- दिल्ली के जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खुदवाए गए गड्ढे में 25 वर्षीय कमल की गिरकर मौत हो गई थी
- गड्ढे के पास बैरिकेडिंग नहीं थी और सुरक्षा कर्मी या निगरानी भी हादसे के समय मौजूद नहीं थे
- दिल्ली पुलिस ने ठेकेदार राजेश प्रजापति को गिरफ्तार किया, जबकि मजदूर योगेश फरार है और उसकी तलाश जारी है
दिल्ली के जनकपुरी में एक गड्ढे में गिरकर 25 साल के कमल की मौत हो गई थी. ये गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड ने खुदवाया था और इसे न तो ढका था और न ही इसके पास बैरिकेडिंग की गई थी. रात के अंधेरे में कमल इस गड्ढे में गिर गया और उसकी मौत हो गई. अब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एक ठेकेदार राजेश प्रजापति को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि राजेश और एक मजदूर योगेश को पता था कि कमल गड्ढे में गिर गया है लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को नहीं दी.
पुलिस ने बताया कि विपिन नाम के एक शख्स को पता चला कि एक बाइक सवार गड्डे में गिर गया है इस बात की जनकारी उसने वहां के गार्ड को दी. गार्ड ने वहां के मजदूर योगेश को बताया. योगेश ने 12 बजकर 22 मिनट पर राजेश प्रजापति को इसकी जानकारी. लेकिन राजेश और योगेश ने पुलिस को इस बात की जानकारी नहीं, दी, जबकि परिवार वाले कमल को देर रात तक खोजते रहे. कमल के परिवार रात डेढ़ बजे विकासपुरी थाने में गए. वहां उन्होंने बाइक नंबर और मोबाइल नंबर दिया.
राजेश गिरफ्तार, योगेश की तलाश जारी
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शनिवार को राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस का कहना है कि कमल के परिवार के लोगों से बात की जा रही है और जांच कर रहे हैं कि क्या उन्होंने योगेश से बात की थी और योगेश ने क्या इस हादसे की जानकारी किसी को दी थी या नहीं. एसीपी (वेस्ट) शरद भास्कर ने बताया कि योगेश मजदूर है और वह फिलहाल फरार है. वो इटावा का रहना है.

दिल्ली जल बोर्ड ने माना- लापरवाही हुई
इस हादसे पर दिल्ली जल बोर्ड ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट में लापरवाही की बात कबूल की है. जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जनकपुरी में काम चल रहा था. इसके तहत लगाए गए बैरिकेड्स के पास एक दुखद हादसा हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई. इस घटना ने साफ कर दिया कि काम की जगह पर लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई. यह जांच खास तौर पर यह जानने के लिए की गई कि काम की जगह पर सुरक्षा के नियमों का सही से पालन हुआ या नहीं? ये भी जांच की गई कि बैरिकेडिंग सही से की गई थी या नहीं? रात के समय सुरक्षा और निगरानी की क्या व्यवस्था थी?
जांच में क्या-क्या सामने आया?
शुरुआती जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दुर्घटना स्थल पर सड़क दोनों तरफ से बंद थी और ट्रैफिक को दूसरी दिशा में मोड़ा गया था. जांच में पता चला कि कमल बैरिकेड से घिरे और प्रतिबंधित इलाके में घुस गया था. शायद घर जल्दी पहुंचने के लिए शॉर्टकट लेने की कोशिश में में वह रॉन्ग साइड चल रहा था.
जांच में सामने आया कि काम की जगह पर लगी बैरिकेडिंग अधूरी और सही तरीके से मेंटेन नहीं की गई थी. पूरी साइट को सुरक्षित करने के लिए लोहे के मजबूत बैरिकेड जरूरी थे, जो पर्याप्त संख्या में नहीं थे. सड़क पूरी तरह सुरक्षित और समतल होने से पहले बैरिकेड हटाए नहीं जाने चाहिए थे. जहां खुदाई नहीं हुई थी, वहां सुरक्षा के लिए ग्रीन मेश नेटिंग लगाई जा सकती थी, जो नहीं पाई गई.
जांच में यह भी सामने आया कि हादसे के समय साइट पर कोई निगरानी या सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं था. यह सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है. इस लापरवाही की जिम्मेदारी ठेकेदार कंपनी KK Spun India Ltd और O Liner JV और संबंधित इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों पर बनती है.

कौन अधिकारी जिम्मेदार माने गए?
- रमेश कुमार गुप्ता, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE), प्रोजेक्ट-IV
- आजाद सिंह ग्रेवाल, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
- वंदना, सहायक अभियंता (सिविल)
- आलोक कुमार, जूनियर इंजीनियर (सिविल), संविदा पर
जिम्मेदारों के खिलाफ क्या होगा?
जांच रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सभी संबंधित ठेकेदारों को तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएं. चीफ इंजीनियर को निगरानी और नियमों के पालन की जिम्मेदारी सौंपी जाए. जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जनकपुरी की यह मौत अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का नतीजा है. हर परियोजना में लोगों की सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए. किसी भी तरह की लापरवाही या समझौता बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है.
इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि हर साइट पर बैरिकेडिंग और गड्ढों की सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. साइट इंजीनियर रोज सुरक्षा की रिपोर्ट तैयार करें. जहां-जहां काम हो रहा है, उसका फोटोग्राफिक रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए. साथ ही चीफ इंजीनियर को औचक निरीक्षण करना चाहिए.
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