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मायके से आने वाले 'सिंधारा' की क्या है कहानी, जानिए तीज पर घेवर का महत्व

हरियाली तीज से एक दिन पहले सिंधारा दूज मायके से बेटी के लिए 'सिंधारा' भेजने की परंपरा है. इसमें वस्त्र, मेहंदी, श्रृंगार का सामान और खास तौर पर घेवर भेजा जाता है, जो इस बात का संदेश है कि मायके का प्रेम बेटी के साथ हमेशा बना रहता है.

मायके से आने वाले 'सिंधारा' की क्या है कहानी, जानिए तीज पर घेवर का महत्व
सिंधारा क्यों दिया जाता है?
file photo

सावन का महीना आते ही मंदिरों और मोहल्लों में गूंजते भोलेनाथ के जयकारे, हरियाली तीज की तैयारियां और बारिश की फुहारें माहौल को एकदम अलग ही बना देती हैं, लेकिन इस पावन महीने की एक और खास पहचान है, जिसका इंतजार खाने-पीने के शौकीन बेसब्री से करते हैं और वह घेवर है. घेवर सावन और तीज के त्योहारों का अहम हिस्सा माना जाता है. इसके साथ ही सावन के महीने में हरियाली तीज से एक दिन पहले सिंधारा दूज मायके से बेटी के लिए 'सिंधारा' भेजने की परंपरा है. इसमें वस्त्र, मेहंदी, श्रृंगार का सामान और खास तौर पर घेवर भेजा जाता है, जो इस बात का संदेश है कि मायके का प्रेम बेटी के साथ हमेशा बना रहता है.

सिंधारा की कहानी

सिंधारा एक पारंपरिक उपहार है, जो हरियाली तीज के अवसर पर विवाहित स्त्रियों को उनके मायके से दिया जाता है. ऐसा माना जाता है कि विवाहित स्त्री को श्रृंगार देना विवाहोत्तर समय में पुण्य कर्म माना जाता है. मनुस्मृति में भी यह वर्णन मिलता है कि विवाहोपरांत पुत्री को समय-समय पर आभूषण, वस्त्र आदि भेजना माता-पिता का कर्तव्य माना गया है. 'सिंधारा' शब्द संस्कृत के 'श्रृंगार' शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है महिलाओं का सजने-सवरना. यह मायके पक्ष की ओर से बेटी को दिया जाने वाला लाड-प्यार और आशीर्वाद है.

सावन का महीना आते ही चारों तरफ हरियाली, झूले, लोकगीत और तीज की रौनक दिखाई देने लगती है. तीज के अवसर पर मायके से बेटी के ससुराल भेजे जाने वाले 'सिंधारा' की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है. सिंधारे में कपड़े, श्रृंगार का सामान, मेहंदी, मिठाइयां और खास तौर पर घेवर भेजा जाता है. यही वजह है कि तीज का त्योहार और घेवर एक-दूसरे के बिना अधूरे माने जाते हैं. राजस्थान से लेकर हरियाणा, दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में तीज के दौरान घेवर खाने और बांटने की खास परंपरा है.

तीज पर घेवर का महत्व

पारंपरिक मिठास- घेवर सावन और तीज के त्योहार की सबसे मुख्य और पारंपरिक मिठाई है.

मौसम के अनुकूल- आयुर्वेद के अनुसार सावन की उमस और मानसूनी हवाओं में देसी घी से बना घेवर शरीर को भीतर से पोषण और ऊर्जा देता है.

मधुरता का संदेश- यह मायके और ससुराल के रिश्तों में मिठास और जीवन में सुख-समृद्धि आने का प्रतीक माना जाता है.

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