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1930 हेल्पलाइन की सतर्कता से बची 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला, 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर ठगी की बड़ी साजिश नाकाम

दिल्ली पुलिस की 1930 साइबर हेल्पलाइन और एक रिश्तेदार की सूझबूझ से रोहिणी में रहने वाली 72 साल की बुजुर्ग महिला 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए लाखों रुपये की ठगी का शिकार होने से बच गईं.

दिल्ली में एक बार फिर साइबर ठगों द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए ठगी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. हालांकि, इस बार दिल्ली पुलिस की 1930 साइबर हेल्पलाइन की तत्परता और एक रिश्तेदार की सूझबूझ के कारण 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला को साइबर अपराधियों का शिकार बनने से बचा लिया गया.

शुक्रवार, 30 मई 2026 की दोपहर करीब 2:45 बजे दिल्ली पुलिस की 1930 साइबर हेल्पलाइन पर एक बेहद असामान्य कॉल आई. कॉल करने वाले साहिल नामक युवक ने बताया कि रोहिणी सेक्टर-13 में अकेली रहने वाली उनकी 72 साल की बुजुर्ग रिश्तेदार फोन पर ठीक से बात नहीं कर रही हैं. उनकी आवाज बहुत घबराई हुई है और वे सामान्य रूप से जवाब भी नहीं दे पा रही हैं.

कांस्टेबल रेखा ने मामले की गंभीरता को समझा 

1930 हेल्पलाइन पर तैनात साइबर रिस्पॉन्डर कांस्टेबल रेखा ने मामले की गंभीरता को समझा और साहिल से विस्तृत जानकारी मांगी. साहिल ने बताया कि बातचीत के दौरान महिला बहुत कम शब्द बोल रही थीं, लेकिन उन्होंने एक बार 'CBI' शब्द का जिक्र किया था. कांस्टेबल रेखा के लिए यह एक संकेत ही काफी था. उन्हें तुरंत संदेह हुआ कि बुजुर्ग महिला कहीं 'डिजिटल अरेस्ट' नामक साइबर ठगी का शिकार तो नहीं हो गईं.

इमरजेंसी नंबर 112 पर भी सूचना भेजी गई

कांस्टेबल रेखा ने बिना समय गंवाए यह जानकारी 1930 हेल्पलाइन के प्रभारी अधिकारी और IFSO यूनिट के इंस्पेक्टर परवीन कुमार को दी. मामला संज्ञान में आते ही इंस्पेक्टर परवीन ने तुरंत रोहिणी साइबर पुलिस स्टेशन के SHO को फोन और व्हाट्सऐप के जरिए अलर्ट किया. इसके साथ ही इमरजेंसी नंबर 112 पर भी सूचना भेजी गई, ताकि पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंच सके.

सूचना मिलते ही रोहिणी साइबर पुलिस स्टेशन में तैनात हेड कांस्टेबल प्रदीप तुरंत महिला के घर पहुंचे. जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने पुलिस के संदेह को बिल्कुल सही साबित कर दिया. बुजुर्ग महिला वास्तव में डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड के चंगुल में फंस चुकी थीं.

वीडियो कॉल के जरिए ठगों ने संपर्क किया

पूछताछ में पता चला कि महिला को लैंडलाइन नंबर और वीडियो कॉल के जरिए ठगों ने संपर्क किया था. खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताने वाले इन अपराधियों ने महिला को डराया कि उनका नाम 6 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में आया है. ठगों ने दावा किया कि उनके खिलाफ जांच चल रही है और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' किया गया है. ठग लगातार महिला के संपर्क में बने हुए थे और उन्हें निर्देश दे रहे थे कि वे किसी से भी इस बारे में बात न करें और सिर्फ उनकी बात मानें.

डर और मानसिक दबाव के कारण महिला पूरी तरह ठगों के प्रभाव में आ चुकी थीं. यही वजह थी कि जब उनके रिश्तेदार साहिल ने उन्हें फोन किया, तो वे ठीक से बात नहीं कर पा रही थीं और बेहद घबराई हुई थीं. सौभाग्य से साहिल को महिला की इस असामान्य बातचीत पर शक हो गया और उन्होंने तुरंत 1930 हेल्पलाइन से संपर्क किया. इसके बाद दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने पूरे मामले का रुख बदल दिया. पुलिस अधिकारियों ने महिला को समझाया कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती और न ही कोई जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ करके पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है.

पुलिस की उचित काउंसलिंग और समय रहते किए गए हस्तक्षेप के कारण महिला ने ठगों को कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया. इस तरह उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी साइबर अपराधियों के हाथों में जाने से बच गई.

दिल्ली पुलिस ने इस घटना के बाद नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पुलिस का कहना है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती और न ही किसी व्यक्ति को ऑनलाइन निगरानी में रखती है. यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI, ED, कस्टम या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है या डराता है, तो तुरंत सावधान हो जाएं.

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घर के बुजुर्ग सदस्यों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें. यदि वे अकेले रहते हैं, तो रोजाना उनसे बात करें और उन्हें साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति जागरूक करते रहें. किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें. दिल्ली पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.

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