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Hariyali Teej Vrat Katha: 108 जन्मों की तपस्या के बाद कैसे मिला माता पार्वती को शिव का वरदान, हरियाली तीज पर जरूर पढ़ें ये कथा

Hariyali Teej Katha: पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक अत्यंत कठोर तपस्या की थी. हरियाली तीज पर ही शिवजी ने माता की सच्ची भक्ति और तप से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था.

Hariyali Teej Vrat Katha: 108 जन्मों की तपस्या के बाद कैसे मिला माता पार्वती को शिव का वरदान, हरियाली तीज पर जरूर पढ़ें ये कथा
हरियाली तीज कथा
file photo

Hariyali Teej 2026: हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है. यह त्योहार माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती मिले थे. शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती सैकड़ों वर्षों की तपस्या के बाद भगवान शिव से मिली थीं. इसी कारण, देवी पार्वती को 'तीज माता' के रूप में भी जाना जाता है. इस साल तीज का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा. हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की पावन कथा जरूर पढ़ें.

हरियाली तीज कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक अत्यंत कठोर तपस्या की थी. सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी हरियाली तीज पर ही शिवजी ने माता की सच्ची भक्ति और तप से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. माता पार्वती ने बाल्यावस्था से ही शिव को पाने का संकल्प लिया था, जिसके लिए उन्होंने 107 जन्मों तक कठिन तप किया, परंतु भोलेनाथ की प्राप्ति 108वें जन्म में हुई. 108वें जन्म में माता पार्वती ने अन्न-जल त्यागकर वनों और कंदराओं में कंद-मूल खाकर या केवल हवा के सहारे सहस्रों वर्षों तक तप किया.

हरियाली तीज पूजन सामग्री

  • श्रृंगार का सामान- सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, महावर, काजल और आभूषण
  • भगवान के लिए वस्त्र- माता पार्वती के लिए चुनरी और भगवान शिव के लिए वस्त्र
  • प्राकृतिक वस्तुएं- गीली काली मिट्टी या बालू (शिव-पार्वती मूर्ति हेतु), बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, और केले का पत्ता
  • भोग सामग्री- पंचामृत, मौसमी फल और ठेकुआ या घेवर जैसी मिठाइयां

हरियाली तीज व्रत का महत्व

सुहागिन महिलाएं इस दिन अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी उम्र के लिए निर्जल व्रत रखती हैं. इस दिन माता पार्वती को 'तीज माता' के रूप में पूजा जाता है तथा झूला झूलने और हरियाली उत्सव मनाने की पुरानी परंपरा है.

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