गणेश चतुर्थी पर घर-घर गणपति बप्पा की स्थापना होती है. कोई डेढ़ दिन तो कोई 3, 5, 7 या पूरे 10 दिन तक गणेश जी को घर में रखता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणपति स्थापना के लिए 10 दिनों की परंपरा क्यों बनी. पंडित कौशल पाण्डेय ने बताया कि इसके पीछे महाभारत से जुड़ी एक रोचक पौराणिक मान्यता है.
महाभारत लिखने के लिए गणेश जी ने संभाली थी लेखनी
पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की थी, लेकिन इसे लिखने के लिए उन्हें ऐसे लेखक की जरूरत थी जो लगातार लेखन कर सके. इसके लिए उन्होंने भगवान गणेश की आराधना की. गणपति जी ने महाभारत लिखने का कार्य स्वीकार कर लिया और दिन-रात लेखन शुरू किया.
वेदव्यास ने गणेश जी के शरीर पर लगाया मिट्टी का लेप
उन्होंने बताया कि ऐसा कहा जाता है कि लगातार लिखने से गणेश जी के शरीर का तापमान न बढ़े और उन्हें थकान न हो, इसके लिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप लगाया. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू हुआा लेखन कार्य करीब 10 दिनों तक चलता रहा.
अनंत चतुर्दशी पर हुआ लेखन पूरा
दसवें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर महाभारत का लेखन पूरा हुआ. तब वेदव्यास ने देखा कि गणेश जी का शरीर काफी तप रहा है और मिट्टी का लेप सूखकर झड़ने लगा है. उन्हें ठंडक देने के लिए वेदव्यास ने गणेश जी को पवित्र जल में स्नान कराया. धार्मिक मान्यता में इसी प्रसंग को गणपति स्थापना और विसर्जन की 10 दिन की परंपरा से जोड़ा जाताा है.
गणेश जी को तुलसी नहीं दूर्वा चढ़ाएं
पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि गणेश जी की पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है. तीन या पांच पत्तियों वाली दूर्वा को शुभ माना जाता है. वहीं गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए. पूजा के दौरान रोली, चंदन, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित किए जाा सकते हैं. इस वर्ष गणेश स्थापना 14 सितंबर 2026 को होगी. स्थापना का शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है. मुख्य विसर्जन अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर को किया जाएगा. उन्होंने पर्यावरण और मूर्ति के सम्मान को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
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