Bihar News: बिहार के समस्तीपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो समाज में आज भी चल रही अंधविश्वास की गहरी जड़ों को उजागर करता है. जिले के वारिसनगर प्रखंड के छतनेश्वर गांव में सांप के डसने के बाद एक महिला को समय पर डॉक्टरी इलाज दिलाने के बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में डाल दिया गया. घंटों तक चले इस तांत्रिक उपचार का परिणाम बेहद दुखद रहा और महिला की जान चली गई.
जानें कैसे घटी यह दर्दनाक घटना
मृतका की पहचान मोहम्मद गुलाब की पुत्री रोजाना खातून के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार रोजाना घर के काम निपटाने के बाद बर्तन धोकर अपनी चाबी लेने गई थीं. उसी स्थान पर एक बिल में छिपे जहरीले सांप ने उनके हाथ पर डस लिया. उन्होंने तुरंत इसकी सूचना अपनी बहन को दी.
झाड़-फूंक में बर्बाद हुआ कीमती समय
सांप काटने की खबर सुनकर परिजन डरे तो जरूर लेकिन वे अस्पताल की तरफ भागने के बजाय गांव के ही एक ओझा के पास पहुंच गए. वहां काफी देर तक तंत्र-मंत्र का खेल चलता रहा और महिला की स्थिति लगातार नाजुक होती गई.
जब शरीर में जहर पूरी तरह फैल गया और ओझा के हाथ-पांव फूलने लगे तब उसने परिजनों को डॉक्टर के पास जाने को कहा. आनन-फानन में उन्हें समस्तीपुर सदर अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
पीछे छूट गए दो मासूम बच्चे
रोजाना खातून के पति दूसरे राज्य में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. इस घटना ने दो छोटे बच्चों के सिर से मां का साया हमेशा के लिए छीन लिया है. ग्रामीणों का भी यही मानना है कि यदि अंधविश्वास को दरकिनार कर शुरुआत में ही अस्पताल ले जाया जाता तो शायद आज वह जीवित होतीं.
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