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गणेश चतुर्थी पर 50 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान, बप्‍पा की मूर्ति से फल-फूल और प्रसाद तक करोड़ों खर्च करेंगे लोग

Business on Ganesh Chaturthi 2026: साल 2024 में गणेशोत्सव पर 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का अनुमान लगाया गया था, जबकि 2025 में 40 हजार करोड़ रुपये का. कैट का अनुमान और क्‍या कहता है?

10 दिन के गणेश महोत्‍सव के दौरान 50,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

Ganesh Chaturthi 2026: आज गणेश चतुर्थी से शुरू हो रहे दस दिवसीय गणेशोत्सव की धूम देश भर में दिखाई दे रही है. इस मौके पर 50 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान जताया गया है. CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार, पिछले साल की तुलना में ये 10,000 करोड़ ज्‍यादा है. 

आज से प्रारंभ हुआ यह त्यौहार आगामी 25 सितंबर को गणेश विसर्जन से संपन्न होगा. देश भर में करोड़ों लोग अपने घरों में गणेश जी की स्थापना करते है और अपनी सामर्थ्य अनुसार 1 दिन, 3,दिन, 5 दिन या 10 दिन तक गणेश का प्रतिदिन विशेष पूजन करते हैं. देश के विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक स्थानों पर लाखों छोटे बड़े पंडाल लगाकर गणेश की मूर्ति की स्थापना भी की जाती है और प्रतिदिन गणेश का गुण गान होता है . गणेश के दर्शन हेतु करोड़ों लोग पंडालों में आते है. 

ये 10 दिवसीय गणेशोत्सव आस्था के साथ साथ व्यापार के भी बड़े अवसर प्रदान करता है जिसमें खास तौर पर छोटे छोटे कारीगर, मूर्तिकार, कलाकारों, शिल्पकारों, बुनकरों, फूल उत्पादकों और हस्तशिल्प उद्योग के साथ पंडाल लगाने वाले लोगों को बड़ा और व्यापक व्यापार मिलता है वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलता है. इसकी खास बात यह है कि इससे ‘मेक इन इंडिया' और ‘लोकल फॉर ग्लोबल' के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को भी मजबूती मिल रही है.

कैट के अधिकारी बोले- वोकल फॉर लोकल का असर 

चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल' और ‘आत्मनिर्भर भारत' के आह्वान का प्रभाव इस वर्ष गणेशोत्सव के बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. देशभर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर उपयोग होने वाली अधिकांश प्रतिमाएं, सजावटी सामग्री, पूजा सामग्री, प्रकाश व्यवस्था, हस्तशिल्प उत्पाद, वस्त्र और उपहार पूर्णतः स्वदेशी हैं और व्यापारियों और उपभोक्ताओं ने बड़ी संख्या में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दी है.

2024 में 30 हजार करोड़, 2025 में 40 हजार करोड़ का कारोबार 

खंडेलवाल ने बताया कि कैट द्वारा देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारिक संगठनों, बाजारों और अन्य लोगों से बातचीत के अनुसार इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान ₹50,000 करोड़ से अधिक के व्यापार होने का अनुमान है. वर्ष 2024 में यह आंकड़ा लगभग ₹30,000 करोड़ था, जबकि 2025 में यह बढ़कर ₹30,000 से ₹40,000 करोड़ के बीच पहुंचा. इस वर्ष उपभोक्ता खर्च में वृद्धि, सामुदायिक आयोजनों के विस्तार, बड़े पंडालों, पर्यटन, आयोजन प्रबंधन और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण यह आंकड़ा ₹50,000 करोड़ से अधिक रहने की संभावना है.

खंडेलवाल ने कहा कि गणेश चतुर्थी अब केवल धार्मिक आस्था और भक्ति का पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था'की शक्ति, व्यापकता और जीवंतता का एक बड़ा उदाहरण बन चुका है. यह पर्व करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आय उपलब्ध कराता है और देश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करता है.

यूपी-एमपी से महाराष्‍ट्र तक किन चीजों पर खर्च करते हैं लोग? 

खंडेलवाल ने बताया कि इस अनुमान में विभिन्न क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है. गणेश प्रतिमाओं का कारोबार, पंडाल निर्माण, सजावट और प्रकाश व्यवस्था, फूलों, पूजा सामग्री और प्रसाद, मिठाइयों, ड्राई फ्रूट, फल, खाद्य पदार्थों और कैटरिंग सेवायें,वस्त्र, उपहार और उपभोक्ता वस्तुओं, पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र,इवेंट मैनेजमेंट, विज्ञापन और प्रायोजन गतिविधियों और अन्य स्थानीय वस्तुओं और  सेवाओं को बड़ा व्यापार मिलता है. 

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक,दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और देश के प्रमुख महानगरों में गणेशोत्सव विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है. इन राज्यों में लाखों मूर्तिकार, फूल विक्रेता, मिठाई निर्माता, सजावट विशेषज्ञ, बांस और कपड़ा उद्योग, ध्वनि और प्रकाश तकनीशियन, टेंट हाउस संचालक, परिवहन सेवाएं, छोटे व्यापारी और असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिक इस पर्व से अपनी आजीविका अर्जित करते हैं.

गणपति पंडालों में दिख रही समृद्ध संस्‍कृति 

खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष गणेशोत्सव में पर्यावरण-अनुकूल और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पंडालों की विशेष मांग देखी जा रही है. केले के पत्तों, गेंदे के फूलों, प्राकृतिक कपड़ों, मिट्टी के दीपकों, बांस और हस्तनिर्मित सामग्री से सजे इको-फ्रेंडली मंडप सबसे लोकप्रिय हैं. इसके अतिरिक्त अयोध्या राम मंदिर थीम, पंचतत्व थीम, भारतीय सांस्कृतिक विरासत थीम, महाराष्ट्र की पारंपरिक शैली, मंदिर वास्तुकला आधारित थीम, मोर और कमल सज्जा, ग्रामीण भारत थीम और ‘वोकल फॉर लोकल' थीम वाले पंडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

खंडेलवाल ने कहा कि रक्षाबंधन से आरंभ हुआ देश का त्योहारी व्यापारिक मौसम अब गणेशोत्सव, नवरात्र, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ, दीपावली, छठ पूजा और उसके बाद आने वाले विशाल विवाह सीजन तक लगातार जारी रहेगा. यह संपूर्ण उत्सवी श्रृंखला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े विकास इंजन का कार्य करेगी.

उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी केवल श्रद्धा और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था' का एक सशक्त प्रतीक है. इस वर्ष यह पर्व देशभर में ₹50,000 करोड़ से अधिक की आर्थिक गतिविधियों को जन्म देगा, जिससे करोड़ों व्यापारी, कारीगर, एमएसएमई, सेवा प्रदाता, महिला उद्यमी, स्वरोजगार से जुड़े लोग और श्रमिक वर्ग लाभान्वित होंगे. यह उत्सव भारत की सांस्कृतिक शक्ति के साथ-साथ उसकी आर्थिक क्षमता का भी भव्य प्रदर्शन है.

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