विज्ञापन

एकादशी के व्रत का पारण कितने बजे तक है? जानें परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण कैसे करें

शास्त्रों में बताया गया है कि व्रत का पूरा फल तभी मिलता है, जब पारण सही समय और नियमों के अनुसार किया जाए. ऐसे में आइए जानते हैं आज एकादशी व्रत का पारण करने के लिए शुभ समय क्या रहेगा, साथ ही जानेंगे पारण की विधि-

एकादशी के व्रत का पारण कितने बजे तक है? जानें परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण कैसे करें
परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण का शुभ समय
(Photo Credit: NDTV)

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए खास माना जाता है. सालभर में आने वाली कुल 24 एकादशियों में हर एक का अपना-अपना अलग महत्व होता है. भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता है कि नियम और भक्ति के साथ एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है.

इस बार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा गया. ऐसे में व्रत का पारण आज यानी 23 सितंबर को किया जाएगा. शास्त्रों में बताया गया है कि व्रत का पूरा फल तभी मिलता है, जब पारण सही समय और नियमों के अनुसार किया जाए. ऐसे में आइए जानते हैं आज एकादशी व्रत का पारण करने के लिए शुभ समय क्या रहेगा, साथ ही जानेंगे पारण की विधि- 

परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण का शुभ समय

पंचांग के अनुसार, व्रत खोलने के लिए सुबह 5 बजकर 38 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहने वाला है. अगर आपने कल उपवास किया था, तो आज आप इस अवधि में व्रत का पारण कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारण करते समय हरि वासर का ध्यान रखना चाहिए. द्वादशी तिथि के शुरुआती हिस्से को हरि वासर कहा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान एकादशी का व्रत नहीं खोलना चाहिए. हरि वासर समाप्त होने के बाद द्वादशी तिथि में पारण करना शुभ माना जाता है.

कैसे करें एकादशी व्रत का पारण?
  • पारण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. 
  • इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके भगवान विष्णु की पूजा करें. 
  • परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करना शुभ माना जाता है.
  • पूजा के दौरान भगवान को जल, चंदन, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें. 
  • इसके बाद दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का जाप करें.
  • पूजा पूरी होने के बाद भगवान को भोग लगाएं और अंत में आरती करें.

इसके बाद आप प्रसाद, जल या तुलसी दल ग्रहण करके व्रत खोल सकते हैं. पारण के समय हल्का और सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है. इस तरह श्रद्धा और नियम के साथ व्रत का समापन किया जा सकता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

यह भी पढ़ें- Mars Transit 2026: कर्क राशि में मंगल का गोचर, जय मदान से जानिए लाइफ में क्या होगा असर और जरूरी उपाय

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Ekadashi, Faith News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com