लोग पितृपक्ष के दौरान अपने पैतृक स्थान पर नहीं पहुंच पाते. काम या किसी अन्य सिलसिले में घर से दूर रहते हैं, लेकिन अपने पूर्वजों के पति गहरी श्रद्धा और भाव रखते हैं. उनकी आत्मा की शांति, मोक्ष और आशीर्वाद के लिए श्राद्ध औ तर्पण करना चाहते हैं तो कुछ उपायों को करके पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ पितृदोष और ऋृण से मुक्ति पा सकते हैं.
पशु-पक्षियों को भोजन खिलाएं
पितृपक्ष में अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराने की परंपरा है, लेकिन वक्त के साथ बदलती चीजों के चलते हर किसी के लिए ऐसा करना संभव नहीं हो पाता है. वे अपने पैतृक स्थान पर जाकर इन कामों को पूरा नहीं कर सकते हैं. ऐसे में घर से दूर रह रहे जो लोग पितृपक्ष में पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं, वे 16 दिनों की अवधि के दौरान प्रतिदिन पशु-पक्षियों को भोजन खिलाएं. इसके लिए वे अपने घर की छत या बालकनी में पक्षियों के लिए अनाज और पानी रख सकते हैं. पशुओं को रोटी या फिर फल खिला सकते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान गौ सेवा का विशेष महत्व है. ऐसे में अगर आपके आस-पास कोई गोशाला है, तो वहां जाकर गायों की सेवा करें. उन्हें चारा या रोटी खिलाएं. पितरों की स्मृति को लंबे समय तक जीवित रखने के लिए आप पूर्वजों के नाम पर पेड़ लगा सकते हैं. इसी के साथ उसकी नियमित सेवा और देखरेख करते रहें. इसके अलावा पितृपक्ष के समय गरीबों की मदद करना, जरूरतमंदों की सहायता करना भी अच्छा माना जाता है.
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