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चलती मेट्रो लाइन के नीचे सुरंग बनाई, ट्रेनें एक मिनट नहीं रुकीं- दिल्ली मेट्रो की बड़ी इंजीनियरिंग सफलता

Delhi Metro: रेड लाइन जिस ऊंचे पुल (वायडक्ट) पर चलती है, उसे नीचे से कई मजबूत खंभे संभालते हैं इन्हें ही पियर (Pier) कहा जाता है. पियर पुल का पूरा भार उठाते हैं, इसलिए इनके नीचे टनल बनाना बहुत चुनौतीपूर्ण काम होता है. ज़रा-सी भी मिट्टी खिसकने या कंपन से ऊपर चल रही लाइनों में गड़बड़ी आ सकती थी.

चलती मेट्रो लाइन के नीचे सुरंग बनाई, ट्रेनें एक मिनट नहीं रुकीं- दिल्ली मेट्रो की बड़ी इंजीनियरिंग सफलता
  • दिल्ली मेट्रो ने फेज़-IV प्रोजेक्ट में रेड लाइन के नीचे पुलबंगश इलाके में भूमिगत सुरंग का निर्माण किया
  • सुरंग निर्माण के दौरान रेड लाइन की ट्रेनें एक भी दिन बंद नहीं हुईं, जिससे यातायात निर्बाध बना रहा
  • सुरंग निर्माण में रेड लाइन के पियर के आस-पास मिट्टी को मज़बूत करने के लिए ट्यूब-ए- मैनचेट तकनीक का उपयोग किया
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नई दिल्‍ली:

दिल्ली मेट्रो ने अपने फेज़-IV प्रोजेक्ट में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे शहर की अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग सफलता माना जा रहा है. डीएमआरसी ने पहली बार परिचालित रेड लाइन के ठीक नीचे पुलबंगश इलाके में भूमिगत सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया और खास बात यह कि इस दौरान रेड लाइन की ट्रेनें एक भी दिन नहीं रुकीं. ये सुरंग जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम मार्ग मैजेंटा लाइन एक्सटेंशन का हिस्सा है, जिसकी डेडलाइन 2026 के अंत तक तय है.

सबसे बड़ी चुनौती: पुराने पियर का सुरक्षित रहना

पुलबंगश और सदर बाज़ार स्टेशनों के बीच सुरंग बनाने का यह कार्य विशेष तौर पर कठिन था, क्योंकि ऊपर व्यस्त रेड लाइन पर ट्रेनें एक भी दिन नहीं रुकीं, जबकि टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने उस एलिवेटेड वायडक्ट के नीचे सावधानीपूर्वक सुरंग निर्माण कार्य किए, जिस पर ट्रेनें चल रही थीं. इसके अलावा, यहां रेड लाइन वायडक्ट बैलेंस्ड कैंटिलीवर स्पैन के साथ खुली नींव पर बना है. ऐसे स्ट्रक्चर के नीचे सुरंग बनाने के लिए इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक इंजीनियरिंग सावधानियों की ज़रूरत थी.

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इस सफलता के लिए डीएमआरसी के इंजीनियरों ने कई कदम उठाए उनमें मौजूदा पियर के आस-पास ज़मीन को मज़बूत करना शामिल रहा. रेड लाइन के पियर के आस-पास के इलाके को मज़बूत करने के लिए एक डिटेल्ड स्ट्रेटेजी अपनाई गई. ट्यूब-ए- मैनचेट (TAM) नाम का एक ग्राउटिंग प्रोग्राम लागू किया गया. इस टेक्नोलॉजी के हिसाब से पियर के आस-पास 180 टीएएम बोरहोल लगाए गए. उसके बाद, मिट्टी को स्थिर करने, खाली जगहों को भरने और इस प्रोसेस में लोड उठाने की क्षमता बढ़ाने के लिए हाई-स्ट्रेंथ सीमेंट ग्राउटिंग की गई. इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया गया कि टनलिंग के दौरान मिट्टी के बैठने की सभी संभावनाएं समाप्त हो जाएं.

वर्ल्ड क्लास इंस्ट्रूमेंटेशन और रियल टाइम मॉनिटरिंग


सुरंग निर्माण के दौरान भूमि में होने वाली हलचलों, पियर के व्यवहार और बिल्डिंग की सुरक्षा को रियल-टाइम बेसिस पर मॉनिटर करने के लिए व्यापक इंस्ट्रूमेंटेशन का इस्तेमाल किया गया था. इनमें सरफेस सेटलमेंट मार्कर, डीप इनक्लिनोमीटर, बिल्डिंग सेटलमेंट पॉइंट, पियर टिल्ट मीटर और लोड सेल, ऑटोमैटिक टोटल स्टेशन (ATC) जैसे कुछ उपकरणों का उपयोग किया गया. इन उन्नत उपकरणों की रीडिंग पर नज़र रखने के लिए विशेषज्ञों को चौबीसों घंटे तैनात किया गया था. पूरे ऑपरेशन के दौरान सभी पैरामीटर तय सीमा के भीतर पाए गए.

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इस सेक्शन पर डाउनलाइन टनल का निर्माण कार्य अब पूरा हो गया है. अप-लाइन टनल पर भी उसी लेवल की सावधानी और मॉनिटरिंग के साथ काम चल रहा है. यह महत्वपूर्ण निर्माण कार्य था, क्योंकि रेड लाइन पर हर दिन औसतन सात लाख यात्री यात्रा करते हैं. इस लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही में कोई भी रुकावट आने से लोगों को बहुत परेशानी होती.

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