नई दिल्ली:
जिस जीएसटी को एक जुलाई से लागू करने के लिए सरकार पूरा जोर लगा रही है, उससे देशभर के दिव्यांग बेहद नाराज़ हैं. नाराजगी की वजह दिव्यांगों के इस्तेमाल में आने वाली चीज़ों का कर के दायरे में आना है. माना जा रहा है कि इन चीजों पर सरकार 5 से लेकर 18% कर लगाया जाना तय हो चुका है. अब तक दिव्यांगों के इस्तेमाल में आने वाली ज़्यादातर चीज़ों पर कोई टैक्स नहीं था. ऐसे में टैक्स की मार पड़ने से नाराजगी बढ़ना स्वभाविक है.
हरमोनियम बजाकर मनोरंजन करने 21 साल के राजीव जन्म से देख नहीं सकते. दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास से स्नातक की पढ़ाई कर रहे राजीव जीएसटी की नई दरों से बेहद निराश हैं. राजीव का कहना है कि ज़्यादातर दिव्यांग लोग ग़रीब है. पहले भगवान ने नहीं सुनी और सरकार से उम्मीदें हैं लेकिन वो भी नहीं सुन रही.
जीएसटी की नई दरों के मुताबिक:-
ब्रेल टापराइटर्स पर 18%
ब्रेल काग़ज़ और घड़ियों पर 12%
विकलांगों के लिए वाहनों पर 5% कर लगाया गया है
दिव्यांग संगठनों के विरोध के बाद सरकार सभी वस्तुओं पर 5% कर निर्धारित करने पर विचार कर रही है. जानकारों की मानें तो दिव्यांगों पर कर लगाना ही ग़लत है. अब्दी डिसेबिलिटी राट्स ग्रूप के संस्थापक जावेद अब्दी ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि सभी करों को शून्य किया जाए. विकलांग पहले से ही शोषित हैं. उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
नेत्रहीनों के लिए काम करने वाले जीवेश का कहना है कि सरकार को ये नहीं पता कि ब्रेल टाइपराइटर और ब्रेलर एक ही है. सरकार को इनकी ज़रूरतें समझकर ही कर प्रणाली तय करने चाहिए. सरकार को सोंचना चाहिए कि कर में छूट देकर सरकार दिव्यांगों को प्रोत्साहित करना चाहती है या फिर टैक्स लगाकर उन पर अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है.
हरमोनियम बजाकर मनोरंजन करने 21 साल के राजीव जन्म से देख नहीं सकते. दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास से स्नातक की पढ़ाई कर रहे राजीव जीएसटी की नई दरों से बेहद निराश हैं. राजीव का कहना है कि ज़्यादातर दिव्यांग लोग ग़रीब है. पहले भगवान ने नहीं सुनी और सरकार से उम्मीदें हैं लेकिन वो भी नहीं सुन रही.
जीएसटी की नई दरों के मुताबिक:-
ब्रेल टापराइटर्स पर 18%
ब्रेल काग़ज़ और घड़ियों पर 12%
विकलांगों के लिए वाहनों पर 5% कर लगाया गया है
दिव्यांग संगठनों के विरोध के बाद सरकार सभी वस्तुओं पर 5% कर निर्धारित करने पर विचार कर रही है. जानकारों की मानें तो दिव्यांगों पर कर लगाना ही ग़लत है. अब्दी डिसेबिलिटी राट्स ग्रूप के संस्थापक जावेद अब्दी ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि सभी करों को शून्य किया जाए. विकलांग पहले से ही शोषित हैं. उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
नेत्रहीनों के लिए काम करने वाले जीवेश का कहना है कि सरकार को ये नहीं पता कि ब्रेल टाइपराइटर और ब्रेलर एक ही है. सरकार को इनकी ज़रूरतें समझकर ही कर प्रणाली तय करने चाहिए. सरकार को सोंचना चाहिए कि कर में छूट देकर सरकार दिव्यांगों को प्रोत्साहित करना चाहती है या फिर टैक्स लगाकर उन पर अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है.
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