
बरसात से पहले नालों की सफाई नहीं होने पर दिल्ली सरकार ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
दिल्ली सरकार ने बुधवार और गुरुवार को दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है. खास बात यह है कि इसमें आम आदमी पार्टी अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली है. दरअसल, दिल्ली में बरसात से पहले सभी नालों की सफाई के लिए दिल्ली सरकार ने अपने ही लोक निर्माण विभाग और दिल्ली नगर निगम को सख्त निर्देश दिए गए थे ताकि इस बार जल भराव ना हो. लेकिन खुद सरकार के विधायक कह रहे हैं इन दोनों संस्थानों ने काम ठीक से नहीं किया है इसलिए विधानसभा की पिटीशन समिति इस पर अपनी रिपोर्ट देगी.
दिल्ली विधानसभा में पिटीशन कमेटी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बताया कि जब समिति जांच करने गई तो ज़्यादातर जगहों पर नालों के अंदर सिल्ट और कूड़ा मिला और ऐसा लग नहीं रहा था वहां पर सफाई फिलहाल में हुई है. इसमें लोक निर्माण विभाग और नगर निगम सब हैं, जहां अनियमितता पाई गई थी. सौरभ ने बताया कि समिति ने इस मामले पूछताछ के लिए लोक निर्माण विभाग के मुख्य सचिव और दिल्ली नगर निगम के आला अधिकारियों को बुलाया गया है.
वैसे लोक निर्माण विभाग के मंत्री सत्येंद्र जैन हैं लेकिन विधानसभा की पिटीशन कमेटी रिपोर्ट में अधिकारियों को जवाबदेह बताया जाएगा.
खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज़ चल रहे हैं क्योंकि अधिकारी मुख्यमंत्री या मंत्री की बजाय उप-राज्यपाल से निर्देश लेते हैं. केजरीवाल लोक निर्माण विभाग के सचिव से पहले ही नाराज़गी जता चुके हैं.
बीजेपी विधायक मनजिंदर सिरसा का कहना है कि दिल्ली सरकार के लोग खुद तो काम नहीं कर पा रहे. अधिकारियों पर दबाव बनाकर ब्लैकमेलिंग करते हैं. उन्होंने कहा कि अब वे अधिकारी जिनसे केजरीवाल के रिश्तेदार ने नकली बिल बनवाते हैं और जब वे नही बनाते तो आप दबाव बनाते हैं कमेटी बनाकर उनको डांटते हैं, उनकी बेइज़्ज़त करते हैं और फिर उम्मीद करते हैं अधिकारी आपके लिए काम करेंगे?
उधर, अब जब नालों की सफाई के लिए अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा तो ये सवाल ज़रूर उठेगा कि जब दिल्ली में पानी की सप्लाई की दिक्कत हुई या पानी के बिल बढ़े हुए आए तो केजरीवाल सरकार ने अपने मंत्री को ज़िम्मेदार मानते हुए मंत्रिमंडल से हटा दिया, लेकिन जब नाले साफ नहीं हुए तो मंत्री नहीं, अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.
दिल्ली विधानसभा में पिटीशन कमेटी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बताया कि जब समिति जांच करने गई तो ज़्यादातर जगहों पर नालों के अंदर सिल्ट और कूड़ा मिला और ऐसा लग नहीं रहा था वहां पर सफाई फिलहाल में हुई है. इसमें लोक निर्माण विभाग और नगर निगम सब हैं, जहां अनियमितता पाई गई थी. सौरभ ने बताया कि समिति ने इस मामले पूछताछ के लिए लोक निर्माण विभाग के मुख्य सचिव और दिल्ली नगर निगम के आला अधिकारियों को बुलाया गया है.
वैसे लोक निर्माण विभाग के मंत्री सत्येंद्र जैन हैं लेकिन विधानसभा की पिटीशन कमेटी रिपोर्ट में अधिकारियों को जवाबदेह बताया जाएगा.
खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज़ चल रहे हैं क्योंकि अधिकारी मुख्यमंत्री या मंत्री की बजाय उप-राज्यपाल से निर्देश लेते हैं. केजरीवाल लोक निर्माण विभाग के सचिव से पहले ही नाराज़गी जता चुके हैं.
बीजेपी विधायक मनजिंदर सिरसा का कहना है कि दिल्ली सरकार के लोग खुद तो काम नहीं कर पा रहे. अधिकारियों पर दबाव बनाकर ब्लैकमेलिंग करते हैं. उन्होंने कहा कि अब वे अधिकारी जिनसे केजरीवाल के रिश्तेदार ने नकली बिल बनवाते हैं और जब वे नही बनाते तो आप दबाव बनाते हैं कमेटी बनाकर उनको डांटते हैं, उनकी बेइज़्ज़त करते हैं और फिर उम्मीद करते हैं अधिकारी आपके लिए काम करेंगे?
उधर, अब जब नालों की सफाई के लिए अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा तो ये सवाल ज़रूर उठेगा कि जब दिल्ली में पानी की सप्लाई की दिक्कत हुई या पानी के बिल बढ़े हुए आए तो केजरीवाल सरकार ने अपने मंत्री को ज़िम्मेदार मानते हुए मंत्रिमंडल से हटा दिया, लेकिन जब नाले साफ नहीं हुए तो मंत्री नहीं, अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.
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