विज्ञापन

Janmashtami Vrat Katha: कमल के फूलों से बदल गई किस्मत, जन्माष्टमी पर जरूर पढ़ें राजा हरिश्चंद्र की ये कथा, मिलेगा पुण्य फल

Janmashtami Vrat Katha: जन्माष्टमी व्रत कथा में राजा हरिश्चंद्र के पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों का वर्णन है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि कथा का पाठ श्रद्धालुओं को पुण्य फल देता है. राजा को वर्तमान जीवन में अपार धन-संपत्ति, वैभव और राजसी सुख प्राप्त था. लेकिन राजा खुद भी सोचते थे कि आखिर उन्हें इतना सुख किस कर्म के कारण मिला है.

Janmashtami Vrat Katha: कमल के फूलों से बदल गई किस्मत, जन्माष्टमी पर जरूर पढ़ें राजा हरिश्चंद्र की ये कथा, मिलेगा पुण्य फल
जन्माष्टमी व्रत कथा में राजा हरिश्चंद्र के पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों का वर्णन
ndtv

जन्माष्टमी का त्योहार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाता है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और रात में बाल गोपाल की पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन व्रत के साथ कथा का पाठ करने से पुण्य फल मिलता है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि जन्माष्टमी व्रत कथा में एक ऐसे राजा की कहानी आती है, जिन्हें पिछले जन्म के छोटे से पुण्य कर्म का बड़ा फल मिला.

नारद ने महादेव से पूछा व्रत का रहस्य

आचार्य मदन मोहन ने बताया कि एक बार नारद जी ने महादेव से व्रत बताने का अनुरोध किया. तब महादेव ने उन्हें राजा हरिश्चंद्र की कथा सुनाई. बताया गया कि राजा को वर्तमान जीवन में अपार धन-संपत्ति, वैभव और राजसी सुख प्राप्त था. लेकिन राजा खुद भी सोचते थे कि आखिर उन्हें इतना सुख किस कर्म के कारण मिला है. एक समय परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उनके अपने लोगों ने उनका साथ छोड़ दिया. 

यह भी पढ़ें: जन्माष्टमी पर ऐसे करें नंदलाल की पूजा, इन मंत्रों के जप से करें प्रसन्न

कमल के फूलों से की थी श्रीहरि की पूजा

कथा के अनुसार, वह पत्नी के साथ महल छोड़ आए और दोनों एक जंगल में पहुंचे, जहां उन्हें कमल से भरा एक सरोवर दिखाई दिया. वे कमल के फूल लेकर वाराणसी पहुंचे, लेकिन फूल बिक नहीं सके. इसी दौरान उन्हें पूजा और उत्सव की आवााज सुनाई दी. वहां काशी के राजा इन्द्रद्युम्न की पुत्री चंद्रावती जन्माष्टमी का जयंती व्रत कर रही थीं. दोनों ने वहां भगवान श्रीहरि की पूजा में कमल के फूल अर्पित किए और बचे हुए फूल भगवान के पास बिखेर दिए. राजकुमारी ने उन्हें धन और भोजन देनाा चाहा, लेकिन दोनों ने कुछ भी स्वीकार नहीं किया.

उसी पुण्य से मिला राजसी सुख

राजा को बताया कि पिछले जन्म में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान की श्रद्धा से की गई पूजा और कमल अर्पित करने का यही पुण्य उन्हें वर्तमान जन्म में मिला है. इसी पुण्य के प्रभाव से उन्हें राजसी सुख, संपत्ति और दिव्य विमान की प्राप्ति हुई. आचार्य ने बतायाा कि यह कथा जन्माष्टमी पर श्रद्धा, पूजा और अच्छे कर्मों के महत्व को बताती है.

यह भी पढ़ें: जन्माष्टमी 2026 पर घर जरूर लाएं ये 5 चीजें, सुख-समृद्धि और सौभाग्य का होगा आगमन

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Janmashtami Vrat Katha, Janmashtami Prasad
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com