देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनियाभर में मशहूर है. इस पावन धरा पर स्थित श्री रघुनाथ मंदिर भगवान श्री राम को समर्पित अत्यंत पवित्र, ऐतिहासिक और आस्था का एक प्रमुख केंद्र है.उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल श्री रघुनाथ मंदिर की ऐतिहासिक सांस्कृति विरासत का बखान किया. उन्होंने मंदिर का भव्य वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग में, जहां पवित्र अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम होता है, वहां प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर स्थित है. यह भगवान श्रीराम को समर्पित एक ऐतिहासिक और पवित्र मंदिर है. यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, भक्ति और विश्वास का प्रमुख केंद्र रहा है".
उन्होंने आगे लिखा, "प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह पवित्र धाम भक्तों को शांति, सुकून और दिव्य अनुभूति का अनोखा अनुभव कराता है. अगर, आप टिहरी गढ़वाल की यात्रा पर जाएं, तो इस पावन श्री रघुनाथ मंदिर के दर्शन और आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें". भगवान श्रीराम को समर्पित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्व रखता है बल्कि, अद्भुत वास्तुकला और पौराणिक कथाओं के कारण भी विशेष स्थान रखता है.
जनपद टिहरी गढ़वाल के देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी के पावन संगम के समीप स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित एक दिव्य एवं ऐतिहासिक स्थल है। अनेक वर्षों से यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, भक्ति और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 25, 2026
प्राकृतिक सौंदर्य… pic.twitter.com/ZSQ0INzuv6
ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति के लिए भगवान राम ने की थी तपस्या
उत्तराखंड का श्री रघुनाथ मंदिर टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदियों के संगम के पास स्थित भगवान विष्णु व श्रीराम को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और दिव्य तीर्थस्थल है. इसका वर्णन स्कंद पुराण के केदार खंड में मिलता है. मान्यता है कि रावण वध के बाद ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने यहीं तपस्या की थी.
यह भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशम में से एक है और यह मंदिर उत्तर भारतीय 'देउला' वास्तुकला शैली में बना है. इसका मूल जीर्णोद्धार 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा माना जाता है. वर्तमान भव्य संरचना का निर्माण जम्मू-कश्मीर के महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू कराया था और इसे 1860 में महाराजा रणबीर सिंह ने पूरा करवाया था.
यह भी पढ़ें:- Vastu Tips: बच्चों का पढ़ाई में नहीं लगता मन? स्टडी रूम में रखें ये 5 चीजें, बढ़ेगा फोकस
यह भी पढ़ें:- Grah Gochar 2026: मेष समेत इन 4 राशियों की किस्मत चमकाएगा गजलक्ष्मी राजयोग, करियर में मिलेगा बड़ा लाभ
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं