साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग रहा है शरद पूर्णिमा की रात, जानिए किस तरह चंद्रमा और मां लक्ष्मी की होती है पूजा 

Sharad Purnima 2023: शरद पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक ही दिन पड़ रहे हैं. इस मौके पर विशेषकर मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा की जाती है. जानिए इस दिन के सूतक काल और पूजा के मुहूर्त के बारे में.

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग रहा है शरद पूर्णिमा की रात, जानिए किस तरह चंद्रमा और मां लक्ष्मी की होती है पूजा 

Chandra Grahan 2023: अक्टूबर में इस दिन पड़ेगी शरद पूर्णिमा और लगेगा चंद्र ग्रहण. 

Lunar Eclipse: साल 2023 में कुल चार ग्रहण लगने थे जिनमें से 3 ग्रहण लग चुके हैं और अब चौथा ग्रहण आने वाली 28 अक्टूबर की रात लगने जा रहा है. यह चंद्र ग्रहण साल का आखिरी ग्रहण भी होने वाला है. इसी दिन शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) भी है. शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है. मान्यतानुसार शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों संग महारास किया था. भक्त इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा भी करते हैं और दान आदि भी किया जाता है. शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा होती है और चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) लगने के चलते चंद्र देव की पूजा के योग भी बन रहे हैं. यहां जानिए इस चंद्र ग्रहण का समय, शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त और मां लक्ष्मी के साथ-साथ चंद्र देव की पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में. 

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चंद्र ग्रहण का समय | Chandra Grahan Time And Date

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर की रात लगने वाला है. 28 अक्टूबर, शनिवार की मध्यरात्रि इस चंद्र ग्रहण को देखा जा सकेगा. 29 अक्टूबर का दिन 12 बजे के बाद शुरू हो जाएगा और यह ग्रहण 1:05 एएम से 2:24 एएम तक रहने वाला है. इसका कुल समय लगभग 1 घंटा 19 मिनट होगा. यह आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा और इसे यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अमेरिका, प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर से देखा जा सकेगा. 
इस चंद्र ग्रहण को भारत (India) से साफ-साफ देख पाएंगे जिस चलते इसका सूतक काल भी मान्य होगा. 

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 

पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा 28 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 17 मिनट से शुरू हो जाएगी और इसका समापन अगले दिन 29 अक्टूबर की सुबह 1 बजकर 53 मिनट पर हो जाएगी. शरद पूर्णिमा के चंद्रोदय का समय शाम 5 बजकर 20 मिनट होगा. 

कब करें पूजा 

चंद्रमा और मां लक्ष्मी की पूजा सूतक काल (Sutak Kaal) में नहीं की जा सकती है. साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत से देखा जा सकता है इसीलिए इसका सूतक काल मान्य होगा. इस चलते या तो इस दिन पूजा सूतक काल से पहले की जाए या फिर चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद. 

माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी (Ma Lakshmi) पृथ्वी का भ्रमण करती हैं. इस चलते आमतौर पर रातभर पूजा-पाठ किया जाता है और मंत्रों का जाप होता है. मंदिर में दीपक जलाया जाता है और मां लक्ष्मी के मंत्रों का 108 बार जाप होता है. जप के लिए गट्टे की माला का इस्तेमाल होता है. चंद्र ग्रहण लगने से पहले या ग्रहण समाप्त हो जाने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा सकता है. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)