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आषाढ़ अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी मनाई जाती है. इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश के 'अनिरुद्ध' स्वरूप की पूजा की जाती है.

आषाढ़ अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
आषाढ़ अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी
file photo

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी मनाई जाती है. इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश के 'अनिरुद्ध' स्वरूप की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इससे जीवन की सभी बड़ी बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में मनवांछित सफलता मिलती है. इसके साथ ही सुख-समृद्धि का आगमन होता है, श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करते हैं.

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त

  • विनायक चतुर्थी पर दोपहर में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है.
  • पूजा मुहूर्त- दोपहर 11:05 बजे से 01:50 बजे तक

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, अनिरुद्ध विनायक स्वरूप की पूजा करने से भक्तों के सभी रुके हुए काम पूरे होते हैं, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है. विशेष रूप से इस दिन बनने वाले शुभ योगों में किया गया व्रत और पूजन जीवन में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और शांति लाता है. नए कार्य की शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है.

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पर दान और उपाय

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के मौके पर दान करना बहुत लाभकारी माना जाता है. इस विशेष दिन पर गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाना बहुत शुभ माना जाता है. इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग, हरी सब्जियां या हरे वस्त्रों का दान करें.

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पूजा विधि

स्नान और संकल्प- सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र (पीले या लाल) धारण करें. पूजा स्थल को साफ करें और व्रत रखने का संकल्प लें.

मूर्ति स्थापना- एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.

प्रिय चीजें अर्पित करें- गणेश जी को 21 दूर्वा (घास), लाल फूल और सिंदूर अवश्य चढ़ाएं. यह इस दिन बहुत शुभ माना जाता है.

भोग और आरती- भगवान को मोदक, लड्डू या मौसमी फलों का भोग लगाएं. इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करें.

मंत्र जाप- पूजा के दौरान "ॐ गं गणपतयै नमः" या "ॐ सुमुखश्चैकदन्तश्च..." मंत्र का 108 बार जाप करें. गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना भी बहुत फलदायी है.

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