Ekadashi Vrat Tut Jaye To Kya Kare: हिंदू धर्म में प्रत्येक मास में दो बार पड़ने वाले एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. भगवान विष्णु का यह व्रत जब ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को पड़ता है तो उसे अपरा या अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है. पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी का यह पावन व्रत आज 13 मई 2026, बुधवार के दिन रखा जा रहा है. हिंदू मान्यता के अनुसार अपरा एकादशी व्रत की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर साधक को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस व्रत के पुण्य प्रभाव से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है, अगर वह किसी गलती के कारण टूट या छूट जाए तो क्या करना चाहिए, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
किन गलतियों के कारण एकादशी का व्रत टूट जाता है?

एकादशी व्रत में चावल भूलकर भी नहीं खाया जाता है.चावल न खाने का यह नियम एकादशी व्रत के एक दिन पहले शाम के समय से प्रारंभ हो जाता है और एकादशी व्रत का पारण करने से पहले तक लागू रहता है.
एकादशी व्रत वाले दिन भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
एकादशी व्रत वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.मान्यता है कि स्त्री प्रसंग और मन में काम भावना लाने से भी यह व्रत टूट जाता है.
एकादशी व्रत वाले दिन भगवान श्री विष्णु को तुलसी दल चढ़ाना शुभ माना गया है, लेकिन इस दिन तुलसी दल को पौधे से तोड़ना सबसे बड़ा दोष माना गया है.मान्यता है कि एकादशी व्रत वाले दिन तुलसी को तोड़ने से इस व्रत का पुण्य समाप्त हो जाता है और व्यक्ति को दोष लगता है.ऐसे में व्यक्ति को एक-दो दिन पूर्व तुलसी तोड़कर रख लेना चाहिए.
एकादशी व्रत वाले दिन दिन में नहीं सोना चाहिए. दिन में सोने से भी इस व्रत का पुण्य क्षीण हो जाता है.
एकादशी व्रत वाले दिन बाल और नाखून आदि नहीं कटवाना चाहिए. इस नियम की अनदेखी करने पर व्रत टूट जाता है.

एकादशी व्रत छूटने या टूटने पर घबराएं नहीं
यदि आज भूलवश या फिर किसी अन्य कारण से अपरा एकादशी का व्रत छूट या टूट जाए तो आपको सबसे पहले घबराना नहीं चाहिए क्योंकि सनातन परंपरा में जाने-अनजाने हुई भूल के पश्चाताप का उपाय बताया गया है, जिसे करके आप अपने व्रत के खंडित होने या फिर छूट जाने के दोष से बच सकते हैं.
सबसे पहले करें पवित्र स्नान
हिंदू मान्यता के अनुसार जब आपको यह ज्ञात हो जाए कि आपसे गलती से भगवान विष्णु की कृपा बरसाने वाला एकादशी का व्रत छूट या टूट गया है तो आपको यदि संभव हो तो सबसे पहले गंगा स्नान करना चाहिए. यदि आप गंगा तट पर नहीं जा सकते तो आप अपने घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. यदि गंगाजल न हो तो नहाते समय मां गंगा का ध्यान करें.

श्री हरि से करें क्षमायाचना
शरीर और मन से पवित्र होने के बाद सबसे पहले श्री हरि का ध्यान करें और उनसे जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए अपने मन में क्षमा याचना करें. यदि आप संस्कृत में मंत्र पढ़ सकते हैं तो आप नीचे दिये गये मंत्र को श्रद्धा और विश्वास के साथ 11 बार पढ़कर श्री हरि से अपनी भूल के लिए माफी मांगे. यदि आप मंत्र को नहीं पढ़ पाएं तो अपने मन में सामान्य रूप से क्षमा याचना करें.
'मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन.
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे.
ॐ श्री विष्णवे नमः.
क्षमा याचनाम् समर्पयामि.'

मंत्र से मिलेगी दोष से मुक्ति
हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी कामना को पूरा करने अथव दोष से मुक्ति पाने के लिए मंत्र जप काफी प्रभावशाली माना गया है. ऐसे में साधक को अपरा एकादशी व्रत के टूटने या छूटने के दोष से बचने के लिए विष्णुप्रिया कहलाने वाली तुलसी की माला से भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ श्री विष्णवे नमः' का कम से कम 11 माला जप अवश्य करना चाहिए.
दान से दूर होंगे सारे दुख
स्नान की तरह सनातन परंपरा में दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार पावन तिथियों और पर्वों पर श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गये दान से तमाम तरह का दुख, दोष और दुर्भाग्य दूर होता है. ऐसे में आज अपरा एकादशी व्रत वाले दिन दान के शुभ प्रभाव या फिर कहें पुण्य की प्राप्ति और दोष से मुक्ति के लिए किसी मंदिर के पुजारी अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, फल, वस्त्र और धन आदि का दान अवश्य करें.
जारी रखें व्रत और उपवास
हिंदू मान्यता के अनुसार जब आपको इस बात का भान हो जाए कि आपसे गलतीवश एकादशी का व्रत छूट या टूट गया है तो आपको उसके बाद इससे जुड़े नियमों को नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि श्रद्धा और विश्वास के साथ उनका पालन करते हुए पूरी विधि-विधान से उपवास को जारी रखना चाहिए. हालांकि इस व्रत की संख्या को पूरा करने के लिए आपको एक बार अलग से इस व्रत को करने का प्रयास करना चाहिए.
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